शारदीय नवरात्रि पर्व पर अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए करें आराधना : महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती का एक साथ करें दर्शन
BY: DB News Update / Edited By: प्रिंस अवस्थी
Tripur Sundri Mandir Jabalpur News: आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना व उपासना का पर्व शारदीय नवरात्रि आज 22 सितंबर से प्रारंभ होने जा रही है. इस नवरात्रि शक्ति स्वरूपा भगवती दुर्गा की आराधना व भक्ति में देशभर में लोग पूजा-पाठ करने में लीन रहते हैं. भगवती मां दुर्गा काे प्रसन्न करने के लिए कई भक्त तांत्रिक पूजा भी करते हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि एमपी जबलपुर में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां धन, संपदा, वैभव और ऐश्वर्य की प्राप्ति मात्र दर्शन करने से होती है. यदि आप में से किसी ने इस मंदिर का दर्शन लाभ नहीं लिया है तो आइए हम बता रहे हैं, इस मंदिर का चमत्कार और खसियत.
मध्य प्रदेश जबलपुर शहर से मात्र 18 किमी दूर तेवर गांव है. इस गांव के लोग बड़ी खेरमाई नाम से इस मंदिर को पुकारते हैं. लेकिन इस मंदिर में विराजमान भगवती देवी की ऐसी प्रतिमा है, जिसकाे देखकर सभी अचंभित भी होते हैं. क्योंकि इस मंदिर में विराजमान प्रतिमा में एक साथ तीन देवियों के एक साथ दर्शन हो जाते हंै. त्रिपुर सुंदरी के नाम से यह मंदिर देश भर में प्रसिद्धि पाो चुका है. क्योंकि यहां महालक्ष्मी, महाकाली, और महासरस्वती का दर्शन एक साथ कहीं और नहीं होते हैं. इतना ही नहीं इस मंदिर में मांगी गई भक्तों की हर इच्छा की पूर्ति भी होती है, जिसके कारण नवरात्रि के दिनों में भक्तों का तांता लगा रहता है. देश-विदेश से भक्त बड़ी संख्या में इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं. क्षेत्रीय लोग बताते हैं कि कालांतर में यह मंदिर बड़ी खेरमाई के नाम से जाना जाता था. जिसकी स्थापना कलचुरी काल में की गई थी और यह मंदिर राजा दानवीर कर्ण की कुलदेवी के नाम से प्रसिद्ध है.
राजा के खजाने में कभी नहीं घटा सोना
तेवर गांव के रहवासियों से इस मंदिर की खासियत जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कई रहस्य उजागार किए. उनका कहना था कि मां त्रिपुर सुंदरी का यह मंदिर हजारों साल पुराना है. इस मंदिर को मानने वाले बताते हैं कि त्रिपुर सुंदरी का यह मंदिर कलचुरी राजा दानवीर कर्ण की कुलदेवी थीं. राजा कर्ण त्रिपुर सुंदरी देवी की पूजा, आराधना इतनी श्रद्धा-भाव से करता था कि त्रिपुर सुंदरी देवी मां ने राजा कर्ण को ऐसा वरदान दिया था कि वह चाहे जितना भी दान कर ले, उसके खजाने में हमेशा सवा मन सोना बना रहेगा. जब राजा कर्ण ने देवी मां से वरदान मांगा कि जिस तरह मैं हमेशा आपकी सेवा करता हूं और मैं स्वयं को आपकी सेवा में अर्पित कर दिया है और आपने हम पर कृपा की है. भविष्य में आपके द्वारा भक्तों को भी इसी प्रकार आपकी कृपा मिलती रहे, ऐसा कोई उपाय कर दीजिए. राजा की भक्ति से प्रसन्न होकर मां त्रिपुर सुंदरी ने वरदान दिया कि जो भी हमारा भक्त बड़ी श्रद्धा-भाक्ति से हमारे दरबार में आएगा और एक नारियल चढ़ाएगा, उस भक्त की हर मनोकामना पूरी हो जाएगी. तब से त्रिपुर सुंदरी मंदिर में अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए बड़ी संख्या में भक्त माता त्रिपुर सुंदरी के दरबार में नारियल बांध रहे हैं और इच्छा पूर्ति होने के बाद उसे तोड़ देते हैं. यह सिलसिला आज भी जारी है.
पुराततत्व विभाग के हवाले है त्रिपुर सुंदरी मंदिर
तेवर गांव का यह त्रिपुर सुंदरी मंदिर पुरातत्व विभाग के हवाले हो चुका है. पुरातत्व विभाग के द्वारा त्रिपुर सुंदरी की इस प्रतिमा की जांच कराई गई, जिसमें पाया गया कि यह प्रतिमा करीब 2000 साल पुरानी है. मान्यता यह भी है कि यहां विराजमान मूर्ति हजारों साल पुरानी है. क्योंकि इस मंदिर में विराजमान भगवती त्रिपुर सुंदरी की शिला पर एक साथ महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली एक साथ दर्शन दे रही हैं. ऐसी प्रतिमा कहीं अन्यत्र देखने को नहीं मिलती है.
जम्मू-कश्मीन के त्रिकूट पर्वत पर मां वैष्णो देवी विराजमान हैं, जिनमें इन तीनों देवियों का पिंडी स्वरूप में दर्शन लाभ प्राप्त होता है. लेकिन जबलपुर तेवर गांव के इस त्रिपुर सुंदरी मंदिर में तीनों देवियों के प्रतिमा स्वरूप का दर्शन लाभ प्राप्त होता है.
नवरात्रि के दिनों में बड़ी संख्या में दर्शन लाभ लेते हैं भक्त
मान्यता यह भी है कि मंदिर में स्थापित मातारानी की मूर्ति भूमि के अंदर से अवतरित हुई थी. यह मूर्ति केवल एक शिलाखंड के सहारे पश्चिम दिशा की ओर मुंह किए अधलेटी अवस्था में विराजमान है. जिसमें महाकाली, महालक्षमी और मां सरस्वती की एक साथ विशाल मूर्तियों के दर्शन होते हैं. यहां शक्ति के रूप में तीन माताएं मूर्ति रूप में विराजमान हैं, इसलिए मंदिर के नाम को उन तीन देवियों की शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक माना गया है.
ऐसी है त्रिपुर सुंदरी मंदिर की मान्यता
- -त्रिपुर सुंदरी की आराधना करने वाले भक्त को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है.
- -त्रिपुर सुंदरी की इस मंदिर में विराजमान प्रतिमा में एक साथ तीन रूपों में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के दर्शन प्राप्त होते हैं.
- -मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा-भक्ति से यदि इस मंदिर में एक नारियल बांध देता है तो उसके सारे दु:ख-कष्ट नष्ट हो जाते हैं.
- -मोक्षदायनी मां नर्मदा और उसी के निकट विराजमान भगवती त्रिपुर सुंदरी मंदिर का दर्शन लाभ एक साथ हो जाते हैं.
- -मान्यता यह भी है कि आदिगुरु शंकराचार्य जी महाराज जो भगवान शंकरजी के साक्षात अवतार थे, उनको मां नर्मदा के इसी त्रिपुर क्षेत्र में ही उन्हें गुरुजी के दर्शन हुए थे.
- -भेड़ाघाट रोड पर हथियागढ़ नाम से प्रसिद्ध तेवर गांव में विराजमान माता त्रिपुर सुंदरी राज राजेश्वरी जी दर्शन दे रही हैं.
- – मान्यता यह भी है कि 11वीं शताब्दी में कल्चुरी राजा कर्णदेव ने इसका निर्माण कराया था. यहां पर एक शिलालेख है, जिससे इसकी पुष्टि होती है.
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