जबलपुर में बड़ी खेरमाई के नाम से प्रसिद्ध है यह देवी मंदिर, नवरात्रि के दिनों में भक्तों की लगती है कतार
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Jabalpur In Badi Khermai : संस्कारधानी जाबालिपुरम् की पहचान धर्मधानी के रूप में भी है. यहां हर तीज-त्योहार मनाने का चलन है. दशहरा, दीपावली, नवरात्रि, गणेश चतुर्थी, रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी के अलावा जितने भी अन्य उत्सव हैं, उन्हें बड़े ही उमंग-उत्साह के साथ मनाया जाता है. शारदीय नवरात्रि के अवसर पर अक्सर भक्तों के मन में देवी मंदिरों का दर्शन करने की अभिलाषा होती है. ऐसे समय पर आज हम बताने जा रहे उस चमत्कारिक मंदिर के बारे में जहां बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ लगती है और माता रानी अलग-अलग स्वरूपों में अपने भक्तों को दर्शन देती हैं. खेरदाई (खेरमाई) मातारानी के नाम से प्रतिष्ठित यह मंदिर भानतलैया के पास है. नवरात्रि के दिनों में यहां की भव्यता देखने लायक रहती है. यहां चलने वाला 9 दिनों का अनुष्ठान भक्तों को आकर्षित करता है. भक्त मातारानी के दरबार में दौड़े चले आते हैं.
ऐसे पड़ा खेरमाई नाम
बताया जा रहा है कि वर्षों पहले गांव खेड़ा की भाषा काफी प्रचलन में थी, पूरा क्षेत्र इसी भाषा का प्रयोग किया करता था और गांव खेड़ा से खेड़ा शब्द धीरे-धीरे खेरमाई में प्रचलित हो गया. इसलिए मां खेर दाई का नाम खेर माई के नाम से प्रसिद्ध हो गया. जबलपुर शहर की सबसे प्राचीन और पुरातन प्रतिमा होने के कारण मां खेर माई को यहां पर बड़ी खेरमाई के नाम से पहचान मिल गई.
शक्तिपीठों में पहचानी जाती हैं खेरमाई
खेरमाई का यह मंदिर कलचुरी कॉलीन की बताया जा रहा है. जिसका निर्माण राजा नरसिंहदेव की माता अल्हण देवी के द्वारा कराया गया था. मान्यता है कि यहां सती माता का जबड़ा गिरा था, जिसका वर्णन देवी पुराण में भी मिलता है. इस मंदिर को 52वीं शक्तिपीठों में गिना जा रहा है. जिनका दर्शन लाभ लेने के लिए दूर-दराज से भक्त यहां पहुंच रहे हैं.
इतिहासकारों की ऐसी है मान्यता
इतिहासकारों की मानें तो कलचुरि काल के अवसान के बाद गोंडवाना साम्राज्य का उदय हुआ. सन् 1290 में कड़ा और मानिकपुर के तुर्क सूबेदार अलाउद्दीन खिलजी ने गोंडवाना साम्राज्य पर हमला कर दिया. तत्कालीन गोंड राजा मदनशाह अचानक हमले के परास्त होकर, भानतलैया स्थित खेरमाई मां की शिला के पास बैठ गए. जहां उन्हें आध्यात्मिक अनुभूति हुई, पूजा के बाद उनमें अद्भुत शक्ति का संचार हुआ और मदनशाह ने तुर्क सेना पर आक्रमण कर अलाउद्दीन खिलजी को परास्त कर खदेड़ दिया. सन् 1480 में अमानदास गोंडवाना के महाप्रतापी सम्राट बने जो राजा संग्रामशाह के नाम से प्रसिद्ध हैं.
मंदिर के चमत्कारिक रहस्य
- बड़ी खेरमाई की कृपा से राजा संग्रामशाह जीवनभर अपराजेय रहे.
- मां खेरमाई (खेरदाई) का ग्राम देवी के रूप में पूजन आज भी किया जाता है.
- यहां हनुमान जी और भैरवबाबा भी विराजमान हैं.
- यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में गिना जाता है.
इन नियमों का पालन जरूर करें
- सोशल मीडिया इंटरनेट पर किसी भी रील को देखकर उससे प्राप्त वैदिक मंत्र का जप बिल्कुल न करें.
- नवरात्रि के दिनों में संकल्प उतना ही लें जितना आपके बस में हो, बाद में इसे पूरा न कर पाने पर आप दंड के अधिकारी बनेंगे. इस वजह से सामान्य पूजा करें और सरल नियमों को ही अपनाएं.
- जिन्होंने गुरु मंत्र नहीं लिया है, वे दुर्गा नाम का जप कर सकते हैं.
- आसपास बने माता रानी के पंडाल में जरूर जाएं और समय पर भगवती का नित्य दर्शन करें.
- नवरात्रि के नौ दिन बाल और नाखून न कटवाए और ब्रह्मचर्य का पालन करें.
- नवरात्रि के दौरान जो भी पुरुष माता रानी की पूजा-अर्चना करते हैं, उन्हें धोती जरूर पहननी चाहिए.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

