भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मीडिया को जानकारी देत हुए कहा कि 28 अक्टूबर से 3 नंवबर 2025 तक प्रिटिंग और ट्रेनिंग होगी.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
SIR News: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और गुजरात में आज से SIR शुरू होने जा रहा है. इसके लिए 27 अक्टूबर को भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मीडिया के समझ ऐलान किया था. मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के कार्यक्रम का ऐलान राजधानी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में प्रेस वार्ता के दौरान किया गया था. सीईसी ज्ञानेश कुमार ने उन राज्यों की सूची जारी की है जहां SIR की प्रक्रिया अपनाई जाना है. जिन राज्यों में SIR होना है वहां की मतदाता सूची आज रात 12 बजे फ्रीज कर दी गई है.
कब क्या होगा?
- 28 अक्टूबर से 3 नंवबर 2025 तक प्रिटिंग और ट्रेनिंग होगी.
- 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक हाउस न्यूमेरेशन फॉर्म दिया जाएगा.
- 9 दिसंबर 2025 को इलेक्टोरल रोल्स के ड्राफ्ट का प्रकाशन होगा.
- आपत्ति और दावे दाखिल करने के लिए 9 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 तक का समय दिया जाएगा.
- 9 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक नोटिस फेज होगा.
- 7 फरवरी 2026 तक फाइनल इलेक्टोरल रोल प्रकाशित किया जाएगा.
हर बूथ पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे
सीईसी ने कहा कि एक बूथ पर एक परिवार के सभी लोगों का नाम होगा इससे मतदाताओं को सुविधा होती है. हर बूथ पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे. कुछ नए पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे जिसमें हाईराइज सोसाइटीज भी शामिल हैं.
8 बार हो चुका है SIR
सीईसी ने बताया कि SIR का उद्देश्य योग्य मतदाता को शामिल करना, अयोग्य को सूची से बाहर करना. SIR दूसरे चरण में 12 राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू किया जाएगा. उन्होंने बताया कि 1951 से 2004 तक 8 बार SIR हो चुका है. सभी राजनीतिक दलों ने अब तक मतदाता सूची में कमियों की शिकायत की थी.
3 बार हर घर जाएंगे BLO
उन्होंने कहा कि आज ही न्यूमेरेशन फॉर्म सभी मतदाताओं के लिए प्रिंट किया जाएगा. हर BLO कम से कम 3 बार हर घर जाएंगे. बाहर रहने वाले मतदाता ऑनलाइन भी EF भर सकते हैं. न्यूमेरेशन फॉर्म के समय किसी और डॉक्यूमेंट या फार्म भरने की जरूरत नहीं होगी. ज्ञानेश कुमार ने कहा कि उसके बाद ड्राफ्ट सूची बनाई जाएगी जिनका EF वापस मिल जाएगा. जिन मतदाताओं की लिंकिंग नहीं हो पाएगी उनको नोटिस भेजा जाएगा जिस से वो अपनी जानकारी दे सके.
एसआईआर को लेकर बवाल
देश भर में एसआईआर को लेकर बवाल मचा हुआ है. राजनीतिक पार्टियां आरोप लगा रही हैं कि निर्वाचन आयोग के माध्यम से सरकार वास्तविक वोटरों को हटाना चाहती है और चुनाव जीतना चाहती है. सरकार भारत के नागरिकों को नागरिक नहीं मालती है. इसी कारण जिन लोगों के वोटर कार्ड वर्तमान में हैं, उन्हें भी संदेह के घेरे में रख रही है. चुनाव आयोग सरकार की तररफ से काम कर रहा है. इस प्रकार के कई आरोप विपक्षी पार्टियां लगा चुकी हैं. लेकिन चुनाव आयोग एसआईआर के काम को पारदर्शी बता रहा है और वास्तविक वोटरों को वोट डालने का हक दिलाने की बात कर रहा है. इसके पीछे क्या मंशा है? यह चुनाव आयोग और सरकार जानें. लेकिन एसआईआर प्रक्रिया से देश भर में बवाल मचा हुआ है.
पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा समस्या
बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा अवैध वोटर हैं. क्योंकि बग्लादेश की सीमा इस प्रदेश से लगी हुई है और बग्लादेशी घुसपैठी भारत आकर अवैध वोटर कार्ड, आधार कार्ड बनवा लेते हैं और भारत के रहवासियों के हक पर डाका डालने लगते हैं. इन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से भी वोटर कार्ड में सुधार कार्य कराए जाने की बात कही जा रही है. यही हाल बिहार का भी बताया जा रहा है. यहां भी सबसे ज्यादा अवैध वोटर मिलने की सूचना मिली है. सरकार सख्ती के साथ अवैध वोटरों का नाम हटाने का दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है. देश के हर राज्य में चुनाव आयोग के एसआईआर सर्वे में लाखों की संख्या में अवैध वोटर मिले हैं. जिनके नाम हटाए गए हैं और उनका नाम वोटर लिस्ट से काटा गया है. उन्हीं अवैध वोट को काटे जाने का डर सभी राजनीतिक पार्टियों को सता रहा है.

