अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने सरकार पर बेटे के साथ धोखा करने का आरोप लगाया
Source : DB News Update
by-DB News Update | Edited By-सुप्रिया
पंजाब.
तरसेम सिंह ने कहा, “अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार कर डिब्रूगढ़ जेल ले जाना, पंजाब के लोगों साथ नाइंसाफी है. मैं लोगों से अमृतपाल सिंह की रिहाई के लिए आवाज उठाने की गुजारिश करूंगा.” पिछले बयान में अमृतपाल सिंह के पिता ने कहा था था कि हमें अभी तक यह नहीं बताया गया है कि वह डिब्रूगढ़ जेल से यहां पहुंचे हैं या नहीं. अमृतपाल सिंह का खडूर साहिब से लोकसभा सदस्य बनना, मतदाताओं और दुनिया भर में रहने वाले पंजाबियों के लिए खुशी की बात है. सरकार को पंजाब के लोगों को एक बार उनसे मिलने की इजाजत देनी चाहिए. उन्हें बिना शर्त रिहा किया जाना चाहिए.
पंजाब के खडूर साहिब लोकसभा सीट से निर्दलीय
चुनाव लड़ने और जीत दर्ज करने वाले वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह ने पांच जुलाई को सांसद पद की शपथ ली. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अमृतपाल को सांसद पद की शपथ दिलाई. अमृतपाल के सांसद बनने पर उसके परिवारवालों ने खुशी जताई है. अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह ने कहा कि उन्हें इस मुकाम पर जिन लोगों ने पहुंचाया, उन सभी लोगों का आभार व्यक्त करता हूं.
अमृतपाल सिंह के पिता का छलका दर्द
आईएएनएस से बातचीत के दौरान अमृतपाल सिंह के पिता ने बेटे को लेकर अपना दर्द बयां किया. तरसेम सिंह ने कहा, “सरकार ने मेरे बेटे के साथ धोखा किया है. सरकार ने अमृतपाल सिंह पर एनएसए लगाकर बहुत बड़ा धोखा किया है. पूरे सिख समुदाय और पंजाब के लोगों को उम्मीद है कि अब उन्हें रिहा किया जाएगा. अमृतपाल सिंह ने हमेशा सिख मसले को लेकर आवाज उठाई है. सिख समुदाय की आवाज हमेशा बुलंद की है.” उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार की भूमिका हमेशा नेगेटिव रही है. अमृतपाल सिंह तो नशे से बचने के मुहिम चला रहे थे. लेकिन, गलत इल्जाम लगाकर उन्हें फंसाया गया है.
जेल में अभी 680 कैदी हैं
डिब्रूगढ़ की जेल 1860 में अंग्रेजों ने बनाई थी. असम सरकार द्वारा जारी की गई पाक्षिक जेल जनसंख्या रिकॉर्ड के अनुसार इस जेल में अभी 680 कैदी हैं. डिब्रूगढ़ जेल वर्तमान में राज्य की तीसरी सबसे अधिक कैदी संख्या वाली केंद्रीय जेल है, जो कि गुवाहाटी और तेजपुर की केंद्रीय जेलों से भी इस मामले में आगे है. डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल ऐतिहासिक रूप से असम के उल्फा विद्रोह के केंद्र में थी. इसमें उल्फा के कई शीर्ष नेताओं को कैद किया गया था.
इससे पहले आज पंजाब पुलिस के महानिरीक्षक सुखचैन सिंह गिल ने कहा कि अमृतपाल सिंह को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत डिब्रूगढ़ ले जाया गया है.
खुफिया एजेंसियों का कहना है कि अमृतपाल सिंह जासूसी एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के जरिए पाकिस्तान से हथियार मंगवा रहा था और पंजाब को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की कोशिश कर रहा था. अमृतपाल सिंह कथित तौर पर युवाओं को “बंदूक संस्कृति” की ओर ले जा रहा था.
अमृतपाल और उनके सहयोगियों पर वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाने, हत्या के प्रयास, पुलिस कर्मियों पर हमले और लोक सेवकों द्वारा कर्तव्य के निर्वहन में बाधा उत्पन्न करने से संबंधित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं.
अलगाववादी आंदोलन से जुड़े गैंगस्टर होने की अधिक संभावना
सूत्रों ने कहा कि अमृतपाल सिंह और उनके सहयोगियों को देश के दूसरे छोर पर ले जाने का कारण यह है कि उत्तर भारतीय जेलों में उसके जुड़े या अलगाववादी आंदोलन से जुड़े गैंगस्टर होने की अधिक संभावना है.
सूत्रों ने कहा कि आरोपी को अन्य कैदियों और जेल कर्मचारियों के साथ जुड़ने से रोकने के लिए भाषा की बाधा एक और कारण है. डिब्रूगढ़ जेल एक बहुत ही सुरक्षित जेल है. इसके अलावा वहां स्थानीय सिख समुदाय खालिस्तान आंदोलन के प्रति सहानुभूति नहीं रखता है.
‘वारिस पंजाब दे’ (WPD) के चार सदस्यों को 19 मार्च को इस जेल में ले जाया गया था. इसके बाद से जेल परिसर के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. अब जेल में कथित तौर पर 24 घंटे की तीन स्तरीय सुरक्षा है.
तिहाड़ में पहले से ही मारामारी
पंजाब की जेलों में न सही तो फिर दिल्ली स्थित एशिया की सबसे सुरक्षित तिहाड़ जेल में क्या कमी है? रॉ पूर्व अधिकारी एन के सूद मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, “तिहाड़ में पहले से ही गदर मचा हुआ है. सुकेश चंद्रशेखर जैसे महाठग ने जिस तिहाड़ जेल के तमाम अफसर-कर्मचारी खरीद कर उनसे तिहाड़ की बजाए अपनी नौकरी शुरु करवा डाली हो. जिस सुकेश चंद्रशेखर से करोड़ों रुपए कथित रूप से ही सही.

