किसी व्यक्ति की कुंडली के पहले व 5वें भाव में सूर्य, मंगल और शनि हों तो पितृदोष बनाता है. या फिर कुंडली के अष्टम भाव में गुरु व राहु एक साथ बैठें हों तब भी पितृदोष का निर्माण होता है.
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Pitru Dosh 2025: किसी व्यक्ति की कुंडली के पहले व 5वें भाव में कौन सा ग्रह बैठा है? और उस पर पितृदोष लगा है कि नहीं. इस बात की जानकारी होती ही नहीं है. कुछ लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता तो है. लेकिन पता नहीं चलने के कारण उनका जीवन नर्क के समान हो जाता है. पितृ दोष के कारण वह व्यक्ति जीवन में कई प्रकार की कठिनाइयों से जूझता है. आखिरकार क्या आप जानते हैं कि कुंडली मे यह दोष कैसे बनता है? यदि नहीं जानते हैं तो आइए हम बता रहे हैं कैसे पितृ दोष बनता है और उसका निवारण कैसे किया जाता है?
कैसे बनता है पितृ दोष
- जब किसी व्यक्ति की कुंडली के लग्न भाव और पांचवें भाव में सूर्य मंगल और शनि विराजमान होते हैं तब पितृ दोष बनाते हैं. इसके अलावा कुंडली में 8वें भाव में गुरु और राहु यदि एक साथ मौजूद हों तो पितृ दोष का निर्माण करते हैं.
- कुंडली मे राहु केंद्र या त्रिकोण में रहता है तो इससे पितृ दोष बनता है. इसके अलावा सूर्य, चंद्रमा और लग्नेश का राहु से भी संबंध होता है.
कैसे दिखाता है असर
कुंडली में पितृ दोष होने से व्यक्ति को पारिवारिक जीवन का सुख नहीं मिलता, संतान सुख में बाधा आती है, धन और करियर में भी समस्याएं होती हैं.
कैये कों निवारण
- पितृ दोष निवारण के लिए पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध व तर्पण करें.
- गाय, कौवे, कुत्ते या गरीबों को भोजन कराएं.
- जिनकी कुंडली में पितृ दोष रहता है, उन्हें पीपल वृक्ष की पूजा करनी चाहिए.
- पितृ पक्ष में रोजाना सुबह दक्षिण दिशा (पितरों की दिशा) की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित करें.
- संध्याकाल में घर के दक्षिण दिशा में दीप जलाएं. इससे भी पितृ दोष का प्रभाव कम होता है.
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