9 ग्रहों के कमजोर होने का संकेत देती हैं ये गंभीर बीमारियां, नवग्रहों की शांति के लिए जानें ज्योतिष उपाय
Authored By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By : सुप्रिया
ज्योतिष शास्त्र में कुंडली में दशा खराब होने से व्यक्ति कई बीमारियों से जूझता रहता है. हर ग्रह से कोई न कोई बीमारी जुड़ी होती है, जो व्यक्ति को ग्रहों की दशा बिगड़ने के संकेत भी देती है. जैसे, कुंडली में ग्रहों के राजा सूर्य की दशा खराब होने पर व्यक्ति को आंख, कान और मस्तिष्क से जुड़ीं बीमारी हो जाती है.
ग्रहों को शांत करने के विशेष ज्योतिष उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नवग्रह का हमारे जीवन पर बहुत ही गहरा असर होता है. हमारा स्वभाव, सुख-दुख और जीवन में घटने वाली घटनाएं भी ग्रहों से जुड़ी होती हैं. आपने देखा होगा कि कई बार बहुत मेहनत करने के बाद भी लोगों को सफलता नहीं मिल पाती है. वहीं, कई लोग ऐसे होते हैं, जो इतने भाग्यशाली होते हैं, जो बहुत कम मेहनत में भी सफलता की सीढ़ियां चढ़ते जाते हैं.
ग्रहों का इससे भी सम्बध होता है. जैसे, कुंडली में ग्रहों की दशा खराब होने पर व्यक्ति न केवल समस्याओं से जूझता रहता है बल्कि गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं. आइए, जानते हैं कुंडली में किन ग्रहों के खराब होने से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है.
नौ ग्रहों से जुड़ीं बीमारियां
सूर्य ग्रह :-
कुंडली में सूर्य ग्रह के कुपित होने पर व्यक्ति को सिर व मस्तिष्क, हृदय, नेत्र, कान रोग और अस्थि भंग जैसी बीमारी हो सकती हैं. कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए रोजाना सूर्यदेव को जल अर्पित करना चाहिए. रविवार को सूर्य स्त्रोत पाठ करें.
चंद्र ग्रह :-
कुंडली में चंद्र ग्रह के कुप्रभाव के कारण मानसिक रोग, नींद न आना, नींद का बार-बार टूटना, जल से भय और उन्माद जैसे रोग हो सकते हैं. कुंडली में चंद्र को शांत रखने के लिए सोमवार को शिवजी की पूजा करनी चाहिए. साथ ही सोमवार को चावल, दूध, दही, मिश्री, चांदी, मोती आदि सफेद चीजें दान करनी चाहिए.
मंगल ग्रह :-
कुंडली में मंगल ग्रह के कुपित होने पर पित्त विकार, त्वचा रोग, टायफाइड और अपेंडिक्स जैसे रोग होने लगते हैं. मंगल को शांत रखने के लिए मंगलवार को व्रत रखें और हनुमान चालीसा का पाठ करें. साथ ही मंगलवार को मसूर की दाल किसी जरुरतमंद को दान करें.
बुध ग्रह :-
कुंडली में बुध ग्रह के कुपित होने के कारण वात, पित्त और कफ से संबंधित रोग, नाक और गले के रोग होने के साथ बुद्धि की कमी होने लगती है. बुध को शांत रखने के लिए बुधवार को गणेश जी की पूजा करें. साथ ही बुधवार के दिन गायों को हरी घास खिलाएं.
गुरु ग्रह :-
कुंडली में गुरु ग्रह के कुपित होने से गठिया, कमर व जोड़ों में दर्द, शरीर में सूजन, कब्ज आदि रोग होते हैं. गुरु को शांत रखने के लिए गुरुवार को व्रत रखें. साथ ही भगवान विष्णु की पूजा करें। गुरुवार के दिन पीले रंग के फल, चना, गुड़ और चने की दाल दान करें.
शुक्र ग्रह :-
कुंडली में शुक्र ग्रह कुपित होने पर व्यक्ति को वात और कफ रोग होने के साथ-साथ शरीर के अंदरूनी हिस्सों में रोग होते रहते हैं. शुक्र को शांत रखने के लिए शुक्रवार को दही, खीर, ज्वार, इत्र, रंग-बिरंगे कपड़े, चांदी, चावल आदि दान करें.
शनि ग्रह :-
कुंडली में शनि ग्रह के कुपित होने से वात एवं कफ रोग, कैंसर, सांस के रोग आदि गंभीर रोग होते हैं. शनि को शांत रखने के लिए शनिवार को शनि मंदिर जाकर उन्हें सरसों का तेल अर्पित करें. साथ ही शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें.
राहु ग्रह :-
कुंडली में राहु ग्रह के कुपित होने पर व्यक्ति को संक्रामक रोग, हृदय रोग, विष जनित रोग व हाथ और पैरों में दर्द जैसी बीमारियां होती है. राहु को शांत रखने के लिए राहु के बीज मंत्र ‘ॐ रां राहवे नमः’ या वैदिक मंत्र का जाप करें.
केतु ग्रह :-
कुंडली में केतु के ग्रह कुपित होने से व्यक्ति को त्वचा रोग, पाचन संबंधी रोग होते हैं. कुंडली में केतु को शांत रखने के लिए कुत्तों को रोटी खिलाएं. साथ ही भैरवजी की पूजा करें और केले के पत्ते पर चावल का भोग लगाएं.

