मध्य प्रदेश जबलपुर नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज गोरखपुर में साकेतवासी जगद्गुरु श्रीरामरंगी द्वाराचार्य डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज की पुण्य तिथि मनाई गई.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Memorial Of Saints News: मध्य प्रदेश जबलपुर नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज गोरखपुर में साकेतवासी जगद्गुरु श्रीरामरंगी द्वाराचार्य डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज की पांचवी पुण्य तिथि आज 17 अप्रैल 2026 को मनाई गई. इस अवसर पर संतों-महंतों के उद्बोधन भी हुए और साकेतवासी जगद्गुरु को याद करते हुए कई लोगों में संस्मरण भी सुनाए. अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री दण्डी स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने उद्बोधन में शिष्य के प्रति गुरु की कृपा वर्णन करते हुए कहा कि परंपरा क्या होती है, जो ऊपर की ओर जाती है और जो अधोगति (जो नीचे की ओर) को जाती है, वह अंधविश्वास होता है. कई लोग गुरु को तो मानेंगे, लेकिन गुरु की नहीं मानेंगे, जो गुरु को मानने के साथ-साथ गुरु की भी मानते हैं, यह गुरु के प्रति सच्ची विनम्र श्रद्धांजलि होती है. उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी व्यक्ति को गुरु के आचरण जानना है तो उसके शिष्य के आचरण जानो, शिष्य के आचरण से गुरु की वास्तविकता का पता चल जाएगा. दण्डी स्वामी ने सभागार को संबोधित करते हुए आगे कहा कि गुरु अपनी कृपा का प्रसाद शिष्य को देता है. यदि गुरु ने 80 प्रतिशत दिया है तो बचा हुआ 20 प्रतिशत अन्य संतों के आशिर्वाद से प्राप्त कर लेना चाहिए, जिससे व्यक्ति पूर्ण हो जाता है. यही सबसे बड़ी गुरु की कृपा है.
गुरु का दिया हुआ प्रसाद बांटने या बिखेरने से बढ़ता है- नृसिंहदेवाचार्य
नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज गोरखपुर आयोजित पुण्य तिथि के अवसर वर्तमान श्रीनृसिंहपीठाधीश्वर जगद्गुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु का दिया हुआ प्रसाद मैं हर जगह बांटता व बिखेरता जा रहा हूं. किसी ने सही कहा है कि गुरु अपने शिष्य की परीक्षा लेने के लिए एक मुठ्ठी राई देकर उसे चार मुठ्ठी करने का आदेश देता है, जो शिष्य उस एक मुठ्ठी राई को चार मुठ्ठी करके लाता है, वही शिष्य योग्य होता है. पूज्य गुरुदेव भगवान जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज ने हमेशा यही कहा कि व्यक्ति अपने मन को ठीक रखे तो सबकुछ ठीक हो जाएगा. व्यक्ति को मित्र बनाना चाहिए, दुश्मन नहीं बनाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि व्यक्ति का अभिनंदन स्वाभिमान से होता है, अभिमान से नहीं होता है.
जगद्गुरु हर व्यक्ति के करीब थे-हनुमानदास
साकेतवासी जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज का स्मरण करते हुए स्वामी हनुमानदास जी महाराज ने कहा कि संत की सहजता, सरलता यदि कहीं देखने को मिलती थी तो वह जगद्गुरु द्वाराचार्य श्यामदेवाचार्य जी महाराज में देखने मिलती थी. वे हर व्यक्ति के करीब थे. जो भी मिलता था, वह यह नहीं कहता था कि मुझे गुरुदेव भगवान नहीं मानते हैं. जो भी उनसे मिलता था वह यही कहता था कि मुझे गुरुजी ज्यादा मानते हैं.
पादुका पूजन, श्रद्धांजलि सभा के साथ हुआ भंडारे का आयोजन
पांचवें पुण्य स्मरण के अवसर पर पूज्य गुरु साकेतवासी रामरंगी द्वाराचार्य स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज के विग्रह स्वरूप के समक्ष पादुका पूजन व वेद पाठ से अर्चन किया गया. इसके बाद श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें संतों और वरिष्ठ नागरिकों के साथ शिष्य मंडल द्वारा अपने अनुभव साझा किए. हनुमान दास जी महाराज, केशवदास जी, बालक दास जी, रामदास जी महाराज, मैत्रेयी दीदी बाबरा आश्रम, शरद काबरा, डॉ. दीपक बहरानी, सतीश मिश्रा सहित कई शिष्यों ने अपने संस्मरण सुनाए.
इनकी रही उपस्थिति
पूज्य महामंडलेश्वर पुरुषोत्तम दास जी, स्वामी हनुमान दास जी, महंत बालक दास जी, स्वामी पुष्करनंद जी, स्वामी दादा पागलानंद जी, स्वामी रामजीशरण जी, स्वामी चौकी वाले बाबा जी, स्वामी कालिकानन्द जी, स्वामी कृष्णानंद जी, स्वामी शिवानंद जी, मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह, पंकज दुबे, पंडित रोहित दुबे, पंडित दीपनारायण शास्त्री, पंडित रामफल शुक्ल, कामता प्रसाद तिवारी, गुलशन माखीजा सहित संस्कारधानी जबालीपुरम् के सभी धर्माचार्य संत-महात्मा और सभी वरिष्ठ नागरिक व नरसिंह मंदिर-गीताधाम भक्तमंडल की पावन उपस्थती रही. इस अवसर पर प्रसाद भंडारा के आयोजन भी किया गया.
पुष्पांजलि अर्पित कर शिष्यों ने लिया आशिर्वाद
जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य जी महाराज के विग्रह के समक्ष पुण्य तिथि पर आए शिष्यों और भक्तों ने भावांजलि अर्पित की. पुष्पांजलि देकर गुरुदेव भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट की और उन्हें प्रणाम कर आशिर्वाद ग्रहण किया. तत्पश्चास भण्डारे का प्रसाद ग्रहण किया.

