प्राचीन वशिष्ठ गुफा भी शांति और ध्यान के लिए एक अच्छा केंद्र है. ऋषिकेश आने वाले सभी पर्यटक यहां ध्यान और शांति के लिए पहुंचते हैं.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
How to stay focused during meditation: गुफा जैसी जगह आधुनिक शिक्षा प्राप्त, नाजुक शरीर वाले और डरपोक साधकों के लिए उपयुक्त नहीं है. यह उन साधकों के लिए है जिनका शरीर मजबूत, निर्भीक और सहनशक्ति से परिपूर्ण हो. जिन लोगों को कुछ दिव्य सिद्धियाँ प्राप्त हों, वे वहाँ रह सकते हैं. जिन लोगों को बूटी या हिमालयी जड़ी-बूटियों का अच्छा ज्ञान हो, जिन्होंने विशेष कायाकल्प द्वारा शरीर को बलवान बनाया हो, जिन्होंने निमि कल्प या शुद्ध नक्स वोमिका का सेवन करके विषैले कीड़ों या जीवों के काटने से अपने शरीर को सुरक्षित रखा हो, जिन्होंने मंत्र सिद्धि प्राप्त की हो, जो जंगली जानवरों पर नियंत्रण रखते हों, जो गर्मी और सर्दी, भूख और प्यास सहन कर सकते हों, जिन्होंने संसार, इंद्रिय-विषयों और किसी भी प्रकार के काम के प्रति आकर्षण खो दिया हो, जो लंबे समय तक ध्यान कर सकते हों, जिनमें आंतरिक वैराग्य हो, वे गुफा में रह सकते हैं. ऋषिकेश के पावन भूमि पर बनी वशिष्ठ गुफा इस समय लोगों के आकर्षण का केन्द्र बन चुकी है. यहां आने वाले श्रद्धालु इस गुफा के अंदर बैठकर ध्यान लगा रहे हैं, जिससे उनका मन एकदम शांत हो जाता है. बताया जा रहा है यह जगह ऋषिकेश के शोरगुल से दूर एकदम शांत है और हर किसी को एक बार यहां जरूर आना चाहिए.
विदेश में भी विख्यात है गुफा
उत्तराखंड में स्थित ऋषिकेश एक पावन तीर्थ स्थल है. ये जगह अपने योग और ध्यान के चलते देश-विदेश में मशहूर है. मान्यता है कि यहां कई सारे ऋषि-मुनियों ने घोर तपस्या की है. वहीं ऋषिकेश से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राचीन वशिष्ठ गुफा भी शांति और ध्यान के लिए एक अच्छा केंद्र है. ऋषिकेश आने वाले सभी पर्यटक यहां ध्यान और शांति के लिए पहुंचते हैं. इस गुफा को महान ऋषि वशिष्ठ के नाम से जाना जाता है. वहीं स्वामी पुरुषोत्तमानंद ने भी यहां घोर तपस्या की है.
ऋषि वशिष्ठ ने की थी तपस्या
ये गुफा ऋषिकेश से 25 किलोमीटर की दूरी पर एकदम एकांत में स्थित एक प्राचीन गुफा है. यहां के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस गुफा का संबंध ऋषि वशिष्ठ से है. भगवान राम के गुरु ऋषि वशिष्ठ ने यहां तपस्या की थी. उन्हीं के नाम से इस गुफा को जाना जाता है. 1930 में स्वामी पुरुषोत्तमानंद ने इस आश्रम और साथ ही इस गुफाकी देखरेख का निर्णय लिया, इसीलिए इसका प्रबंधन स्वामी पुरुषोत्तमानंद सोसायटी द्वारा किया जाता है. यह पवित्र स्थान अब वशिष्ठ योग आश्रम बन गया है, जहां सभी ऋषिकेश की भीड़ और शोर से दूर ध्यान और शांति के लिए पहुंचते हैं.
ऋषिकेश की भीड़ भाड़ से दूर स्थित है ये गुफा
गुफा पावन मां गंगा के तट पर स्थित एक एकांत स्थान है. यह गुफा पर्यटकों के लिए सुबह 8 बजे से लेकर दोपहर में एक बजे तक और उसके बाद दोपहर में तीन बजे से लेकर शाम 6 बजे तक खुली रहती है. गुफा के भीतर पर्यटक ध्यान के लिए बैठते हैं, इसलिए यहां शोरगुल करना और फोटो खींचना मना है. इस गुफा के पास ही में महर्षि वशिष्ठ की पत्नी अरुंधति के नाम से एक गुफा है, जिसे सभी अरुंधति गुफा कहते हैं और वह भी काफी प्रसिद्ध है.
सांसों पर ध्यान केंद्रित करें
ध्यान लगाते वक्त अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें. आप शांति से बैठें और धीरे-धीरे गहरी सांस लें और छोड़ें. अपनी सांसों की गति और धारा को अंदर फील करने का प्रयास करें. धीरे-धीरे आप पाएंगे कि मन कम भटक रहा है और एक बिंदु पर केंद्रित हो रहा है. अगर आप भीड़ वाली या शोर वाली जगह पर मेडिटेशन करेंगे तो मन चंचल होगा. बेहतर होगा कि आप शांत और आरामदायक स्थान चुनें जहां आप बिना किसी व्यवधान के बैठ सकें. किसी हवादार, शांत या पेड़-पौधे वाली जगह पर ध्यान लगाएं.
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