Noel Tata बने टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन, रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल, नए अध्यक्ष के रूप में, उनसे रतन टाटा द्वारा स्थापित दृष्टिकोण और मूल्यों को बनाए रखने की उम्मीद है.
Source : DB News Update
DB news updates/edited By- prince awasthi
नई दिल्ली.
Tata Trusts Chairman : टाटा ट्रस्ट्स को नया चेयरमैन मिल गया है. सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट्स ने रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा को चेयरमैन नियुक्त किया है. नोएल 40 से अधिक वर्षों से टाटा समूह से जुड़े हुए हैं. वह वर्तमान में टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के बोर्ड में शामिल हैं. रतन टाटा को 1991 में जब टाटा समूह की जिम्मेदारी सौंपी गई तभी से वे टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन पद पर विराजमान थे. लेकिन अब ये कमान टाटा ट्रस्ट्स ने सर्वसम्मति के साथ नोएल टाटा को सौंप दी है.
पहले से हैं टाटा ट्रस्ट के साथ जुड़े हुए
नोएल टाटा की टाटा ट्रस्ट के कामकाज में बेहद एक्टिव भूमिका रही है. मौजूदा समय में वे सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trusts) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (Sir Dorabji Tata Trust) के ट्रस्टी हैं जो टाटा ट्रस्ट के अंदर ही आता है. ये ट्रस्ट टाटा समूह की परोपकार से जुड़ी गतिविधियों को तो मैनेज करती ही है साथ ही टाटा संस जो टाटा ग्रुप की पैरेंट कंपनी है उसमें भी टाटा ट्रस्ट की 66 फीसदी की हिस्सेदारी है.
रतन टाटा का 9 अक्टूबर की शाम को निधन हो गया था
रतन टाटा का 9 अक्टूबर की शाम को निधन हो गया था. वह अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए जिसने टाटा समूह के परिदृश्य को गहराई से आकार दिया.
नवल टाटा और सिमोन टाटा के बेटे नोएल टाटा, अब टाटा समूह और उससे जुड़े ट्रस्टों के भीतर बड़े बदलाव के समय में इस महत्वपूर्ण भूमिका में कदम रख रहे हैं. नए अध्यक्ष के रूप में, उनसे रतन टाटा द्वारा स्थापित दृष्टिकोण और मूल्यों को बनाए रखने की उम्मीद है, जिन्हें व्यापक रूप से भारतीय उद्योग का दिग्गज और टाटा समूह के लिए एक परिवर्तनकारी व्यक्ति माना जाता था. यह परिवर्तन टाटा ट्रस्ट के लिए एक नए अध्याय का भी प्रतीक है, जो पूरे भारत में कई सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रमों के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
विभिन्न व्यवसायों में विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभा रहे हैं
नोएल टाटा कई वर्षों से टाटा समूह के साथ जुड़े हुए हैं और विभिन्न व्यवसायों में विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभा रहे हैं. उनकी नियुक्ति तब हुई है, जब ट्रस्ट का उद्देश्य सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक व्यावसायिक प्रथाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बरकरार रखते हुए तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य की चुनौतियों का सामना करना है.
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि नोएल टाटा के नेतृत्व में, टाटा ट्रस्ट शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामुदायिक विकास सहित परोपकारी पहलों पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगा जैसा की उनके स्वर्गीय भाई रतन टाटा ने किया था, जिनकी याद में लोगों की आंखे नम हैं.
करीब 24 साल से जुड़े हैं टाटा से
2000 के दशक की शुरुआत में टाटा समूह में शामिल होने के बाद से नोएल टाटा ग्रुप में एक प्रमुख व्यक्ति रहे हैं. सर रतन टाटा ट्रस्ट और दोराबजी टाटा ट्रस्ट की बैठक के बाद आज उन्हें टाटा ट्रस्ट का अध्यक्ष नियुक्त किया गय है. टाटा ट्रस्ट एक अम्ब्रेला बॉडी है जो सभी 14 टाटा ट्रस्टों के कार्यों का प्रबंधन करता है. ऐसे होनहार व्यक्तित्व को जिम्मेदारी सौंपकर देश के सबसे बड़े उद्योग को उंचाई मिलना निश्चित है. देश की उद्योग व्यवस्था परंपराओं में ही टिकी हुई है.
नोएल टाटा के पास टाटा संस के 4058 शेयर
मीडिया के माध्यम से पता चला है कि नोएल टाटा एकमात्र बोर्ड सदस्य हैं जिनके पास कंपनी में शेयर हैं, उनके पास टाटा संस के 4,058 शेयर हैं. टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली टाटा ट्रस्ट्स ने पहले भी अपनी स्थिति दोहराई थी कि कंपनी को निजी स्वामित्व में ही रहना चाहिए. हालाँकि भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, उच्च-स्तरीय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध करना अनिवार्य है, फिर भी यह टाटा संस की लिस्टिंग के खिलाफ है.

