28 अक्टूबर 1948 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ओर से इस शहीद स्मारक का शिलान्यास करवाया गया था, जिसका निर्माण कार्य डॉक्टर सेठ गोविंद दास द्वारा संपन्न कराया गया था
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP Jabalpur News: मध्य प्रदेश जबलपुर के दिल में आज भी अदम्य साहस का परिचायक भवन देश भक्ति की याद दिला रहा है. इस भवन के चारों ओर निकली ह्रदय की धमनियाें सरीखी 9 सड़कें शहर की उस गंतव्य की ओर ले जाती हैं, जहां से आम आदमी की जरूरतें पूरी हो रही हैं. कहने को तो यह भवन शहीदों की याद में बनाया गया था. लेकिन यह भवन आज भी राजशाही व्यवस्था और लोक तांत्रिक व्यवस्था दोनों का परिचायक है. यहां आज भी समूह में लोग एकत्रित हो रहे हैं. वह चाहे कोई सार्वजनिक कार्यक्रम के उद्देश्य से एकत्रित हों या फिर शहीद स्मारक के ग्राउंड में आयोजित मेलों के अवसर पर एकत्रित हो रहे हों. अभी हाल में शहीद स्मारक में कई रंग देखने को मिल रहे हैं. एक ओर पुस्तक मेला लगा हुआ है. एक ओर बच्चों को क्रिकेट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यहीं पर पौधे लगाने के महत्व को दर्शादी नर्सरी लगाई गई है. कॉफी हाउस से लेकर जनसंपर्क संचलानय उप संचालक कार्यालय से लेकर रंगमंच आए दिन आबाद रहता है. यहां की खूबसूरती बनाने में स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है.
शहीदों की याद में बनी है धरोहर
जबलपुर. भारत की आजादी की लड़ाई में अमर शहीदों की याद में पूरे देश में कई धरोहर बनवाई गई हैं, जिन्हें शाहिद स्मारक नाम दिया गया है. उनमें से एक शहीद स्मारक का निर्माण जबलपुर की गोल बाजार में करवाया गया था.28 अक्टूबर 1948 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ओर से इस शहीद स्मारक का शिलान्यास करवाया गया था, जिसका निर्माण कार्य डॉक्टर सेठ गोविंद दास द्वारा संपन्न कराया गया था, जो 8 वर्ष में बनकर तैयार हो गया था. इसके बाद 1956 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा इसका उद्घाटन करवाया गया था.
शहीदों की याद दिलाता है यह स्थान
कहते हैं स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान अंग्रेजों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के दौरान महात्मा गांधी भी यहां पर आकर रुके थे.कई महत्वपूर्ण सभाओं का साक्षी रहा है यह ऑडिटोरियम हॉलइस ऑडिटोरियम हाल को शहीदों की याद में सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए बनवाया गया था. यहां पर लगभग 550 सीट हैं और प्रदेश का पहला रिवॉल्विंग स्टेज भी यहां पर बनवाया गया था. 1957 से लेकर आज तक यह ऑडिटोरियम हॉल कई ऐतिहासिक सभाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों का साक्षी रहा है, जिनमें से देश के कई महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर भी यहां पर सभाएं लगाई गई हैं, और देश के कई महत्वपूर्ण लोगों ने भी अपनी सभाएं इस हाल में ली है.
आचार्य ओशो ने भी सभा की
जिनमें से विश्व प्रसिद्ध महर्षि महेश योगी ने भी अपनी सभाएं यहां पर ली थी इसके अलावा विश्व प्रसिद्ध आचार्य रजनीश ओशो ने भी अपनी कई सभाएं इस ऑडिटोरियम हॉल में ली थी.देश में अलग-अलग जगह बनवाया गया यह शहीद स्मारक आज भी उन शहीदों की याद दिलाता है, जिन्होंने आजादी की उस लड़ाई में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हुए अपनी जान गवा दी थी और एक शहीद के रूप में उनका नाम आज भी हमारे दिलों में अमर है, जिनके कारण आज हम और हमारा देश अंग्रेजों के उसे शासन से मुक्त है जिन्होंने हमारे देश पर करीब 89 साल तक राज किया. ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों की अगर आज भी आपको याद आए तो आप पहुंच सकते हैं जबलपुर के गोल बाजार स्थित शहीद स्मारक में. यहां कई तस्वीरें और झांकियां हैं जो विश्व प्रसिद्ध कलाकार शांतिनिकेतन के नंदलाल जी बसु द्वारा बनाई गई हैं.
खूबसूरती पर दाग लगा रहे अतिक्रमणकारी
शहीद स्मारक के चारों तरफ की सड़क को आधुनिक तरीके से डेवलप किया गया है. यहां पर पेड़-पौधे लगाने से लेकर क्षेत्रीय लोगों को पैदल चलने के लिए पाथवे का निर्माण और बुजुर्गों के लिए बैठक कुर्सी का इंतजाम किया गया है. लेकिन फुटपाथ पर अतिक्रमणकारियों ने सालों से किराए पर शहीद स्मारक को चला रहे हैं. जिससे आम आदमी को आमदनी हो सके. लेकिन यहां की अधुनिकला सभी को सम्मोहित करके साथ अतिक्रमण मुक्त करने की जरूरत महसूस कर रहे हैं@

