क्यों केतकी के फूल भगवान शिव की पूजा में वर्जित? क्या है पौराणिक कथा यह सब जानने के लिए पढ़ें- घर में शिवलिंग स्थापित करके पूजा कर सकते हैं. घर में शिवलिंग स्थापना के लिए महाशिवरात्रि बहुत शुभ दिन है.
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By : DB NEWS Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि के दिन शिव मंदिर में पूजा करने का फल और अपने घर में भगवान भोले की स्थापना करने का शुभ मुहूर्त होता है. जो लोग शिव मंदिर में पूजा नहीं कर पाते हैं, वे घर में शिवलिंग स्थापित करके पूजा कर सकते हैं. घर में शिवलिंग स्थापना के लिए महाशिवरात्रि बहुत शुभ दिन है. अगर घर में शिवलिंग स्थापित करना चाहते हैं तो शिवलिंग का आकार ज्यादा बड़ा नहीं होना चाहिए. बड़े शिवलिंग मंदिरों के लिए ही शुभ होते हैं. घर के लिए तो छोटा सा शिवलिंग शुभ रहता है.
इस धातु का शिवलिंग न रखें
शिव पुराण में बताया गया है कि घर में हाथ के अंगूठे के पहले भाग से बड़ा शिवलिंग नहीं रखना चाहिए. शिवलिंग के साथ ही गणेश जी, देवी पार्वती, कार्तिकेय स्वामी और नंदी की छोटी सी प्रतिमा भी रखनी चाहिए. शिवलिंग सोना, चांदी, पीतल का या मिट्टी-पत्थर का शुभ रहता है.
एल्युमीनियम, स्टील या लोहे के शिवलिंग की पूजा करने से बचना चाहिए. पूजा-पाठ के लिए ये धातु शुभ नहीं मानी जाती हैं. इन धातुओं के अलावा स्फटिक और पारद के शिवलिंग भी घर में स्थापित कर सकते हैं. शिव परिवार की पूजा एक साथ करने से पूजा का फल जल्दी मिल सकता है.
क्या है पौराणिक कथा?
शिवपुराण के मुताबिक एक बार ब्रह्मा-विष्णु के बीच विवाद हो गया. झगड़े की वजह ये थी कि दोनों ही देवता खुद को श्रेष्ठ बता रहे थे. जब दोनों देवता दिव्यास्त्रों से युद्ध शुरू करने वाले थे, ठीक उसी समय भगवान शिव लिंग रूप में इनके सामने प्रकट हो गए.शिव जी ने कहा कि आप दोनों में से जो भी इस लिंग का छोर (अंत) खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा. ये बात सुनकर एक छोर की ओर ब्रह्मा जी और दूसरे छोर की ओर विष्णु जी चल दिए. बहुत समय तक ब्रह्मा-विष्णु अपने-अपने छोर की ओर आगे बढ़ते रहे, लेकिन उन्हें लिंग का अंत नहीं मिला. उस समय ब्रह्मा जी खुद को श्रेष्ठ घोषित करने के लिए एक योजना बनाई.
ब्रह्मा ने एक केतकी का पौधा लिया और उससे झूठ बोलने के लिए कहा कि वह शिव-विष्णु के सामने बोले कि ब्रह्मा जी ने लिंग का अंत खोज लिया है. ब्रह्मा केतकी के पौधे को लेकर शिव जी के पास पहुंचे, विष्णु जी भी वहां आ गए और उन्होंने कहा कि मैं इस लिंग का अंत नहीं खोज सका. ब्रह्मा ने कहा कि मैंने इस लिंग का अंत खोज लिया है, ये बात आप केतकी के पौधे से भी पूछ सकते हैं. केतकी ने भी भगवान के सामने झूठ बोल दिया.
ब्रह्मा जी का झूठ सुनते ही शिव जी क्रोधित हो गए. उन्होंने कहा कि आपने झूठ कहा है, इसलिए आज से आपकी कहीं भी पूजा नहीं होगी और केतकी ने आपके झूठ में साथ दिया, इसलिए इसके फूल मेरी पूजा में वर्जित रहेंगे. इसके बाद विष्णु जी सर्वश्रेष्ठ घोषित हो गए. ये घटना फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की ही मानी जाती है, इसलिए इस तिथि पर महाशिवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा है.
सत-चित-आनंद स्वरूप भी है शिवलिंग
महाशिवरात्रि के साथ जुड़े हुए आध्यात्मिक महत्व को समझने का ये सबसे अच्छा अवसर है. शिव-लिंग परमात्मा शिव के ज्योति रूप को दर्शाता है. परमात्मा का कोई मनुष्य रूप नहीं है और ना ही उसके पास कोई शारीरिक आकार है. भगवान शिव एक सूक्ष्म, पवित्र व स्वदीप्तिमान दिव्य ज्योति पुंज हैं. इस ज्योति को एक अंडाकार रूप से दर्शाया गया है. इसीलिए उन्हें ज्योर्तिलिंग के रूप में दिखाया गया है, अर्थात “ज्योति का प्रतीक”. वो सत्य है, कल्याणकारी हैं और सबसे सुंदर आत्मा है, तभी उन्हें सत्यम-शिवम्-सुंदरम कहा जाता है. वो सत-चित-आनंद स्वरूप भी है.
पवित्र महाशिवरात्रि का यही दिव्य सन्देश है. हम परमपिता परमात्मा शिव को प्रेम से याद करके, अपने सभी पापो से मुक्त हो सकते हैं. शिवरात्रि पर्व में सारी रात जागने का यही महत्व है की वर्तमान में जब सारा संसार अज्ञान की घोर रात्रि में सुषुप्त है, तब हम हमारे कर्मो के प्रति पूर्णतः जाग्रत हो जाएं..
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