Narayanpur Naxal Encounter: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस और जवानों के जरिये लगातार माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया जा रहा है
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस
Source : DB News Update
Narayanpur News : छत्तीसगढ़ में जवानों के जरिये लगातार चलाये जा रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन से माओवादी के आतंक का दायरा सिमट रहा है. विगत दिनों 29 अगस्त को नारायणपुर और कांकेर बॉर्डर पर नक्सली और पुलिस में सुबह से मुठभेड़ हुई, जिसमें 3 नक्सलियों के मारे जाने की खबर है.
इस मुठभेड़ की नारायणपुर एसपी प्रभात कुमार ने पुष्टि की है. पुलिस के जरिये नारायणपुर में के अबूझमाड़ में बड़े पैमाने पर नक्सिलयों के खिलाफ ऑपरेशन चला रही है. मुठभेड़ में 3 नक्सलियों के मारे जाने की खबर है.
नक्सलबाद को खत्म करने की तैयारी
सरकार अब नक्सलबाद को लेकर कड़ा ऐक्शन लेने की तैयारी है. इसके लिए सर्चिंग के साथ नक्सल समस्या को जड़ से खत्म किया जाएगा. केन्द्र सरकार ने इसके संकेत दे दिए हैं. सरकार के इस निर्णय से नक्सलियों के बीच दहशत का माहौल निश्चित निर्मित होगा. क्योंकि प्रदेश सरकार के साथ मिलकर नक्सल प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया जाएगा और उन्हें खत्म करने के प्रयास किए जाएंगे.
2026 में शुरु हुआ नक्सल प्रभावित क्षेत्र का दौरा
सरकार की मंशा के अनुसार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस का सर्च ऑपरेशन शुरु हो गया है. इसके मुताबिक, कोंडागांव मुख्यालय 29वीं वाहिनी आईटीबीपी बटालियन की “E” कंपनी थाना क्षेत्र धनोरा से विशेष सर्च अभियान पर रवाना हुई थी. इस अभियान की निगरानी कमांडेंट दुष्यंत राज जायसवाल और नेतृत्व सेकेंड इन कमांड दीपक सेमल्टी द्वारा किया गया. टीम में कुल 58 जवान शामिल थे, जिनमें 2 गजटेड ऑफिसर, 8 सब-ऑफिसर, 47 अन्य जवान, 1 छत्तीसगढ़ पुलिस का जवान शामिल था. इसके अलावा इंटेलिजेंस टीम, स्मॉल एक्शन टीम, BDDS (बम निष्क्रिय दस्ता) भी अभियान में साथ गया था.
अबूझमाड़ के ओरछा तक पहुंची फोर्स
मीडिया रिपोर्ट से पता चला है कि सर्च ऑपरेशन का इलाका ओरछा से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित गोमाकाल खोड़पार और आसपास के जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में था. यह इलाका नक्सल गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता है, इसलिए सुरक्षा बल लगातार इलाके में लगातार गश्त बढ़ा रहे हैं. फोर्स 2 बजे धनोरा से रवाना हुई और तय ऑपरेशन पूरा कर सुरक्षित वापस कंपनी मुख्यालय पहुंच गई. इस कार्रवाई के बाद से क्षेत्र में नक्सलवादियों का खौफ कम हो सकता है और लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस करेंगे.
आईटीबीपी टीम को मिली बड़ी सफलता
बताया जा रहा है कि सर्च अभियान में आईटीबीपी 29 वीं वाहिनी की टीम को अबूझमाड़ के जंगलों में नक्सलियों द्वारा छुपा कर रखे गए हथियार एवं विस्फोटक सामग्रियों की खेप बरामद की. नक्सलियों ने यह सामान जंगल पहाड़ों में पत्थरों के गुफानुमा स्थान पर छिपा कर रखा था. बरामद हथियारों मेंं थ्री नॉट थ्री बंदूक , भरमार , रॉकेट लांचर, बड़ी संख्या में कटर, विस्फोटक सामग्री, बीजीएल सेल, यूबीजीएल सेल और तार के बंडल बरामद किये गए. इसके साथ ही मैगजीन, कारतूस भी मौके पर मिले जिसे सुरक्षाबलों ने अपने कब्जे में ले लिया. क्षेत्र में सर्च अभियान तेज कर दिया गया है.
ऑपरेशन का उद्देश्य
मीडिया को सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नक्सलियों के संभावित ठिकानों की तलाश, विस्फोटक सामग्री की जांच, ग्रामीणों से संवाद, इलाके में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाना है. अबूझमाड़ क्षेत्र में हाल के महीनों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, ताकि 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त बस्तर के लक्ष्य को हासिल किया जा सके.
सरेंडर करने का सिलसिला भी जल्द शुरू होगा
जैसा कि सरकार की मंशा है कि नक्सलबाद काे जड़ से खत्म करना है. इसके लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के बाद ही संभव हो पाएगा. सरकार की मंशा है कि नक्सलियों का सरेंडर कराया जाए और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास की गंगा बहाई जाए. इसी उद्देश्य को लेकर सर्च ऑपरेशन और नक्सलियों का सरेंडर किए जाने की चर्चा चारों ओर हो रही है. अब देखना यह है कि नक्सलियों का सरेंडर कब तक होता है? और कितने नक्सली घुटने टेकते हैं? क्योंकि सरकार ने अब ठान लिया है कि छत्तीसगढ़ में बढ़ रहे नक्सलियों को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए और उन्हें एक नई जिंदगी जीने के लिए आजाद किया जाए. जिससे उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि सामाजिक जीवन यापन कर सके.

