मन्नत के अनुसार 11 दिन अलग-अलग श्रंगार और लगाया जाता है भोग, अर्चन करने से ईच्छाओं की होती है पूर्ति
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Arji Wale Ganesh in Jabalpur News: प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का मध्य प्रदेश जबलपुर नर्मदा तट पर एक ऐसा मंदिर है, जहां दीन दु:खी और विभिन्न प्रकार की बाधाओं से ग्रसित भक्त पहुंच रहे हैं. गणेश चतुर्थी से अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए अर्जी लगा रहे हैं. भक्तों का दृढ़ विश्वास इतना अटल है कि श्रीगणेश जी के दरवार में अर्जी लिखने वालों की संख्या बढ़ती जा रही जा रही है. श्री गणेश जी को अर्पित अर्जी भक्तों की मनोकामना भी पूर्ण होने का दावा किया जा रहा है. इस अलौकिक मंदिर में अनंत चतुर्थी तक इसी प्रकार से भक्तों का तांता लगे रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है.
हर दिन अनुष्ठान और पूजन का विधान
सभी देवताओं में प्रथम गणपति बप्पा इस साल 27 अगस्त 2025 को पधारे हैं. तभी से इस मंदिर में अनुष्ठान, पूजन और अर्चन प्रारंभ हो गया है. गणेश जी का अथर्व शीर्ष का सहस्त्राधिक पाठ और वैदिक विद्वानों के द्वारा सहस्त्रार्चन किया जा रहा है. मंदिर प्रबंधन द्वारा बताया जा रहा है कि अर्थव वेद में उल्लेख मिलता है कि जो व्यक्ति वैदिक मंत्रों के द्वारा सहस्त्रार्चन करता है. श्रीगणेश भगवान उस व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं.
गणेश जी के स्वरूप के अनुसार श्रंगार और अर्चन का विधान
श्रीगणेश जी के प्रथम दिन का स्वरूप सुमुख है, जिनका श्रंगार सफेद श्वेत वस्त्र से किया गया और मोदक लड्डुओं से भोग लगाया गया. इसके बाद एकदंत का पीला वस्त्र और फलों का भोग लगा. कपिल स्वरूप का क्रीम रंग के वस्त्र और लाजा बताशा का भोग लगा. गजकर्ण का लाल वस्त्र और मेवे का, लंबोदर का भगवा वस्त्र और खीर का, विकट का नीला वस्त्र और सुगंधित द्रव्य एवं गुड़ के लड्डू, विनायक का नामांकित वस्त्र और पुष्प एवं खोवा लड्डू का, धूमकेतु का आसमानी वस्त्र और औषधि व मोदक, गणाध्यक्ष का गुलाबी वस्त्र और मिष्ठान और भालचंद्र एवं गजानन का अनेक रंग के वस्त्र और हवन एवं छप्पन भोग का भोग लगाया जाएगा.
6 सितंबर को बप्पा लेंगे विदाई
शनिवार 6 सितंबर 2025, अनंत चतुर्दशी के मौके पर बप्पा अपने भक्तों से विदाई लेंगे. ज्यादातर लोग गणेश विसर्जन के महत्वपूर्ण नियमों को भूल जाते हैं, आप भी उनमें से एक न बनें, इसलिए आज हम आपको गणेश विसर्जन से जुड़े कुछ खास नियमों के बारे में बताएंगे.
गणेश विसर्जन 2025 नियम
मुख दिशा
गणपति जी को विसर्जन के लिए ले जाते समय उनका मुख घर की ओर रखें, ताकि जाने से पहले बप्पा घर को आशीर्वाद दे सकें.
आरती सामग्री
बप्पा की विदाई के वक्त उनकी पूजा अर्चना और आरती की जाती है. इसलिए पूजा से जुड़ी समाग्री फल, फूल, सुपारी, चावल, हल्दी, 21 दूर्वा, कुमकुम और मिठाई से बप्पा को विदा करें.
लाल कपड़े से जुड़ा अनुष्ठान
एक नारियल या सुपारी को हल्दी, चावल के साथ लाल कपड़े में लपेटकर ऋद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ के लिए अपनी तिजोरी में एक जगह सुरक्षित रख दें.
प्रसाद
गणेश विसर्जन के दौरान बप्पा को 5 मोदक चढ़ाएं और इसे सभी भक्तों में बांटें.
विसर्जन जल
मुमकिन हो तो घर में ही साफ बर्तन या बाल्टी में पानी भरकर पर्यावरण के अनुकूल ही विसर्जन करें. बाद में इस पानी को किसी पेड़ के नीचे या पौधों में डाल दें.
मंत्र और जप
विसर्जन से पहले 3 बार घड़ी की दिशा में परिक्रमा लगाएं. इस के बाद बप्पा का विसर्जन भक्ति और आनंद के साथ “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” जैसे जयकारे लगाएं.
घर के लिए आशीर्वाद
बप्पा को विदाई देने से पहले उनके चरणों में झुककर पूरे परिवार की सेहत, धन और समृद्धि का आशीर्वाद मांगे.
विसर्जन तिथियां
गणपति विसर्जन के लिए आप 1.5 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10वें दिन कर सकते हैं. ज्यादातर लोग 10वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी के मौके पर ही करते हैं.

