लेंसकार्ट कर्मचारियों को तिलक लगाने का विवाद देश के कोने-कोने तक पहुंचा, एमपी, यूपी, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ सहित अनेक हिस्सों में प्रदर्शन, संतों में आक्रोष, धीरेंद्र शास्त्री ने कंपनी के मालिको सलाह दी बोले- लाहौर में कंपनी खोल लो
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Lenskart Shareholding Pattern: हिंदू धर्म की पहचान तिलक, कलावा और माला पर आईवियर कंपनी लेंसकार्ट को आपत्ति है. उनके ड्रेस कोड को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. संत समाज, धार्मिक संगठनों ने कंपनी के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं. हिंदू संगठन से जुड़े लोग शहरों के लेंसकार्ट स्टोर में जाकर कहीं कर्मचारियों को तिलक लगा रहे हैं तो कहीं कलावा बांध रहे हैं. इस बीच बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री का भी बयान सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है. उन्होंने कंपनी के पदाधिकारियों को सलाह देते हुए नजर आ रहे हैं. उन्होंने कंपनी के प्रमोटर्स से कहा है कि, ‘तू अपनी कंपनी लाहौर में खोल ले, भारत में काहे को मर रहा है? तेरो कक्का का भारत है क्या? हां! हमारे तो बाप का भारत है.’
यहां बतादें कि पिछले सप्ताह सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लेंसकार्ट कंपनी का एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हुआ था. जिसमें उल्लेख किया गया था कि कंपनी के कर्मचारियों को बिंदी, तिलक, कलावा और बुर्का पहनने पर रोक रहेगी. वहीं हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई थी.
विवाद की ये है मुख्य वजह
एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट कर की थी. इसमें उन्होंने लेंसकार्ट का ड्रेस कोड को लेकर डाक्यूमेंट शेयर किया था. उन्होंने कंपनी के फाउंडर से पूछा- पीयूष बंसल, क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट में हिजाब ठीक है लेकिन बिंदी और कलावा क्यों नहीं? इसके बाद लोगों ने लेंसकार्ट को ट्रोल किया और कंपनी की नीति पर सवाल उठाना शुरू कर दिया.
पीयूष बंसल ने दी सफाई, बोले- वायरल डॉक्यूमेंट पुराना और गलत है
कंपनी के फाउंडर पीयूष बंसल ने 15 अप्रैल को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर बताया कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है. यह कंपनी की मौजूदा गाइडलाइन नहीं दर्शाता. कंपनी सभी धर्मों का सम्मान करती है. देश में हमारे हजारों टीम मेंबर्स हैं, जो हर दिन अपने विश्वास और संस्कृति को गर्व के साथ अपनाते हैं.
वायरल डॉक्यूमेंट में दिए गए निर्देश
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए ‘ग्रूमिंग गाइड’ के मुताबिक, महिला कर्मचारियों को स्टोर में बिंदी या क्लचर लगाने की अनुमति नहीं है.
इसी डॉक्यूमेंट में बुर्का पहनकर स्टोर में काम करने की मनाही की गई है. अगर कोई कर्मचारी हिजाब या पगड़ी पहनता है, तो वह काले रंग का होना चाहिए. हिजाब की लंबाई ऐसी हो कि कंपनी का लोगो न छुपे.
लेंसकार्ट के विरुद्ध देश भर में प्रदर्शन
- मीडिया रिपोर्ट से पता चला है कि गाजियाबाद के लोनी से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर मंगलवार शाम गाजियाबाद के एक लेंसकार्ट शोरूम पहुंचे. उन्होंने कहा- यह बहुत गलत फैसला है. भारत में रहकर बिंदी और कलावा नहीं पहन सकते, यह उचित नहीं है. कंपनी के मालिक का नाम भले ही पीयूष है, लेकिन इसके माता या पिता में से कोई एक मुसलमान होगा. यह औरंगजेब की औलाद है.
- छत्तीसगढ़ रायपुर के लेंसकार्ट स्टोर में धार्मिक संगठन के कार्यकर्ता घुसकर कर्मचारियों को टीका लगाया. कार्यकर्ताओं ने पहले तो स्टाफ का नाम पूछा कि आप हिंदू हैं और फिर कहा कि तिलक लगाकर काम करें.
- शिमला में हिंदू संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आज 22 अप्रैल बुधवार को एक स्टोर में प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं ने अंदर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया और कंपनी के खिलाफ नारे लगाए. उन्होंने कर्मचारियों को राखी बांधी और तिलक भी लगाया.
- एमपी भोपाल के न्यू मार्केट रोशनपुरा में ड्रेस कोड के खिलाफ लेंसकार्ट शोरूम के बाहर हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों को तिलक लगाया, मंत्रोच्चार के साथ कलावा बांधा और कहा- सनातन का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान.
इधर कर्मचारियों का अलग ही दावा
तिलक लगाने को लेकर हुए विवाद के बीच शोरूम के कर्मचारी मनीष भमारे मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें कभी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया. उन्होंने बताया कि नवरात्रि में वे तिलक और कलावा लगाकर काम पर आए थे. उनके अनुसार कंपनी की ओर से ऐसी कोई पाबंदी नहीं बताई गई. उन्हें प्रदर्शन से डर नहीं है और व्यक्तिगत तौर पर कोई समस्या नहीं हुई है.
सोशल मीडिया में कैसे शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से शुरू हुआ. इसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोका गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है. इसी कथित भेदभाव को लेकर विवाद बढ़ा.

