दुनियाभर में सभी धर्मों के लोग रहते हैं. सभी धर्मों के लोगों के संस्कार अलग होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दाह संस्कार के समय शऱीर का कौन सा हिस्सा नहीं जलता है और उसके पीछे कारण क्या है?
By : DB News Update | Edited By: Prince Awasthi
Jabalpur News.
जीवन में किसी अपने को खोने का दर्द सबसे बड़ा होता है. लेकिन यह हम इंसानों के हाथ में नहीं होता है. माना जाता है कि जिसका जब समय आता है, तब वह इस जीवन से मुक्ति पाता है. लेकिन इस धरती पर सभी धर्मों के लोगों के जन्म से लेकर मृत्य तक के संस्कार अलग होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदू धर्म में दाह संस्कार के बाद कौन सा अंग नहीं जलता है. आज हम आपको बताएंगे कि दाह संस्कार के समय शरीर का कौन सा अंग नहीं जलता है.
क्या है दाह संस्कार?
हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद इंसान के शरीर का दाह संस्कार किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दाह संस्कार के वक्त जब डेड बॉडी में आग लगाई जाती है, तो कुछ ही घंटों में शरीर का एक- एक हिस्सा जलकर राख हो जाता है. इस दौरान ज्यादातर हड्डियां भी राख में बदल जाती हैं. हालांकि कुछ बच जाती हैं, जिन्हें हम नदियों में विसर्जित करने के लिए चुनकर लेकर आते हैं. जिसे अस्थी कहते हैं.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दाह संस्कार के समय शरीर का कौन सा हिस्सा नहीं जलता है. दरअसल शरीर के इस हिस्से में कभी आग नहीं लगती है. साइंटिस्ट ने कुछ साल पहले एक रिसर्च की थी. जिसके मुताबिक दाह संस्कार के दौरान शरीर में किस तरह के बदलाव होते हैं, उनके मुताबिक 670 और 810 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान में शरीर सिर्फ 10 मिनट में पिघलने लगता है. 20 मिनट के बाद ललाट की हड्डी नरम टिश्यू से मुक्त हो जाती है. टेबुला एक्सटर्ना यानी कपाल गुहा की पतली दीवार में दरारें आने लगती हैं.
40 मिनट बाद आंतरिक अंग सिकुड़ जाते हैं
वहीं 30 मिनट में पूरी त्वचा जल जाती और शरीर के हिस्से नजर आने लगते थे. दाह संस्कार शुरू होने के 40 मिनट बाद आंतरिक अंग गंभीर रूप से सिकुड़ जाते और जाल जैसी या स्पंज जैसी संरचना दिखाई देती है. इसके अलावा लगभग 50 मिनट बाद हाथ-पैर कुछ हद तक नष्ट हो जाते हैं और केवल धड़ बचता है, जो एक-डेढ़ घंटे के बाद टूटकर अलग हो जाता है. मानव शरीर को पूरी तरह से जलाने में लगभग 2-3 घंटे का समय लगता है. लेकिन एक हिस्सा फिर नहीं जलता है.
नहीं जलता यह हिस्सा
मीडिया रिपोर्ट की जानकारी के मुताबिक, मरने के बाद जब किसी के शरीर को जलाया जाता है, तो सिर्फ दांत ही बचते हैं. यही वह हिस्सा होता है, जिसे आप आसानी से पहचान सकते हैं. वहीं, शरीर का बाकी हिस्सा एक तरह से राख हो जाता है. दांतों के न जलने के पीछे साइंस है. दरअसल, दांत कैल्शियम फॉस्फेट से बने होते हैं और इस वजह से उनमें आग नहीं लगती है.

