New Yaer 2026 की पहली अमावस्या मौनी या माघी अमावस्या पड़ रही है. इसे हिंदू धर्म की सबसे पुण्यदायी और पवित्र दिन के रूप में लोग जानते हैं. नए साल में जानें मौनी अमावस्या की तिथि, महत्व और विशेषताएं.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: सुप्रिया
Mauni Amavasya 2026: मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने का शुभ दिन आने वाला है. इस दिन मौन रहकर आत्मशांति और संयम का पालन करने की जरूरत है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पापों का छय होता है. इस दिन गंगा, यमुनाख् नर्मदा सहित पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है. अधिकांश श्रद्धालु प्रयागराज के संगम में इस दिन स्नान करते हैं. यह दिन सूर्यदेव और पितरों की पूजा के लिए भी उत्तम माना गया है.
नववर्ष 2026 (New Yaer 2026) की शुरुआत होने में अब महज 15 दिन शेष हैं. साल 2026 में वैसे तो कुल 12 अमावस्या (Amavasya 2026) पड़ेगी, जिसमें मौनी अमावस्या भी एक है.
मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. यह सालभर में पड़ने वाली सभी अमावस्या में सबसे महत्वपूर्ण, पवित्र और पुण्यदायी मानी जाती है.
मौनी अमावस्या 2026 की तिथि (Maghi Amavasya 2026 Kab Hai)
माघी अमावस्या को ही मौनी अमावस्या कहते हैं, जोकि रविवार, 18 जनवरी 2026 को है. माघ मास के अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 जनवरी 2026 को रात 12 बजकर 03 मिनट पर होगी और 19 जनवरी 2026 को देर रात 01 बजकर 21 तक रहेगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, उदयातिथि को देखते हुए 18 जनवरी 2026 को ही मौनी अमावस्या मान्य रहेगी.
मौनी अमावस्या पर क्या है विशेष (Mauni Amavasya Significance)
मौनी अमावस्या को स्नान पर्व के रूप में भी मनाया जाता है. इस पावन दिन पर गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि, माघ महीने की अमावस्या पर गंगा नदी का जल अमृत के समान हो जाता है और इसमें स्नान करने (Ganga Snan) से अमृत समान जैसा पुण्य मिलता है और जाने-अनजाने किए पाप कर्म नष्ट होते हैं.
मौनी अमावस्या का दिन मौन व्रत के रूप में भी विशेष तिथि मानी जाती है. मौनी अमावस्या पर साधु-संत, साधक और कई भक्त ‘मौन व्रत’ (Maun Vrat) का पालन करते हैं. मान्यता है कि इस दिन रखे मौन व्रत से मानसिक शांति प्राप्त होती है.
इसके साथ ही मौनी अमावस्या पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण भी किए जाते है. इस तिथि पर किए गए दान-पुण्य का महत्व भी बढ़ जाता है.
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