Congress Protest: उज्जैन में हल्ला बोल आंदोलन के अवसर पर कांग्रेस ने शराबबंदी का मुद्दा उठाया
Source : DB News Update
By : DB News Update| Edited By: Supriya
MP News: कांग्रेस का हल्ला बोल आंदोलन शराबबंदी के मुद्दे पर उलझकर रह गया. इस मुद्दे पर सभी कांग्रेस नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी. आंदोलन में शामिल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शराब बंदी का समर्थन किया तो वहीं विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनकी बातों का समर्थन किया. जबकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने कहा कि पीने वालों से भी पूछना चाहिए. धर्मिक नगरी उज्जैन से शराबबंदी की शुरुआत किए जाने का समर्थन किया. इसके लिए सीएम डॉ. मोहन यादव से शराबबंदी पर निर्णायक फैसला लेने की मांग उठाई गई.
उज्जैन से शराबबंदी की शुरुआत हो
उज्जैन शहीद पार्क में हल्ला बोल आंदोलन के तहत कांग्रेस ने आमसभा आयोजित की थी. आमसभा में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह प्रदेश, कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष विभा पटेल, विधायक महेश परमार, दिनेश जैन सहित कांग्रेस के कई दिग्गज नेता शामिल हुए. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मध्य प्रदेश में शराबबंदी होना चाहिए और इसकी शुरुआत धार्मिक नगरी उज्जैन से हो.
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से शराबबंदी करने की मांग उठाई. प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जनता के बीच शराबबंदी का प्रस्ताव रखा और सभी से कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को शराब बैन करने की पहल करनी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि जब जनता प्रस्ताव को हरी झंडी दे रही है तो फिर सरकार को देरी नहीं करना चाहिए.
शराबबंदी को लेकर कहा ये
पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह इंदौर प्रेस क्लब में “प्रेस से मिलिए” कार्यक्रम में शामिल हुए. मीडिया से बातचीत में उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा और कई सवालों के जवाब दिए. शराबबंदी के कई प्रयोग हुए हैं. भारत में गुजरात और बिहार में यह लागू हुआ, लेकिन सबसे आसान होम डिलीवरी इन दोनों जगहों पर ही हो रही है. जहां तक धार्मिक स्थानों की बात है, हम इन जगहों का सम्मान करते हैं. लेकिन शराबबंदी के साथ जुआ-सट्टा भी बंद होना चाहिए. मैं भी 10 साल तक मुख्यमंत्री रहा. जब भी कोई शिकायत आती थी, तो शिकायत जिनके खिलाफ हो, उनसे जांच नहीं करवाई जाती थी. जहां भी भ्रष्टाचार का मामला आया, हमने कार्रवाई करवाई और जांच करवाई.
पूर्व CM ने उठाए ये सवाल
क्या इंदौर में भ्रष्टाचार नहीं है? नगर निगम और प्रशासन में मौजूद किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कभी कार्रवाई हुई है? क्या यहां के राजस्व रिकॉर्ड में अफरा-तफरी नहीं हुई है? सरकारी जमीन बड़े बिल्डर्स के पास पहुंच गई. क्या इसकी जानकारी किसी को नहीं? उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
बैलेट पेपर से हो चुनाव
चुनाव बैलेट पेपर से होना चाहिए क्योंकि हर वोटर का संवैधानिक अधिकार है कि जहां वह चाहे, वहां वोट डाले. उसकी पूरी गिनती हो और जिसे वोट डाला जाए, उसे ही मिले. ये तीन मौलिक अधिकार हैं, जो EVM में नहीं हैं. हमारी लड़ाई अदालत में जारी है.
राजनीती के पांच सूत्र
संपर्क, संवाद, समन्वय, सामंजस्य और सकारात्मक सोच—राजनीति के ये पांच सूत्र हैं. कांग्रेसी अगर इनका पालन करें, तो चुनाव दोबारा जीत सकते हैं. आरोप लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है.
जीतू पटवारी के बयान पर क्या बोले ?
चुनाव के दौरान जीतू पटवारी के बयान, जो काफी वायरल हुआ, पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें इस विषय में जानकारी नहीं है. आपको बता दें कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा था, “पार्टी गई तेल लेने, मुझे देखकर वोट दो. ” बजट पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि सबका यही मत है कि GST में मल्टी-स्लैब प्रणाली कभी सफल नहीं हो सकेगी. या तो सिंगल स्लैब होनी चाहिए या डबल, इससे ज्यादा नहीं. “वन नेशन वन इलेक्शन” किसी भी संघीय संविधान में संभव नहीं, क्योंकि पांच साल के लिए सरकार चुनी जाती है. जहां बहुमत खत्म होगा, वहां मध्यावधि चुनाव की जरूरत पड़ेगी. इसे कैसे संभव करेंगे?

