प्रयागराज महाकुंभ से दुनिया को सनातन-बौद्ध एकता का संदेश दिया गया.
By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Prayagraj Mahakumbh: प्रयागराज महाकुंभ से दुनिया को सनातन बौद्ध एकता का संदेश दिया गया. इस सम्मेलन में दुनिया के कई देशों के भंते, लामा, बौद्ध भिक्षुओं और सनातन के धर्माचार्य शामिल हुए. बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि, संघम् शरणम गच्छामि के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बुधवार को बौद्ध भिक्षुओं ने शोभायात्रा निकाली. यात्रा का समापन जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि के प्रभु प्रेमी शिविर में हुआ.
महाकुंभ में 3 प्रमुख प्रस्ताव पारित हुए
इस अवसर पर महाकुंभ में तीन प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए. पहले प्रस्ताव में बांग्लादेश, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बंद करने की मांग की गई है. दूसरे में तिब्बत को स्वायत्तता देने की मांग है और तीसरे प्रस्ताव का संबंध सनातन एवं बौद्ध की एकता से है. प्रभु प्रेमी शिविर में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ से संगम समागम एवं समन्वय का संदेश पूरी दुनिया में जाना चाहिए.
किसने क्या कहा?
“कुंभ का तीन शब्दों से संबंध है, जो भी यहां आता है उसकी संगम में स्नान की इच्छा होती है. यहां गंगा जमुना एवं सरस्वती मिल जाती हैं तो भेद दिखाई नहीं देता. यहां संगम के पूर्व अलग-अलग धाराएं हैं. संगम का संदेश है कि यहां से आगे एक धारा चलेगी.”
भैयाजी जोशी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह
सनातन एवं बौद्ध धर्म के बीच जिस तरह की प्रेम भावना, नजदीकी होनी चाहिए उसकी तरफ बहुत बड़ा कदम इस पावन धरती पर लिया गया है.
गैरी डोलमाहम, निर्वासित तिब्बत की रक्षामंत्री
“मैं पहली बार महाकुंभ में आया हूं. बौद्ध एवं सनातन में बहुत ही समानताएं हैं. हम लोग विश्व शांति के लिए काम करते हैं. हम भारत और यहां के लोगों को खुश देखना चाहते हैं. भारत सरकार बौद्ध धर्म का काम करने में सहयोग करती है. हम लोग मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री का आभार जताते हैं.”
भदंत नाग वंशा, म्यांमार

