वक्फ (संशोधन) बिल 2024 पर बुधवार (2 अप्रैल) को लोकसभा में चर्चा होगी, जबकि विपक्ष इसका विरोध करने के लिए एकजुट है.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Waqf Amendment Bill in Lok Sabha : आज यानी 2 अप्रैल को संसद में वक्फ संशोधन बिल को पेश किया जाएगा. सरकार पहले लोकसभा में संशोधित बिल को पेश करेगी. सत्र 4 अप्रैल तक चलेगा.इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री और आरएलडी के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा है कि, ‘हम एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस) के साथ हैं. हमने व्हिप जारी किया है.’
गृह मंत्री अमित शाह ने 29 मार्च को एक निजी चैनल से बातचीत में इसी सत्र (बजट सत्र) में वक्फ बिल संसद में पेश करने की बात कही थी. उस वक्त शाह ने कहा था कि इस बिल से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है. इस बिल का उद्देश्य वक्फ बोर्डों में ज्यादा जवाबदेही और पारदर्शिता लाना है और इन बोर्डों में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करना है. हालांकि, इस बिल ने मुस्लिम समुदाय में नाराजगी पैदा कर दी है.
वक्फ क्या है?
वक्फ एक इस्लामिक परंपरा है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को धार्मिक, सामाजिक या पुण्य कार्यों के लिए स्थायी रूप से समर्पित कर देता है. यह संपत्ति स्थायी रूप से वक्फ बोर्ड के अधीन हो जाती है और उसका इस्तेमाल समुदाय के भले के लिए किया जाता है. यह संपत्ति कृषि भूमि, भवन, दरगाह, मस्जिद, स्कूल, अस्पताल, कब्रिस्तान, इदगाह जैसे कई रूपों में हो सकती है.
विधेयक पर बहस के दौरान विपक्षी सांसदों का रुख
सूत्रों से पता चलाा है कि जगन रेड्डी की पार्टी के सांसद वक्फ विधेयक पर क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं. बताया जा रहा है कि जगन मोहन रेड्डी की युवजन श्रमिक रायथु कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के कुछ सांसद राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पर क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं. मिली जानकारी के अनुसार पार्टी ने इस मुद्दे पर अपने सांसदों को कोई व्हिप जारी नहीं किया है.
मुसलमानों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को बिल्कुल नहीं उठाया
वक्फ विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य रहे भाजपा सांसद गुलाम अली ने कहा कि समिति में शामिल विपक्षी सांसदों ने मुसलमानों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को बिल्कुल नहीं उठाया. उन्होंने विपक्षी दलों पर उनके कथनी और करनी में अंतर के लिए निशाना साधा. वहीं राज्यसभा के मनोनीत भाजपा सांसद गुलाम अली ने उच्च सदन में बहस के दौरान वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि इस विधेयक की तत्काल आवश्यकता है क्योंकि एक विशेष परिवार मुसलमानों की जमीन पर अतिक्रमण होता जा कर रहा है. राज्यसभा में बहस के दौरान केंद्रीय मंत्री और भारतीय रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख रामदास अठावले ने सरकार के वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन किया.
भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष के इस दावे का खंडन किया कि हिंदू भी वक्फ में दान कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि जब इस्लाम में गैर-मुसलमानों की दुआएं कुबूल नहीं होतीं, तो हिंदुओं का दान कैसे कुबूल हो सकता है?
कासिम अंसारी का इस्तीफा
वक्फ (संशोधन) विधेयक पर जनता दल (यूनाइटेड) के रुख से नाराज होकर पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद कासिम अंसारी ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया. अंसारी ने अपने त्यागपत्र में कहा, “मुझे इस बात का दुख है कि मैंने अपने जीवन के कई साल पार्टी को दिए और उसकी सेवा की, लेकिन अब जब पार्टी ने वक्फ संशोधन विधेयक पर अपना रुख बदल दिया है, तो मैं इससे सहमत नहीं हूं और इसलिए मैं अपने सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं.”
स्वतंत्र सांसद कार्तिकेय शर्मा ने सरकार के वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 का समर्थन
राज्यसभा के स्वतंत्र सांसद कार्तिकेय शर्मा ने सरकार के वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 का समर्थन करते हुए इसे प्रगतिशील बताया. राज्यसभा सांसद ने मौजूदा वक्फ अधिनियम में पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाया.
विपक्ष का क्या रहा रुख
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खर्गे ने सरकार से वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को वापस लेने और इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा न बनाने की अपील की है. बहस के दौरान मल्लिकार्जुन खर्गे ने कहा कि नया कानून 1995 के अधिनियम से अलग नहीं है, सिवाय कुछ ऐसे खंडों के जिन्हें लोगों और उनके अधिकारों को नष्ट करने के लिए जोड़ा गया है. कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खर्गे ने कहा कि बुधवार को लोकसभा में पारित होने के बावजूद वक्फ (संशोधन) विधेयक को व्यापक समर्थन नहीं मिला है. उन्होंने बताया कि विधेयक के पक्ष में 288 सदस्यों ने मतदान किया, जबकि 232 सदस्यों ने इसके विरोध में मतदान किया.

