शेयर बाजार में गिरावट के चलते BSE में लिस्टेड कंपनियों का टोटल मार्केट कैप पिछले सेशन के लगभग 455.6 लाख करोड़ रुपये से घटकर लगभग 449.6 लाख करोड़ रुपये रह गया.
Source : DB News Update
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Share Market: भारतीय शेयर बाजार में बड़ी उछाल के साथ शुरुआत हुई है. सेंसेक्स 1500 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ 74,000 के ऊपर, और निफ्टी 22,800 के स्तर के ऊपर कारोबार कर रहा है. बाजार में बैंकिंग और आईटी शेयरों में खरीदारी देखी जा रही है. पिछले दिन की भारी गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी आई है.निफ्टी 22,800 के ऊपर खुला, और सेंसेक्स 1500 अंक उछला.ऑटो, मेटल, और बैंकिंग शेयरों में अच्छी मजबूती दिख रही है.
इंडिगो के क्रैश होने पर देखी गई थी गिरावट
अहमदाबाद एयरपोर्ट पर एयर इंडिया के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर के बाद गुरुवार को इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई. गुजरात स्टेट पुलिस कंट्रोल रूम के मुताबिक, अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एयर इंडिया का एक विमान उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों के भीतर क्रैश हो गया.
इसके अलावा भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार 12 जून को भारी गिरावट देखने को मिली. कारोबार के दौरान सेंसेक्स में करीब 1,000 अंक टूट गया और निफ्टी-50 24,850 से नीचे चला गया. गुरुवार को सेंसेक्स अपने पिछले बंद 82,515.14 के मुकाबले 82,571.67 पर खुला और 992 अंक या 1.2 परसेंट की गिरावट के साथ 81,523.16 के इंट्राडे लो पर आ गया. वहीं, निफ्टी अपने पिछले बंद 25,141.40 के मुकाबले 25,164.45 पर खुला और 1.3 परसेंट गिरकर 24,825.90 के इंट्राडे लो पर पहुंच गया.
निवेशकों को एक दिन में इतना बड़ा नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक कारोबार के अंत में सेंसेक्स 823 अंक या 1 परसेंट की गिरावट के साथ 81,691.98 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 253 अंक या 1.01 परसेंट गिरकर 24,888.20 पर बंद हुआ. बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में क्रमशः 1.52 परसेंट और 1.38 परसेंट की गिरावट आई है. शेयर बाजार में आज आई इस गिरावट का असर कुछ ऐसा रहा कि BSE में लिस्टेड कंपनियों का टोटल मार्केट कैप पिछले सेशन के लगभग 455.6 लाख करोड़ रुपये से घटकर लगभग 449.6 लाख करोड़ रुपये रह गया. इससे निवेशकों को सिर्फ एक ही सेशन में 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
कच्चे तेल में आई भारी गिरावट
ताज़ा वैश्विक रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतों में करीब 11% तक की तेज गिरावट दर्ज हुई है। यह गिरावट मुख्य रूप से तब आई जब बाजार में यह संकेत मिला कि भू-राजनीतिक तनाव (खासकर मध्य-पूर्व से जुड़े) में कुछ अस्थायी नरमी आ सकती है। इसी उम्मीद में निवेशकों ने तेजी से बिकवाली की, जिससे तेल की कीमतें नीचे आ गईं।
हालांकि, यह गिरावट पूरी तरह स्थिर नहीं रही—बाद में कीमतें फिर से $100 प्रति बैरल के ऊपर वापस चली गईं, क्योंकि आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
इसका असर क्या है?
अगर तेल कुछ समय तक नीचे रहता है, तो इसके कुछ सीधे फायदे हो सकते हैं-
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है
- महंगाई (inflation) थोड़ी घट सकती है
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत में राहत मिल सकती है
- कंपनियों के लिए इनपुट कॉस्ट कम हो सकती है
बाजार में अस्थिरता
बाजार में अस्थिरता (volatility) का माहौल आमतौर पर तब बनता है जब कई बड़ी अनिश्चितताएँ एक साथ सक्रिय हों। अभी के समय में इसके कुछ मुख्य कारण हैं:
भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical risks)
मध्य-पूर्व, रूस-यूक्रेन जैसे क्षेत्रों में तनाव बढ़ने, घटने से तेल, गैस और सप्लाई चेन पर असर पड़ता है। इससे निवेशक तेजी से खरीद-बिक्री करते हैं, जिससे बाजार हिलता है.
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव
तेल में अचानक ~11% गिरावट जैसी मूवमेंट हो रही है, ऐसे में महंगाई के अनुमान बदल जाते हैं. कंपनियों की लागत और मुनाफे पर असर डालती है. इसलिए शेयर बाजार तुरंत रिएक्ट करता है.
ब्याज दरें और केंद्रीय बैंकों की नीति
अमेरिका का फेडरल रिज़र्व और भारत का RBI जब ब्याज दर बढ़ाने व घटाने के संकेत देते हैं तो निवेशकों की रणनीति बदल जाती है (खासकर शेयर vs बॉन्ड में पैसा शिफ्ट होता है).
महंगाई (Inflation) और आर्थिक डेटा
CPI, रोजगार डेटा, GDP जैसे आंकड़े अगर उम्मीद से अलग आते हैं तो ग्रोथ की उम्मीदें बदलती हैं और बाजार तुरंत रीप्राइस करता है

