संगमरमर चट्टानों पर पड़ने वाली सूर्य की धुंधली आभा और सतरंगी इन्द्रधनुष पर्यटकों को लुभा रही, डायनासोर का जीवाष्म भी देखने को मिलेंगे
Source : DB News Update
By : DB न्यूज अपडेट | Edited By : प्रिंस अवस्थी
MP Tourism Bhedaghat : कई बार हाई-प्रेशर पाइप या फाउंटेन से पानी इतनी तेजी से निकलता है कि वह हवा में बारीक कण बनाकर “धुएं की धार” जैसा दृश्य बना देता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि नर्मदा नदी की कल-कल बहते पानी की धार में ऐसे अद्भुत दृश्य देखने को मिलते हैं, जिसकी बूंदे पड़ते ही पर्यटक रोमांच का अनुभव करते हैं. यहां बतादें कि नर्मदा नदी का उत्तर तट जबलपुर मुख्यालय से 23 किमी दूर स्थित है, जिसे भेड़ाघाट के नाम से जाना जाता है. यह क्षेत्र सुरम्य वादियों के बीच है. पर्यटन की दृष्टि से यह क्षेत्र बहुत ही आकर्षक है. इसे Land of Marbel Rock नाम से भी जाना जाता है. प्रकृतिक रूप से हरियाली चुनरी ओढ़े सुरम्य वादियां पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र है. नर्मदा नदी के भेड़ाघट का झरना धुआंधार जल प्रपात के नाम से अपनी पहचान बना चुका है. संगमरमर की चट्टानों के बीच से पानी की निकलती धुंधली आभा पर्यटकों को अपनी ओर सहसा आकर्षित कर रही है. धुआंधार झरना, एक शानदार वॉटर फाल के रूप में देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुका है.
सूर्य की किरणों से सतरंगी दिखता झरना
जबलपुर का भेड़ाघाट संगमरमरी चट्टानों के बीच से बह रहा है. संगमरमरी चट्टान नर्मदा नदी के दोनों ओर करीब 100 फीट ऊंची दिखाई पड़ रही है. भेड़ाघाट का प्राकृतिक वातावरण बेहद शांत है. संगमरमरी चट्टान पर जब सूरज की रोशनी सफेद और मटमैले रंग पर पड़ती है, तो नदी में बनने वाला इसका प्रतिबिंब अद्भुत दिखता है. प्राकृतिक माहौल में कोई पर्यटक यदि बोट राइड करता है तो इस अनुभव को जीवन के अंतिम चरण तक सहेज कर रखेंगा. क्योंकि यहां की प्राकृतिक छटा किसी से छिपी नहीं है और नर्मदा का अद्भुत नजारा हर किसी को यहां रोमांच का अनुभव कराता है.
कहां है भेड़ाघाट-जल प्रपात?
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में स्थित भेड़ाघाट एक रमणीय स्थल है. भेड़ाघाट में संगमरमर चट्टानों के बीच तेज प्रवाह से गिरता नर्मदा नदी का जल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन गया है. यह पर्यटन स्थल जबलपुर से लगभग 23 किलोमीटर दूर स्थित है. संगमरमर पत्थरों के बीच से बहनी नर्मदा की धार हर किसी को दिग्भ्रमित कर देती है. क्योंकि कई जगह नर्मदा की इतनी पतली धार दिखाई पड़ती है कि लोग यहीी सोच में पड़ जाते हैं कि जिस नदी का पाट या विस्तार इतने चौड़े एरिया में है. वह नदी महज 5 से 10 फीट चौड़े पाट पर बह रही है. आखिरकार नर्मदा इतनी कम चौड़ाई में कैसे बह सकती हैं?
ये है यहां की खासियत
- संगमरमर की ऊंची दूधिया सफेद संगमरमर की चट्टानों के बीच बहती हुई नर्मदा नदी बेहद ही मनमोहक लगती है.
- नौका विहार के दौरान भेड़ाघाट की खूबसूरती के कसीदें पढ़ने वाले नाविक पर्यटकों को रोमांच से भर देते हैं.
- पूर्णिमा रात्रि का नौका विहार, धुआंधार जलप्रपात और बंजी जंप का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में यहां पर्यटक पहुंचते हैं.
- भेड़ाघाट के समीप 64 योगिनी का प्रसिद्ध स्थान है. जहां 64 से ज्यादा देवी-देवताओं की खण्डित मूर्तियां हैं. मंदिर में भगवान गौरीशंकर जी का दर्शन करने पर्यटक ऊंची सीढ़ी चढ़कर पहुंच जाते हैं.
- “बंदर कुदनी” के नाम से नर्मदा नदी के संगमरमर पहाड़ दोनों तट इतने नजदीक नजर आते हैं कि इन पहाड़ों को बंदर छलांग लगा सकते हैं.
- भेड़ाघाट के आसपास डायनासोर के अंडे के भी पाए गए हैं. जहां जियोलॉजिकल पार्क की स्थापना की जा रही है.
- देवी दुर्गा को समर्पित 10वीं सदी का खूबसूरत चौंसठ योगिनी मंदिर भी यह स्थित है.
- संगरमर की चट्टानें के बीच चाँद की रोशनी में भेड़ाघाट की सैर एक अलग ही तरह का अनुभव रहता है.
- धुआंधार जलप्रपात को स्पॉट धुआंधार फॉल्स के नाम से भी जाना जाता है.
भेड़ाघाट पहुंचने की सुविधा
- जबलपुर मुख्याल से महज 23 किलोमीटर की दूरी पर भेड़ाघाट जलप्रपात स्थित है.
- जबलपुर रेलवे स्टेशन और बस स्टैण्ड से भेड़ाघाट के लिए मेट्रो बस, आटो-आपे, टेम्पो और टैक्सी की सुविधा है.
- रोपवे से भेड़ाघाट का प्राकृतिक सौन्दर्य देखने से रोमांच का अनुभव होगा.
- जल प्रपात देखने के लिए कई पर्यटक लम्हेटाघाट रोड से भी भेड़ाघाट का सफर कर सकते हैं.




