राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी. बीजेपी ने सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को संसद के निचले सदन का अस्थाई अध्यक्ष (प्रोटेम स्पीकर) चुना है.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
नई दिल्ली. देश में 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे आए। जिसके बाद 9 जून को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद आज यानी सोमवार को लोकसभा का पहला सत्र शुरू होने वाला है। सदन में आज सभी नए नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई जाएगी। 26 जून को लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव होने वाला है। वहीं, 27 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। बीजेपी ने सात बार के सांसद भर्तृहरि महताब को संसद के निचले सदन का अस्थाई अध्यक्ष (प्रोटेम स्पीकर) चुना है। इसके चलते सोमवार को लोकसभा में शोरगुल हो सकता है। लोकसभा के पहले सत्र के दौरान एग्जिट पोल, NEET और UGC-NET परीक्षा को लेकर भी हंगामा होने के आसार हैं। इधर, विपक्ष ने पहले ही महताब को अस्थाई अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर बीजेपी पर हमला बोला है। विपक्ष ने कहा है कि सरकार ने प्रोटेम स्पीकर को लेकर कांग्रेस सांसद के. सुरेश के दावे को अनदेखी की है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि महताब लगातार सात बार के लोकसभा सांसद हैं। ऐसे में प्रोटेम स्पीकर का पद उनके लिए उपयुक्त हैं।
गौरतलब है कि सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन में महताब को लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर के तौर पर शपथ दिलाएंगी। इसके बाद महताब सुबह 11 बजे लोकसभा सदन पहुंचे। लोकसभा की कार्यवाही के दौरान कुछ समय के लिए मौन रखा जाएगा। इसके बाद लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह निचले सदन के लिए निर्वाचित सदस्यों की सूची सदन पटल पर रखेंगे। इसके बाद महताब के अनुरोध पर लोकसभा के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन की सदस्यता की शपथ लेंगे।
बता दें कि आज 18वीं लोकसभा का सत्र शुरू हो रहा है हालांकि, भर्तृहरि महताब के प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने को लेकर विपक्ष ने अपना रुख स्पष्ट किया था और कहा था कि वो इस फैसले से खुश नहीं हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रोटेम स्पीकर को कैसे चुना जाता है और इसका क्या तरीका है? अगर आप यह नहीं जानते हैं तो हम आपको यहां इसके बारे में सारी डिटेल्स देने वाले हैं.
राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवारी बताते हैं कि प्रोटेम स्पीकर के लिए कानून और प्रक्रिया में कोई प्रावधान नहीं है. लोकसभा के पहले अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर ने परंपरा स्थापित की थी कि सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य को ही प्रोटेम स्पीकर की जिम्मेदारी दी जाएगी. अगर कोई वरिष्ठ सदस्य है और वह मंत्रिमंडल में आ गया है, तो फिर उसके बाद दूसरे वरिष्ठ सदस्य को यह पद दिया जाएगा.
वरीयता का मतलब क्या?
प्रोटेम स्पीकर के लिए वरीयता का क्रम कंटिन्यूटी में गिना जाता है. कोई अगर सात बार सांसद चुना गया है और बीच में एक बार चुनाव हारे हैं तो ऐसे में छह बार लगातार संसद पहुंचने वाले को प्रोटेम स्पीकर चुना जाता है.
10-12 घंटे तक सांसदों को शपथ दिलवाते हैं प्रोटेम स्पीकर
राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवारी बताते हैं प्रोटेम स्पीकर विपक्ष का स्पीकर भी बन सकता है. उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा में भी विपक्ष के प्रोटेम स्पीकर बने थे. सभी अपनी वरिष्ठता और कर्तव्य का निर्वहन करते हैं. वे राष्ट्रपति या फिर राज्यपाल के निवास पर अपनी शपथ लेते हैं. शपथग्रहण के बाद वे सभापति तालिका भी बनाते हैं. लगातार 10-12 घंटे सांसदों को शपथ दिलाने में सभापति उनकी मदद करते हैं. इसके लिए सभापति को भी शपथ दिलाई जाती है.
प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति कानून से नहीं, बल्कि परंपरा से होती है
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा, प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति कानून से नहीं, बल्कि परंपरा से होती है. आजादी के बाद से भारत में यह एक लंबी परंपरा है. अब कांग्रेस इस प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रही है. भर्तृहरि महताब लगातार सातवीं बार सांसद के तौर पर काम कर रहे हैं. परंपरा के अनुसार सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले सांसद को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जा सकता है. इसलिए, इस 18वीं लोकसभा में भर्तृहरि महताब प्रोटेम स्पीकर बनने के योग्य हैं. जहां तक (कांग्रेस सांसद) के सुरेश का सवाल है, वे लगातार 8 बार सांसद रह चुके हैं. के सुरेश का यह लगातार चौथा कार्यकाल है. जबकि भर्तृहरि महताब का यह लगातार सातवां कार्यकाल है. इसलिए, परंपरा का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है.

