पुरी के जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश के लिए कुल 22 सीढ़ियां हैं. इन सीढ़ियों में नीचे से तीसरी सीढ़ी को खास माना गया है.
By : डीबी न्यूज अपडेट | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Secrets Of Jagannath Temple: ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ का मंदिर हिंदू धर्म के चार पवित्र धामों में से एक है और इस मंदिर को धरती पर बैकुंठ धाम का स्वरूप माना जाता है. इस कारण यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और भगवान की कथा भी सुनते हैं. विगत दिनों मध्य प्रदेश जबलपुर से श्रीमद् भागवत सुनने के लिए एक बड़ा जत्था पुरी पहुंचा था और यहां जगद्गुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज के सानिध्य में यह आयोजन हुआ था. यहां पहुंचे श्रद्धालुओं को मंदिर में कई चमत्कारिक अनुभव हुए. जिन्हें जबलपुर पहुंचने के बाद लोगों के बीच साझा किया.
यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ जी के नाम से प्रसिद्ध है. पुरी के जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश के लिए कुल 22 सीढ़ियां हैं. इन सीढ़ियों में नीचे से तीसरी सीढ़ी को खास माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस सीढ़ी पर मृत्यु के देवता यमराज का वास है.
ओडिशा के पुरी में स्थित यह मंदिर न केवल अपने धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इससे जुड़ी अनेक रहस्यमयी मान्यताएं और कथाएं भी लोगों की आस्था को और गहरा बनाती हैं.

धार्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध है धाम
विगत दिनों जबलपुर स्थित नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज गोरखपुर से जगद्गुरु श्रीनृसिंहपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज के सानिध्य में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया. जिसमें प्रदेश भर के करीब 700 श्रद्धालु एक साथ पुरी पहुंच गए. जबकि श्रद्धालुओं को ठहरने की व्यवस्था मात्र 300 से 350 लोगों की थी, लेकिन धाम में ऐसा चमत्कार हुआ कि जितने लोग पुरी पहुंचे, सभी ने भगवान श्रीकृष्ण कथा श्रवण किया और मंदिर में विराजमान भगवान जगन्नाथ जी के दर्शन किए.
जगन्नाथ मंदिर के रहस्य जाने
भगवान का हृदय-
यहां की मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी देह का त्याग इसी मंदिर में किया था और शरीर के एक हिस्से को छोड़कर उनका पूरा शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया था. यह हिस्सा उनका हृदय था. माना जाता है कि मंदिर में रखे श्रीकृष्ण के लकड़ी के देह में आज भी वह हृदय धड़क रहा है.
समुद्र की आवाज-
जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों का कहना है कि मंदिर में सिंहद्वार जाने के बाद जबतक उस द्वार पर कदम नहीं पड़ते, तब तक समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देती हैं और जैसे ही सिंहद्वार पर कदम पड़ते हैं, वैसे ही लहरों की आवाज सुनाई देना बंद हो जाती हैं.

मंदिर का झंडा-
जगन्नाथ मंदिर के शीर्ष पर जो झंडा लगा है, वह झंडा हवा की विपरीत दिशा में उड़ता रहता है. मान्यता है कि इस मंदिर का झंडा हर दिन बदला जाता है और अगर किसी दिन झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 सालों के लिए बंद कर दिया जाएगा.

भगवान की प्रसादी-
जगन्नाथ मंदिर की रसोई से भी एक रहस्य जुड़ा है. यहां जो प्रसाद बनता है वो सात मिट्टी के बर्तनों में बनाया जाता है और उन सातों बर्तनों को एक के ऊपर एक रखा जाता है. हैरानी की बात यह है कि सबसे पहले प्रसाद सातवें बर्तन में तैयार होता है और उसके बाद छठे, पांचवे, चौथे, तीसरे, दूसरे और फिर पहले में प्रसाद पककर तैयार होता है.
ब्रह्म पदार्थ-
मान्यता है कि मूर्तियों के अंदर ब्रह्म पदार्थ है, जिसे नई मूर्तियों में डाला जाता है. मंदिर की मूर्तियों को हर 12 साल में बदला जाता है और इस दौरान बिजली काट दी जाती है. कोई नहीं जानता कि यह ब्रह्म पदार्थ क्या है.

सनातन हिंदू-
जगन्नाथ मंदिर में केवल सनातनी हिंदू ही आ सकते हैं. यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीमद् भागवत कथा और श्रीराम कथा सुनाने जाते हैं.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

