आयुक्त जनसंपर्क एवं तत्कालीन कलेक्टर जबलपुर सक्सेना ने कलेक्टर-कमिश्नर कान्फ्रेंस में दिया प्रस्तुतिकरण, नवीनीकृत अभिलेखागार से रिकॉर्ड की सुरक्षा और सहज उपलब्धता हुई सुनिश्चित
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP collector commissioner conference: मध्य प्रदेश के 55 जिलों में जबलपुर जिला प्रदेश भर के नवाचार मामले में अनुकरणीय बन गया है. दरअसल भोपाल में आयोजित कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन जबलपुर में राजस्व विभाग के रिकॉर्ड रूम को लेकर चर्चा हुई और जबलपुर में हुए नवाचार को उपयोगी तथा अनुकरणीय बताते हुए सराहना की गई. क्योंकि इस नवाचार ने जनसामान्य के राजस्व रिकॉर्ड देखने के अनुभव को पूर्णता: बदल दिया है. आयुक्त जनसंपर्क एवं तत्कालीन कलेक्टर जबलपुर दीपक सक्सेना ने लघु फिल्म के प्रस्तुतिकरण में बताया कि जबलपुर के नवीनीकृत राजस्व अभिलेखागार का वातावरण अब बैंक के लॉकर रूम जैसा है. इस पहल से जनसामान्य के साथ रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों को भी गंदे-बदबूदार वातावरण से मुक्ति मिली है और वे रिकॉर्ड ढूंढ़ने की मशक्कत से मुक्त हुए हैं.
पीढ़ियों का रिकार्ड हो गया सुरक्षित
कलेक्टर कार्यालय के रिकार्ड रूम में शहर के रहवासियों के परिवारों की पीढ़ियों के लिए विशेष महत्व रखने वाला यह राजस्व रिकॉर्ड न केवल अब सुरक्षित है, अपितु रिकार्ड कहां रखा है?, इसके संबंध में भी पारदर्शिता आयी है और आवश्यक जानकारियां अब सभी के लिए सुलभ हैं. इसके तैयार किये गये पोर्टल पर चंद एंट्रियों से पता चल जाता है कि रिकॉर्ड किस रैक-शेल्फ-बॉक्स में किस नंबर पर रखा हुआ है. आवेदक घर बैठे भी यह जानकारी प्राप्त कर सकता है और रिकॉर्ड रूम के बाहर लगाए गए कियोस्क से भी रिकार्ड में केस की लोकेशन का पता लगा सकता है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर प्रवास के दौरान जनसामान्य के जीवन को आसान बनाने वाले इस नवाचार की सराहना करते हुए जबलपुर जिला प्रशासन को इस पहल के लिए बधाई दी थी.
रिकार्ड रूम में ये हुए कार्य
- राजस्व विभाग के रिकॉर्ड रूम बदलाव के लिए रिकॉर्ड रूम को रेनोवेट किया गया.
- लोहे के रैक्स की मरम्मत कर उनका रंग-रोगन और रिकॉर्ड रखने के लिए कपड़े के बस्ते की जगह प्लास्टिक बॉक्स का उपयोग किया गया.
- हर केस फाईल को बस्ते से निकालकर प्लास्टिक की पन्नी में रखकर प्लास्टिक बॉक्स में जमाया गया.
- बॉक्स पर रंगीन स्टीकर की मदद से तहसीलवार कलर कोडिंग की गई.
- बॉक्स पर वर्षवार, मदवार केस के डिटेल स्टीकर पर प्रिंट कर चिपकाए गए.
- रैक, शेल्फ, प्लास्टिक बॉक्स और उसमें रखी केस फाईल की लोकेशन के हिसाब से कोडिंग की गई.
- रैक और उसकी शेल्फ को यूनिक नंबर दिया गया.
- हर केस फाईल और प्लास्टिक बॉक्स पर लोकेशन का कोड नंबर स्टीकर से चिपकाया गया.
- केस फाईल की लोकेशन संबंधी सारी जानकारी ऑनलाइन एप्लीकेशन तैयार कर उस पर डाल दी गई.
- सुशासन की ओर इस बढ़े कदम से राजस्व रिकॉर्ड के आकांक्षी व्यक्तियों को रिकॉर्ड प्राप्त करने में सरलता और सुगमता की अनुभूति हो रही है.
मुख्य सचिव ने ग्रामीण विकास विभाग का सत्र किया संबोधित
मुख्य सचिव जैन कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन ग्रामीण विकास विभाग के सत्र को संबोधित कर रहे थे. कॉन्फ्रेंस में समृद्ध ग्राम एवं विकास खंडों के पुनर्विकास के लिए समावेशी कार्ययोजना पर विशेष जोर दिया गया. साथ ही पंचायतों के राजस्व सुदृढ़ीकरण पर भी चर्चा की गई. अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास दीपाली रस्तोगी ने मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना की प्रगति से अवगत कराते हुए बताया कि जबलपुर, इंदौर, नीमच एवं पन्ना के 14 ग्रामों का चयन किया गया है. प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और प्रधानमंत्री जनधन और धरती आबा कार्यक्रम की प्रगति की जानकारी दी.

