बागेश्वर पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री वृन्दावन कैली आश्रम प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे, उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Dhirendra Shastri Met Premananda Maharaj: राधा प्रेमी संत बाबा प्रेमानंद महाराज से आज 14 अक्टूबर को बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मिलने पहुंचे. उन्होंने प्रेमानंद जी महाराज से उनके राधा केली कुंज स्थित आश्रम में मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हाल-चाल जाना. इस अवसर पर पंडित धीरेन्द्र शास्त्री को गले लगा लिया और कहा कि जीवन रहे या न रहे, मिलना तो होता रहे. यह दृश्य देखकर आश्रम में मौजूद भक्त भावुक हो गए. उनके मिलन का यह वीडिया सोशल मीडिया में बड़ी तेजी के साथ वायरल हो रहा है.
बाबा बागेश्वर के अनुयायियों को जैसे ही पता चला कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री वृंदावन प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए पहुंचे हैं, तो उनसे मिलने व देखने के लिए अनुयायियों की भीड़ जुट गई. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अनुयायियों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया है और मुस्कुरा कर वहां से चले गए.
‘यह तो सब आपकी लीला है आपका स्वास्थ्य ठीक’
आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री राधा प्रेमी संत प्रेमानंद महाराज से मिलने वृन्दावन की परिक्रमा मार्ग स्थित उनके आश्रम कैली कुंज पहुंचे थे. यहां उन्होंने प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य की जानकारी ली और कहा कि यह तो सब आपकी लीला है आपका स्वास्थ्य तो ठीक है.
किडनी की समस्या से जूझ रहे प्रेमानंद महाराज
बता दें कि संत प्रेमानंद महाराज की किडनी लंबे समय से खराब है और उनका डायलिसिस नियमित समय पर होता रहता है. किडनी खराब होने के बाद भी वो नियमित रूप से भक्तों से मुलाकात करते हैं और उन्हें राधा नाम का जाप करने के लिए कहते हैं. उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया है कि उनका आखिरी समय चल रहा है और ऐसे में वो हर रोज राधा रानी की अराधना करना चाहते हैं.
हर धर्म के भक्त जुड़ रहे
संत प्रेमानंद महाराज से हर धर्म के भक्त जुड़ रहे हैं. बतादें कि विगत दिनों उनकी खराब तबीयत के चलते एक मुस्लिम युवक का वीडियो और फोटोज वायरल हुआ था, जिसमें वो मक्का-मदीना में प्रेमानंद महाराज के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करने के लिए गया था. संत प्रेमानंद महाराज को उनकी अच्छी और धार्मिक बातों के लिए जाना जाता है. संत प्रेमानंद महाराज सभी धर्मों में इसलिए लोकप्रिय हैं क्योंकि वे ईश्वर की कामना करने के लिए कहते हैं, भले ही उनका स्वरूप अलग ही क्यों न हो.

