जबलपुर में बनने जा रहा देश का पहला जियो पार्क, जिसमें 3D-5D मॉडल के माध्यम से देख सकेंगे डायनासोर…
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
First Jio Park In Jablpur : जियोलॉजिकल पार्क (Geological Park) की स्थापना का कार्य पर्यटन विभाग (Tourism Department) को सौंपा गया है. लेकिन पर्यटन विभाग को जियो पार्क बनाने के लिए दिल्ली से हरी झंडी का इंतजार है. पर्यटन विभाग के द्वारा सभी कागजी कार्यवाही पूरा किए जाने के बाद भी मंजूरी नहीं मिल पा रही है. जबकि दावा किया गया था कि जियो पार्क बनने से जबलपुर देश-दुनिया में अपनी पहचान जल्दद बना लेगा. लेकिन इस पार्क को लेकर जिस प्रकार उदासीनता बरती जा रही है, उसको देखते हुए ऐसी संभावना नजर नहीं आ रही है. दरअसल यह जियो पार्क लगभग 12 हेक्टेयर भूमि पर निर्मित होना है. इसके लिए डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बहुत पहले तैयार हो चुकी थी. इस प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेनशन भी एमपी स्तर पर हो चुका है. लेकिन ये प्रोजेक्ट रिपोर्ट दिल्ली मंत्रालय अटक गई है. जबकि पर्यटन विभाग द्वारा इस प्रोजेक्ट को दिल्ली ऑनलाइन भेजा जा चुका है. लेकिन एक साल से ज्यादा का समय बीत रहे हैं, अभी तक दिल्ली से इस प्रोजेक्ट को अप्रूवल नहीं मिला है.
भू-विरासत व संस्कृति को समेटे है जियो पार्क प्रोजेक्ट
बतादें कि जियो पार्क में मध्यप्रदेश की भू-संस्कृति, नर्मदा की भू-विरासत, पृथ्वी की खोज, ग्रहों की जानकारी, पृथ्वी के केंद्र की यात्रा सहित अन्य विषयों पर प्रभावी एवं शिक्षाप्रद जानकारी डीपीआर में समाहित है. पर्यटन विभाग द्वारा दिए गए प्रेजेंटेशन में विद्यार्थियों को इंटरैक्टिव एवं थ्री-डी मॉडलिंग के माध्यम से जानकारी उपलब्ध होगी. संग्रहालय में मध्यप्रदेश के 13 भौगोलिक क्षेत्रों को उनके भौगोलिक-सांस्कृतिक महत्व एवं धरोहर के साथ बेहद आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जायेगा.
85 करोड़ से बनेगा एमपी का पहला जियो लॉजिकल पार्क
एमपी के जबलपुर में देश का पहला जियो पार्क बनाने की सारी तैयार कर ली गई है. जिसकी प्रदेश और केन्द्र सरकार से मंजूरी भी मिल चुकी है. लेकिन यह प्रोजेक्ट ऑन लाइन कम्प्यूटर में कैद है. इसके निर्माण को लेकर दिल्ली में बैठे अधिकारी उदासीनता बरत रहे हैं. इसी कारण इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की हरी झंडी नहीं मिल पा रही है. इस प्रोजेक्ट में साइंस सेंटर भी समाहित है. इस सारे निर्माण में करीब 85 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है.
5 हजार वर्ग किमी का होगा केन्द्र
भूगर्भ शास्त्र की दृष्टि से जबलपुर को प्रकृति ने अनुपम देन दी है. यहां पूरे पांच हजार वर्ग किमी क्षेत्र का केंद्र लम्हेटा घाट है, इसलिए यह लम्हेटा फॉर्मेशन के नाम से दुनिया में पहचाना जाता है. हजारों-लाखों वर्ष पहले के सजीवों के अस्तित्व इस क्षेत्र में मिले हैं. यहां डायनासोर ( Dinosaur fossils in jabalpur ) के जीवाश्म भी मिले हैं. 1928 में पहली बार विलियम स्लीमन ने यहां से डायनासोर का जीवाश्म इकट्ठा किए थे, यह जियो हेरिटेज साइट है. अब तो यूनेस्को ने भी इसे जियो हेरिटेज साइट के रूप में मानने लगा है. जियो पार्क ( India first jio park at jabalpur ) बनने को लेकर तत्कालीन जबलपुर सांसद राकेश सिंह ने पहल की थी.
डीपीआर में 1.30 करोड़ रुपये हो चुके खर्च
देश के इस पहले जियोलॉजिकल पार्क की स्थापना का कार्य मध्यप्रदेश शासन पर्यटन विभाग के माध्यम से कराया जाना है. इसके संदर्भ में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग खान मंत्रालय की तरफ से स्वीकृति पत्र जारी किया जा चुका है. भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने इसकी डीपीआर तैयार करने के 1.30 करोड़ रुपये की राशि खर्च कर चुका है.
प्रोजेक्ट पर एक नजर
- जियोलॉजिकल पार्क करीब 85 करोड़ रुपये की राशि से तैयार होगा.
- जियो पार्क लगभग 5 एकड़ भूमि पर निर्मित होगा.
- जबलपुर में बनने वाला देश का यह पहला जियो पार्क होगा.
- जियोलॉजिकल संरचनाओं के साथ-साथ मानव सभ्यता के विकास के अध्ययन, पर्यटन और संस्कृति के विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा.
- उप क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र (साइंस सेंटर) की स्थापना के लिए भी लगभग सभी औपचारिकताएं पूर्ण हो चुकी हैं.
- भेड़ाघाट में स्थापित होने वाले इस साइंस सेंटर के लिए 7 एकड़ भूमि जिला प्रशासन जबलपुर की तरफ से मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद को आवांटित कर दी गई है.
- केंद्र में विज्ञान के अनेक प्रादर्श (मॉडल) स्थापित किए जाएंगे जो कि भवन के अंदर और बाहर स्थापित होंगे.
- इसके अलावा एक इनोवेशन हब रहेगा, जिसमें एक प्रकार की लैब होगी. इसमें विद्यार्थी प्रयोग कर सकेंगे.
वर्जन
जियो लॉजिकल पार्क का प्रोजेक्ट दिल्ली स्तर पर अटका है. अभी तक इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के निर्देश नहीं मिले हैं. विभाग द्वारा सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं. प्रोजेक्ट को ऑनलाइन भी किया जा चुका है.
अनिल पाटीदार, एसई, पर्यटन विभाग भोपाल

