दिल्ली ब्लास्ट में 50 CCTV फुटेज ने डिकोड कर पूरा रूट देखा गया, उमर ने कहां गुजारी रात, कहां लगाए चक्कर
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Delhi Blast: दिल्ली ब्लास्ट के नित नए बड़े खुलासे होते जा रहे हैं. लाल किले के पास में हुए धमाके के दौरान कार में बैठा शख्स आतंकी डॉ उमर मोहम्मद ही था. इसकी पुष्टि डीएनए टेस्ट से हो गई है. क्योंकि आतंकी डॉ उमर मोहम्मद और उसकी मां के सैंपल 100 परसेंट मैच कर रहे हैं. दिल्ली बम धमाके में आतंकी उमर मोहम्मद के चिथड़े-चिथड़े उड़ गए हैं. वहीं दिल्ली पुलिस ने 50 जगह के सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं, जिसमें डॉक्टरर उमर की गाड़ी मूवमेंट कर रही है.
इन स्थानों पर घूमता नजर आ रहा
पुलिस की मैपिंग के अनुसार, उमर ने फरीदाबाद से दिल्ली में घुसने के बाद कई इलाकों का चक्कर लगाया है. वह पहले साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में दिखा, फिर ईस्ट डिस्ट्रिक्ट, उसके बाद सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की रिंग रोड पर घूमता हुआ नजर आ रहा है. वहां से वह नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट गया, फिर अशोक विहार (नॉर्थ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट) में कुछ खाने के लिए रुका. इसके बाद वह दोबारा सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट लौटा, जहां एक मस्जिद में गया और फिर वहां से 3:19 बजे लाल किला पार्किंग एरिया पहुंचा जहां शाम करीब 7 बजे धमाका हुआ.
फरीदाबाद से फरार होने के बाद कहां गया था उमर?
जांच में यह भी सामने आया है कि धमाके से पहले उमर ने फरीदाबाद से फरार होने के बाद मेवात और फिरोजपुर झिरका तक सफर किया था. इसके बाद वह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के रास्ते वापस दिल्ली लौटा. रास्ते में उसने एक ढाबे पर रात गुजारी और कार में ही सोया. दिल्ली-मुंबई हाइवे के कई CCTV कैमरों में उसकी कार की फुटेज दिखी है, जिससे एजेंसियों ने उसकी ट्रैकिंग दोबारा कन्फर्म की.
अब संपर्कों और नेटवर्क पर नजर
दिल्ली पुलिस अब इन फुटेज की फॉरेंसिक जांच करा रही है ताकि धमाके से पहले और बाद के उसके संपर्कों का पूरा नेटवर्क सामने लाया जा सके. जांच एजेंसियों का कहना है कि उमर का यह सफर एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था ताकि वह निगरानी से बच सके और अपने अंतिम मिशन को अंजाम दे सके.
डॉ शाहीन के संपर्क में था डॉ आरिफ
मीडिया रिपोर्ट से पता चला है कि जांच एजेंसी आतंकियों के कनेक्शन पर ज्यादा काम कर रही है. जिससे देश के अंदर दहशत फैलाने वालों को आसानी से पकड़ा जा सके. अभी तक जांच एजेंसी को जो सुराख लगे हैं, उसके मुताबिक डॉ शाहीन साल 2006 से 2013 तक कानपुर मेडिकल कॉलेज में काम कर चुकी है. कानपुर मेडिकल कॉलेज और हृदय रोग संस्थान एक ही कैंपस में मौजूद है. ये भी कहा जा सकता है कि डॉक्टर शाहीन और डॉक्टर आरिफ एक ही कैंपस में रहते थे. चर्चा है कि ये दोनों लंबे समय से एक दूसरे साथ मिलकर देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े हुए थे.
अब एनक्रिप्टेड मैसेंजर ऐप इस्तेमाल की खबर
पुलिस को जांच में पता चला है कि जैश के फिदायीन मॉड्यूल के आरोपी डॉक्टर मुज़म्मिल और डॉक्टर उमर सेशन नाम के एक एनक्रिप्टेड मैसेंजर ऐप ‘सेशन’ का प्रयोग हैंडलरों से बात करने के लिए किया करते थे. इस ऐप में किसी भी यूजर को अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर की जरूरत नहीं होती है और चैट का मेटाडेटा भी सेव नहीं होता है.

