काल भैरव जयंती12 नवंबर 2025 के दिन पूजा में उनकी प्रिय चीजों का भोग अर्पित करने से दोषों का निवारण होता है. साथ ही भय, बाधा, नकारात्मता और ऋण से भी मुक्ति मिलती है.
By : पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Kaal Bhairav Jayanti 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष या अहगन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान शिव के उग्र व प्रचंड रूप की उत्पत्ति हुई थी, जिसे काल भैरव के नाम से जाता है. उनकी उत्पत्ति के दिन को हर साल इस तिथि पर काल भैरव जयंती मनाई जाने लगी. जोकि बुधवार, 12 नवंबर को है. पौराणिक आख्यानों के अनुसार अंधकासुर नामक दैत्य अपने कृत्यों से अनीति व अत्याचार की सीमाएं पार कर रहा था, यहाँ तक कि एक बार घमंड में चूर होकर वह भगवान शिव तक के ऊपर आक्रमण करने का दुस्साहस कर बैठा. तब उसके संहार के लिए शिव के रुधिर से भैरव की उत्पत्ति हुई. तभी से काल भैरव जयंती मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई. जो भक्त श्रद्धापूर्वक उनकी जयंती मनाता है. उसे मनोवांछित फल प्राप्त होता है.
काल भैरव जयंती पर क्या करें?
काल भैरव जयंती के दिन आप काल भैरव भगवान की पूजा करें और उन्हें प्रसन्न करें. इसके साथ ही आप काल भैरव जयंती पर कुछ खास उपाय कर सकते हैं. इन खास उपायों को करने से आपको खास लाभ मिलेगा. काल भैरव भगवान की पूजा से भय और शत्रुओं का नाश होता है साथ ही नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है. बता दें कि, काल भैरव भगवान शिव जी का एक उग्र और शक्तिशाली रूप हैं. इन्हें इन्हें तंत्र-मंत्र का देवता और काशी का कोतवाल भी कहा जाता है. चलिए आपको काल भैरव जयंती पर किए जाने वाले उपायों के बारे में बताते हैं.
क्या है मान्यता
भैरव बाबा की पूजा से व्यक्ति को अकाल मृत्यु, भय, शत्रु और कर्ज से मुक्ति मिलती है. काल भैरव जयंती या भैरव अष्टमी के दिन पूजा में उनकी प्रिय चीजों का भोग जरूर लगाएं.
शमी की पूजा का विधान
घर-परिवार में तनाव और पति-पत्नी के बीच झगड़े यदि हो रहे हैं तो आपको काल भैरव जयंती के दिन शमी के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए. इस उपाय को करने से रिश्तों में मिठास आती है.
मंत्र जाप करें
काल भैरव जयंती के दिन मंत्रों का जाप करना चाहिए. आप रुद्राक्ष की माला से ‘ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:’ इस मंत्र का जाप करें. इस उपाय से शत्रुओं से छुटकारा मिलेगा.
चंदन से ‘ॐ नम: शिवाय’ लिखें
21 बेलपत्रों पर चंदन से ‘ॐ नम: शिवाय’ लिखें. इसे शिवलिंग पर अर्पित करें. इससे भोलेनाथ की कृपा से भय, रोग और दोष से मुक्ति मिलेगी.
भैरव जी को कौन से भोग प्रिय हैं
इमरती जलेबी-
काल भैरव भगवान की पूजा में इमरती जलेबी का प्रमुख भोग लगाया जाता है. इमरती का भोग लगाने से काल भैरव प्रसन्न होते हैं, क्योंकि यह उनका प्रिय भोग है.
शराब-
भगवान काल भैरव को कच्ची शराब या देसी शराब का भोग भी लगाने की परंपरा है. मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकाल की नगरी में शराब का भोग आज भी लगाया जाता है. हालांकि यह रिवाज स्थानीय परंपराओं के अनुसार निभाया जाता है. शराब चढ़ाना अनिवार्य नहीं है.
काले तिल से बनी चीजें-
काला तिल या काले तिल से बनी चीजों का भोग भी काल भैरव को लगाना शुभ माना गया है. तिल से बनी मिठाई, लड्डू, रेवड़ी आदि का भोग लगा सकते है. इससे काल भैरव तो प्रसन्न होते ही हैं, साथ ही शनि ग्रह से जुड़े कष्ट भी कम होते हैं.
दही वड़ा-
ऐसी मान्यता है कि दही वड़ा का भोग लगाने से काल भैरव महाराज की उग्रता शांत होती है. साथ ही उड़द से बने दही वड़ा भोग लगाने से जीवन में संतुलन और स्थिरता बनी रहती है.
उड़द की खिचड़ी-
काले उड़द दाल से बनी खिचड़ी का भोग भी आप काल भैरव जयंती के दिन भगवान को लगा सकते है. यह भोग लगाने से इच्छाएं पूर्ण होती है और भगवान की कृपा से बिगड़े काम बनते हैं.
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