प्रयागराज के संगम तट पर गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है. 44 दिन तक चलेगा माघ मेला, 29 दिनों का होगा कल्पवास
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Magh Mela 2026: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज त्रिवेणी संगम में माघ मेले की तैयारी जोरों पर है. इस साल 2026 में माघ मेला 3 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है, जिसका समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन होगा. माघ मेले में इस बार महाकुंभ जैसा दुर्लभ संयोग बन रहा है. जिन श्रद्धालुओं को कल्पवास करना है, उनके लिए तो मां गंगा की साधना और तप लाभकारी तो है ही और जिन्होंने महाकुंभ के अवसर पर त्रिवेणी में स्नान नहीं किया है. उनके लिए यह माह अत्यंत फलदायी है.
मान्यता है कि इस महीने में जो भी लोग गंगा स्नान करते हैं, वे पाप मुक्त हो जाते हैं और जीवन में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है.
साधु-संतों की तपस्या का है महीना
माघ मेला हर वर्ष जनवरी से फरवरी माह के बीच में अक्सर पड़ता है. जिसमें साधु-संत, गृहस्थ एक साथ साधना करते हैं और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मिलन का अनुभव होता है. इस मेले में आने वाले श्रद्धालु- भक्त पूरी आस्था के साथ संगम तट पर पहुंचकर पवित्र स्नान करते हैं और भगवान के प्रति अपने भाव प्रकट करते हैं.
माघ मेला 2026 कब शुरू होगा
माघ मेला 2026 की शुरुआत तीन जनवरी से होगी और यह 15 फरवरी तक चलेगा. वैदिक पंचांग के अनुसार पौष पूर्णिमा तिथि 2 जनवरी की शाम 6.54 बजे शुरू होकर 3 जनवरी की दोपहर 3.32 बजे तक रहेगी.
मेला का पहला पवित्र स्नान और मुख्य कार्यक्रम 3 जनवरी रविवार को होगा. संगम में इस दिन हजारों श्रद्धालु स्नान करके मेला की धार्मिक शुरुआत करेंगे. इस दौरान प्रयागराज पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग जाता है और संगम तट पर हर दिन धार्मिक आयोजन होते हैं. महाकुंभ वाली छंटा देखने को मिलती है.
माघ मेला और कल्पवास का महत्व
माघ मेले में कल्पवास का ही प्रमुख महत्व है. शास्त्रों में भी इसका वर्णन है. यह माह की तपस्या अनादि काल से ऋषि मुनियों के समय से चली आ रही है. कल्पवास में श्रद्धालु पूरे एक महीना नदी के किनारे रहकर ध्यान, उपवास और पूजा करते हैं. कल्पवासी बहुत सादगी से जीवन बिताते हैं.
वे रोज सूर्योदय से पहले स्नान करते हैं, पूजा-पाठ करते हैं. ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और केवल सादा शाकाहारी भोजन करते हैं. इस साल माघ मेला 03 जनवरी 2026 से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 को समाप्त होगा. इस दौरान संगम में स्नान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है.
मेला की छह मुख्य स्नान तिथियां
- 3 जनवरी, पौष पूर्णिमा: इस दिन डुबकी लगाने के साथ मेला का शुभारंभ होगा.
- 15 जनवरी, मकर संक्रांति: सूर्य के उत्तरायण होने पर इस दिन डुबकी का विशेष महत्व है.
- 18 जनवरी, मौनी अमावस्या: यह पापों के नाश और मौन साधना का दिन होता है.
- 23 जनवरी, बसंत पंचमी: इस दिन विद्या, संगीत और कला की पूजा की जाती है.
- 1 फरवरी, माघी पूर्णिमा: दान और स्नान का श्रेष्ठ दिन. यह अत्यंत पवित्र माना जाता है.
- 15 फरवरी, महाशिवरात्रि: शिव आराधना और पवित्र स्नान के साथ इस मेला का समापन होता है.
इस बार की माघ पूर्णिमा क्यों विशेष
जिन श्रद्धालुओं ने महाकुंभ के अवसर पर त्रिवेणी में स्नान नहीं कर पाए हैं, उनके लिए माघ मेला के अवसर पर पड़ने वाली माघ पूर्णिमा भक्तों लिए वही संयोग लेकर आई है. क्योंकि एक फरवरी 2026 को ऐसा शुभ योग बन रहा है, जिसमें संगम स्नान का फल महाकुंभ स्नान के समान माना गया है. इस दिन भक्ति, दान और स्नान का विशेष महत्व है. और लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने के लिए पहुंचेंगे.
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