विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि कंपनियों, आयातकों और विदेशी निवेशकों की ओर से अमेरिकी डॉलर की मजबूत मांग ने भारतीय मुद्रा पर भारी दबाव डाला है.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Indian Currency Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले पहली बार 94 के पार (94.03) फिसलकर ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है. इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में कमजोरी के साथ रुपया 50 पैसे गिरकर बंद हुआ. इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी फंड की निकासी और भू-राजनीतिक तनाव हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां बढ़ा रहे हैं. “लुढ़कते-लुढ़कते 94.3 पर पहुंचा रुपया” का मतलब है कि भारतीय रुपये (₹) की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हो गई है—यानी ₹1 की वैल्यू गिरकर करीब ₹94 प्रति $1 तक पहुंच गई.
इसका क्या मतलब है?
पहले अगर $1 = ₹80–85 था, और अब ₹94 हो गया, तो रुपये की कद्र कम हो गई. इसे रुपये का अवमूल्यन (depreciation) कहते हैं. रुपये के गिरने के मुख्य कारण यह है कि डॉलर मजबूत हुआ है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत होने पर US Dollar की मांग बढ़ी है. तेल के दाम में भारी अंतर देखने को मिल सकता है. भारत ज्यादा तेल आयात करता है, और तेल डॉलर में खरीदा जाता है. विदेशी निवेश में कमी आएगी. क्योंकि इस दौरान बड़ी संख्या में विदेशी निवेशक पैसा निकालते हैं. देश में मुद्रास्फीति (Inflation) की नौबत आ सकती है. देश में महंगाई बढ़ने की आशंका है. वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध, आर्थिक संकट पैदा हो सकते हैं.
आम लोगों पर इसका सीधा असर
देश में महंगाई बढ़ेगी (खासकर पेट्रोल, डीज़ल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक्स), विदेश यात्रा और पढ़ाई महंगी होगी. आयातित सामान महंगा, लेकिन IT/Export सेक्टर को फायदा हो सकता है. देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहेगी. देश में आर्थिक संकट के असार देखने को मिल सकते हैं.
2025 में भी बने थे यही हालात
भारतीय रुपया कमजोर होता जा रहा है. शुक्रवार को मिड-डे ट्रेड के दौरान थोड़ी रिकवरी देखने को मिली थी, इसके बाद यह दोबारा डॉलर के मुकाबले फिसल गया. हफ्ते के पहले ही दिन यानी शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 16 पैसे टूटकर 90.11 के स्तर पर आ गया. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी इसकी मुख्य वजह मानी जा रही हैं.
डालर की मजबूत मांग
विदेशी मुद्रा कारोबारियों की मानें तो कंपनियों, आयातकों और विदेशी निवेशकों की ओर से अमेरिकी डॉलर की मजबूत मांग ने भारतीय मुद्रा पर भारी दबाव डाला है. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.07 पर खुला और बाद में गिरकर 90.11 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 16 पैसे की गिरावट दर्शाता है. गुरुवार को रुपया 89.95 पर बंद हुआ था. इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.88 पर रहा.
रुपये में क्यों है गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि, रुपये में हालिया भारी गिरावट की एक वजह अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील है. इसमें प्रगति नहीं हो रही है. इसके अलावा, घरेलू बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी रुपये को कमजोर किया है.
मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से पता चला है कि भारत के लिए यूएस फेड रिजर्व का निर्णय काफी अहम रहने वाला है, क्योंकि इसी से रुपये की दिशा और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के रुख का निर्धारण होगा. यह कहना एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. का है. हालांकि, आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव बना रह सकता है. रुपये को आरबीआई की संभावित रेपो रेट कटौती, मजबूत जीडीपी वृद्धि दर और घरेलू बाजार में बेहतर लिक्विडिटी से कुछ समर्थन मिलने की उम्मीद है.
देश में विदेशी सामग्री होगी महंगी
देश में विदेशी सामग्री महंगी हो जाएगी. Export (जैसे IT, टेक्सटाइल) करने वाली कंपनियों को फायदा हो सकता है. लेकिन आम जनता के लिए महंगाई बढ़ना बड़ा मुद्दा बन सकता है. इस पर सरकार द्वारा भरोसा दिलाया जा रहा है कि देश में आर्थिक संकट जैसी कोई स्थिति पैदा नहीं होगी. भारत में खाद्यान्न सामग्री भरपूर है. पेट्रोलियम की मात्रा भी हमारे यहां है. मोदी सरकार ने उच्च स्तरीय बैठक करते हुए सभी मंत्रियों को निर्देश भी दे दिए हैं कि कोई भी सामग्री का भंडारण न किया जाए.

