कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को है. श्रीकृष्ण की पूजा के लिए इस दिन क्या शुभ मुहूर्त है जान लें पूरी जानकारी.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Krishna Janmashtami 2026: यशोदानंदन श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर न केवल देश बल्कि विदेशों में भी बेसब्री से इंतजार रहता है. क्योंकि हिंदू धर्मावलंबियों के लिए भगवान कृष्ण आराध्य देव हैं और सभी के लिए प्रेरणादायी हैं. बाल गोपाल कृष्ण को मानने वाले भक्त व्रत, पूजा और उत्सव मनाने के लिए आतुर रहते हैं. जगह-जगह भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से सजी झांकियों का प्रदर्शन, शोभायात्रा का आयोजन होता है और श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों की साज-सज्जा प्रतियोगिता का आयोजन भी होता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण हिंदू धर्म को मानने वालों का दु:ख दूर करते हैं.
नववर्ष 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर को है. ये श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव है. जन्माष्टमी का पर्व सिर्फ आस्था का ही नहीं बल्कि भक्ति और प्रेम का प्रतीक है.
जन्माष्टमी पर पूजा का मुहूर्त
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को सुबह 2.25 पर जन्माष्टमी शुरू होगी और अगले दिन 5 सितंबर को सुबह 12.13 पर समाप्त होगी.
जन्माष्टमी निशिता पूजा का समय – रात 11.57 – सुबह 12.43, 5 सितंबर
जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र
रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ – 4 सितंबर 2026, सुबह 12:29
रोहिणी नक्षत्र समाप्त – 4 सितम्बर 2026, दोपहर 11:04
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 व्रत पारण समय
पारण समय – सुबह 06:01, सितम्बर 05 सितंबर के बाद
वर्तमान में समाज में प्रचलित पारण समय
पारण समय – देर रात 12:43, 5 सितंबर के बाद
जन्माष्टमी व्रत की सही विधि
- एकादशी उपवास में जिस प्रकार से नियम पालन किए जाते हैं. ठीक उसी प्रकार सभी नियम जन्माष्टमी उपवास के दौरान भी पालन किये जाने चाहिए.
- जन्माष्टमी के व्रत के दौरान किसी भी प्रकार के अन्न का ग्रहण नहीं करना चाहिए.
- जन्माष्टमी का व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद एक निश्चित समय पर तोड़ा जाता है जिसे जन्माष्टमी के पारण समय से जाना जाता है.
जन्माष्टी की रात क्या करें
- जन्माष्टमी की रात 12 बजे के बाद श्रीकृष्ण की मूर्ति को दूध, दही, शहद, घी और पानी से स्नान कराया जाता है.
- भगवान श्रीकृष्ण के अभिषेक के दौरान शंख बजाए जाते हैं, घंटियां बजाई जाती हैं.
- वैदिक मंत्रो का पाठ किया जाता है.
- इसके बाद भक्त श्रीकृष्ण को 56 अलग-अलग भोग अर्पित करते है.
- भगवान श्रीकृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप को झूला झुलाया जाता है.
- ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥ मंत्र का जाप कर उत्सव मनाया जाता है.
जन्माष्टमी पूजा सामग्री
जन्माष्टमी की पूजा के लिए चौकी, उस पर बिछाने वाला पीला कपड़ा, कान्हा की मूर्ति अथवा उनका चित्र या फिर लड्डू गोपाल की मूर्ति, भगवान श्री कृष्ण का श्रृंगार करने के लिए वस्त्र, मोरमुकुट, मोर पंख, बांसुरी, आभूषण, शंख, तुलसी दल, अक्षत, रोली, चंदन, केसर, पुष्प, माला, शुद्ध जल, जल रखने के लिए पात्र, कलश, गंगाजल, दूध, दही, धूप, दीप, शुद्ध घी, मक्खन, पंचामृत, धनिया पंजीरी केसर, नारियल कपूर, पान, सुपारी, मौली, शक्कर, साफ कपड़ा, कान्हा के लिए झूला, आदि रख लें.
जन्माष्टमी पर कैसे करें पूजा
जन्माष्टमी के दिन स्नान-ध्यान करने के बाद ईशान कोण में चौकी पर भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को पीला कपड़ा बिछाकर रखें. इसके स्वयं भी अपने लिए आसन बिछाएं और उस पर बैठकर सबसे पहले पवित्र जल से खुद पर और उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण पर छिड़कें. इसके बाद भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा को देखकर उनका ध्यान करते हुए पूजा को सफल बनाने की प्रार्थना करें.
इसके पश्चात् भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति या फिर लड्डू गोपाल को एक बड़े पात्र या फिर परात में रखकर पहले से तैयार किये गये दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल मिलाकर बनाए गये पंचामृत से अभिषेक करें. इसके बाद उन्हें शुद्ध जल से स्नान कराएं और साफ कपड़े से मूर्ति को पोंछकर कान्हा का वस्त्र, आभूषण आदि पहनाकर पूरा श्रृंगार करें.
कृष्ण जन्माष्टमी पूजा के नियम
- जन्माष्टमी पर पूजा करने वाले कृष्ण भक्त को तन और मन से पवित्र होकर ही पूजा करना चाहिए.
- कृष्ण के साधक को किसी देवालय में जाकर कान्हा के दिव्य स्वरूप का दर्शन करना चाहिए.
- जन्माष्टमी पर यदि किसी कारण देवालय न जा सकें या फिर घर में भी पूजा करने में असमर्थ हों तो उनकी मानसिक पूजा करें.
- किसी पर क्रोध न करें और न ही किसी के लिए मुख से अपशब्द निकालें.
- भगवान को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाने के साथ तुलसी दल अवश्य अर्पित् करें.
- जन्माष्टमी की रात भगवान श्री कृष्ण की पूजा के बाद उनके मंत्र का जाप या फिर भजन कीर्तन करें.
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

