2016 में केन्द्र सरकार ने स्मार्ट सिटी की स्थापना की थी, जिसके अंतर्गत आधुनिक तरीके से शहरी डेवलप करने का प्लॉन बनाकर उसे जमीनी स्तर पर दिखाना था.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
MP Jabalpur Smart City News: स्मार्ट सिटी का कार्यकाल करीब 2 साल पहले खत्म हो चुका है, फिर भी 26 कर्मचारी-अधिकारी पदस्थ हैं. इनके वेतन के नाम पर पिछले 2 साल में करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इन कर्मचारियों और अिधकारियों से यदि काम के बारे में पूछा जाए तो कुछ नहीं गिना पाएंगे. अधिकारी यह तर्क दे रहे हैं कि सरकार ने स्मार्ट सिटी को खत्म करने के लिए कोई आदेश नहीं दिया है, इस कारण न तो स्मार्ट सिटी को खत्म किया जा सकता और न ही यहां के कर्मचारियों को हटाया जा सकता है, जबकि स्मार्ट सिटी के पास कोई प्रोजेक्ट ही नहीं हैं. इतना ही नहीं इन कर्मचारियों के द्वारा शहर विकास का अलग से कोई प्लान तक तैयार नहीं किया जा रहा है. जानकारों का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी यहां के कर्मचारियों से अपनी पसंद का अनाप-शनाप काम करा रहे हैं. इससे साफ जाहिर हो रहा है कि इन 26 कर्मचारियों पर केवल जनता की गाढ़ी कमाई खर्च की जा रही है. इनसे आउटसोर्स कर्मचारियों की भांति काम क्यों नहीं कराया जा रहा है? यह समझ से परे है.
इन प्रोजेक्टों को अपनी शर्तों पर रख दिया गिरवी
स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने ठेका कंपनियों की मर्जी के अनुरूप शर्तें तैयार कीं और उन प्रोजेक्टों को अनलिमिटेड समय के लिए गिरवी रख दिया. चाहे राइट टाउन स्टेडियम का प्रोजेक्ट हो या फिर घंटाघर कन्वेंशन सेंटर का प्रोजेक्ट. इतना ही नहीं गुलौआताल के पास अलग से कॉफी हाउस खुलवाकर कमाई स्मार्ट सिटी के अिधकारी रखने लगे, जबकि वह जमीन नगर निगम के नाम है. इसी प्रकार घंटाघर कन्वेंशन सेंटर के अंदर हॉल, होटल, कमरों को कॉफी हाउस और जिम्नेजियम को न जाने कब दे दिया गया? कुछ पता ही नहीं चला. इसी प्रकार एक बाहरी कंपनी को मल्टीलेवल पार्किंग मेंटेनेंस के नाम पर दे दी गई. इन सभी प्रोजेक्टों से मिलने वाली राशि स्मार्ट सिटी में जमा हो रही है.
स्मार्ट सिटी के कर्मचारियों का सेटअप
कंपनी सेक्रेट्री, डाटा मैनेजर, जीआईएस एक्सपर्ट, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, प्रोजेक्ट मैनेजर, असिस्टेंट इंजीनियर-3, असिस्टेंट अर्बन प्लानर, अकाउंट ऑफिसर-2, मैनेजर ई-गवर्नेंस, इन्वायरनमेंट एण्ड सोशल सेफगार्ड ऑफिसर, प्रोग्रामर, सब इंजीनियर-5, ऑफिस मैनेजर, ऑफिस असिस्टेंट-4, आईटी अिसस्टेंट, अकाउंटेंट जैसे पद के कर्मचारी और अिधकारी पदस्थ हैं. इन पर सालाना डेढ़ करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च की जा रही है, यह वही राशि है जो जनता से टैक्स के रूप में नगर निगम वसूलता है. जनता की यही गाढ़ी कमाई लुटाई जा रही है.
स्मार्ट सिटी का कार्यकाल जून 2023 को ही समाप्त हो चुका
शहर को स्मार्ट बनाने के लिए स्मार्ट प्रोजेक्ट के तहत 2016 में निर्माण व विकास कार्य शुरू हुए, लेकिन यहां पदस्थ अिधकारी और कर्मचारी निर्धारित समय-सीमा में प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पाए. कई विकास कार्यों को एक्सटेंशन दिया गया फिर भी कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जो अधूरे हैं. जैसे स्मार्ट रोड निर्माण, भूमिगत नाली निर्माण, भूमिगत बिजली लाइन डालना, 24 घंटे सात दिन पानी योजना के कार्य एक्सटेंशन दिए जाने के बाद किसी तरह हो पाए. आज भी कई जगह भूमिगत नाली, बिजली, पानी की पाइपलाइन बिछाने के कार्य व राइट टाउन स्टेडियम के दूसरे फेज के कार्य अधूरे हैं. इतना ही नहीं यहां के कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा पुराने प्रोजेक्टों का मेंटेनेंस तक नहीं किया जा रहा है, इसी वजह से वे दुर्गति का शिकार हो रहे हैं.
पगार निकालने के लिए सरकारी दफ्तर रखे जा रहे गिरवी
स्मार्ट सिटी के इन कर्मचारियों की पगार निकालने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, क्योंकि स्मार्ट सिटी के जितने भी प्रोजेक्ट लांच किए गए हैं, वे सब नगर निगम की जमीन पर लांच किए गए हैं. इन प्रोजेक्टों से नगर निगम को आमदनी होनी चाहिए थी, लेकिन स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्टों को नगर निगम के हैण्डओवर नहीं किया जा रहा है. बल्कि उन प्रोजेक्टों को गिरवी रखकर स्मार्ट सिटी के कर्मचारियों की पगार निकाली जा रही है, क्योंकि स्मार्ट सिटी के पास उन प्रोजेक्टों को गिरवी रखने के अलावा कोई अन्य स्रोत नहीं है. क्योंकि स्मार्ट सिटी के द्वारा ऐसा कोई प्रोजेक्ट तैयार नहीं किया गया, जिसके लांच करने से लगातार कमाई हो सके.

