दिल्ली में आयोजित तकनीकी कार्यशाला में विशेषज्ञों ने सराहना की और विशेषज्ञों ने कहा जबलपुर का मॉडल कचरा प्रबंधन में मील का पत्थर साबित होगी.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
CITIIS 2.0 News : स्वच्छ भारत मिशन को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से सिटी-2.0 परियोजना लांच की गई है. जिससे जबलपुर शहर को स्वच्छता में नंबर-1 बनाने में मदद मिलेगी. इस योजना के तहत उच्च अधिकारियों और विशेषज्ञों के बीच मंथन भी शुरू हो गया है और जल्द काम भी प्रारंभ किए जाएंगे. इस परियोजना के अंतर्गत एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन किया जाएगा. CITIIS 2.0 प्रोजेक्ट के अंतर्गत मध्य प्रदेश के 2 शहर जबलपुर और उज्जैन का चयन किया गया है. जहां 18 परियोजनाओं के तहत काम कराए जाएंगे. इसके लिए केन्द्र सरकार का आवास एवं शहरी मंत्रालय वित्त की व्यवस्था करेगा. इससे जबलपुर को स्वच्छता में नंबर-1 की श्रेणी में आने के रास्ते बनेंगे. बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन को नई ऊंचाइयों देने के उद्देश्य से यह परियोजना लांच की गई है. कारण जो भी रहा हो, लेकिन जबलपुर नगर नगर निगम इस दिशा में बहुत पहले से काम कर रहा है और इसी संकल्प के साथ कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकी बदलाव की तैयारी भी कर रहा है. 28 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में सिटीज 2.0 (City Investments to Innovate, Integrate and Sustain 2.0) की दो दिवसीय तकनीकी कार्यशाला आयोजित की गई. जिसमें निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार शामिल हुए और अपने अनुभव साझा किए.
वैश्विक विशेषज्ञों के साथ मंथन
भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के उन 18 चुनिंदा शहरों ने हिस्सा लिया, जिन्हें सिटीज 2.0 के तहत चयनित किया गया है. कार्यशाला में संयुक्त निदेशक (स्मार्ट सिटी मिशन) विवेक कुमार, NIUA की निदेशक डॉ. देबोलिना कुंडू सहित यूरोपियन यूनियन, AFD और KfW के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया.
जबलपुर का अनुभव और भविष्य की योजना
कार्यशाला के दौरान नगर निगम जबलपुर के आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने शहर के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे CITIIS 2.0 के माध्यम से जबलपुर अपने वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को पूरी तरह से डिजिटल और प्रभावी बनाने जा रहे हैं. CITIIS 2.0 से प्राप्त होने वाली वित्तीय और तकनीकी सहायता हमारे शहर के लिए वरदान साबित होगी. निगमायुक्त ने कहा कि उनका लक्ष्य कचरा संग्रहण से लेकर उसके वैज्ञानिक निपटान तक एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है, जो भविष्य के स्मार्ट शहरों के लिए मिसाल बने. कार्यशाला में तकनीकी अधिकारी बालेंदु शुक्ला, गजेंद्र सिंह आदि भी शामिल हुए.
निगमायुक्त स्वच्छता और जल प्रबंधन को लेकर चिंतित
जबलपुर नगर निगम आयुक्त ऐतिहासिक संग्राम सागर झील और सूरज ताल का अभी कुछ दिनों पहले ही निरीक्षण किया था. उनके संरक्षण, स्वच्छता और सौन्दर्यीकरण के लिए ठोस रणनीति तैयार करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए थे. संग्राम सागर झील के निरीक्षण का उद्देश्य जल स्वच्छता बनाए रखना था. जिसकी नियमित साफ-सफाई कराने के बाद उसे पर्यावरण के अनुकूल बनाने के आदेश दिए गए थे. वहीं सूरज ताल का जीर्णोद्धार, अतिक्रमण हटाने और फव्वारा लगाने के निर्देश दिए गए थे. जिससे जल निकाय को पुनर्जीवित करने और इसे एक सार्वजनिक मनोरंजन स्थल में बदलने पर जोर दिया गया था.
जीरो टॉलरेंस की नीति घोषित
झील के जलग्रहण क्षेत्र (catchment area) के आसपास अवैध अतिक्रमण को हटाने के निर्देश देते हुए इस पर “जीरो टॉलरेंस” की नीति घोषित की गई. संबंधित विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे सभी अस्थायी और स्थायी अतिक्रमणों को तुरंत हटाकर झील के किनारे को मुक्त कराएं.
जल कुंभी और गाद हटाएं
निगमायुक्त द्वारा जलाशय की गहरी सफाई करने के साथ जलकुंभी, गाद (silt) और प्लास्टिक कचरे को तत्काल हटाने के निर्देश जारी किए गए थे. तालाब कैचमेंट एरिया को पक्का और सुव्यवस्थित करने के आदेश भी दिए गए थे. इतना ही नहीं पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वहां एक केंद्रीय जल फव्वारा (Fountain) लगाने की मंजूरी दी गई थी. जलाशय पर लगने वाले फव्वारे से न केवल सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि पानी में हवा (aeration) मिलाने का काम भी होगा.
समय-सीमा भी निश्चित की गई थी
जलाशय की साफ-सफाई कराने के लिए निगमायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा निर्धारित करते हुए तीन माह की अवधि निर्धारित की थी, जिसके तहत नगर निगम स्वास्थ्य विभाग से 40 अतिरिक्त सफाई कर्मी लगाकर तालाबों की साफ-सफाई कराई जा रही है.

