कठौंदा में तैयार किया जा रहा ई-बसों के लिए चार्जिंग व फायर स्टेशन, 3 महीने पहले ही तय हो चुके 12 रूट
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
PM-eBus Sewa scheme News: पीएम ई-ब सेवा स्कीम जबलपुर में लांच होने जा रही है. जिसके संचालन की जिम्मेदारी जेसीटीएसएल (जबलपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड) को मिली है. ई-बस सेवा के माध्यम से अब प्रदूषण-मुक्त, आरामदायक और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सेवा के क्षेत्र में नई क्रांति आने वाली है. शहर में 12 रूट पर ई-बसों का संचालन किया जाएगा, इसके लिए करीब 10 करोड़ रुपए सब स्टेशन, हाई टेंशन लाइन, सिविल वर्क में खर्च किए जा रहे हैं. बता दें कि जबलपुर में पीएम ई-बस योजनांतर्गत 100 ई-बसें आने वाली हैं, जिनका संचालन विगत 3 माह में शुरू हो जाएगा और ई-बसें जबलपुर की सड़कों पर दौड़ती नजर आने लगेंगी. पहली किश्त में 40 बसें जबलपुर को मिलेंगी, उसके बाद अन्य किश्तों में बसें आएंगी. ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में इसे एक नया कदम माना जा रहा है. स्वच्छ हवा, स्मार्ट सफर की ओर जबलपुर के लिए एक बड़ा कदम है.
5 से 10 मिनट के अंतराल में मिलेंगी ई-बस
जैसा कि जेसीटीएसएल के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि शहर के प्रमुख मार्गों पर 5 से 10 मिनट के अंतराल में ई-बसें उपलब्ध रहेंगी. जिससे यात्रियों को तेज, सुगम और भरोसेमंद सेवा मिलेगी, लेकिन इतने कम समय में बस स्टॉप पर एक साथ ई-बस यदि एक बस स्टॉप पर ठहर जाती हैं तो जाम के हालात भी बन सकते हैं. पुराने बस स्टैण्ड के सामने नगर निगम मुख्यालय के पास बने बस स्टॉप के हालात देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. इस ओर भी अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है. क्योंकि अभी जितनी मेट्रों का संचालन हो रहा है, वे मेट्रो बसें एक साथ एक ही जगह आकर घंटो खड़ी रहती हैं.
ई-रिक्शा, ऑटो की धमाचौकड़ी से मिलेगी निजात
ननि के द्वारा शुरू की जा रहीं ई-बसों से न केवल शहर का यातायात व्यवस्थित होगा, बल्कि यात्री सस्ती दर पर यात्रा भी कर सकेंगे. अभी शहर के हर चौराहे-तिराहे पर ई-रिक्शा और ऑटो वालों की धमाचौकड़ी मची रहती है. इनसे निजात भी मिल सकती है. हालांकि इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों को ई-रिक्शा और ऑटो वालों से समन्वय बनाकर रूट का निर्धारण करने की जरूरत है, जो एक बार पहले भी हो चुका है. जिससे न केवल ई-बसों को सवारी मिल सकें, बल्कि जो ई-रिक्शा या ऑटो वाले जो अपनी जीविका आटो से ही चलाते हैं, उनका भी रोजगार बना रहे. हलांकि इन आटो और ई-रिक्शा वालों को प्रशिक्षित करने के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट का पाठ पढ़ाने की जरूरत है.
शहर के बीच से चलने वाली बसों को अब रोकने की जरूरत
नगर निगम अधिकारियों ने मुख्य बस स्टैण्ड नगर निगम और क्षेत्रीय बस स्टैण्ड से बसों का संचालन बहुत पहले रोक दिया गया था. इसके बावजूद इन दोनों बस स्टैण्ड से दबंग बस संचालकों की बसों का संचालन इन्हीं बस स्टैण्ड से हो रहा है. अब जब ई-बसों का संचालन शहर के अंदर होने लगेगा. ऐसी स्थिति में मुख्य बस स्टैण्ड नगर निगम, क्षेत्रीय बस स्टैण्ड दमोहनाका, आदि शंकराचार्य चौक गोरखपुर, पिसनहारी की मढ़िया गढ़ा में खड़ी हो रहीं बसों पर लगाम लगाने की जरूरत है. क्योंकि इन्हीं अवैध बस स्टैण्ड के कारण सड़क पर जाम के हालात बन रहे हैं.
कार्य की लागत
सब स्टेशन
2.25 करोड़
हाई टेंशन लाइन
2.7 करोड़
सिविल वर्क
4 करोड़
वॉल, डिपो बना था
6 करोड़
शहर के इन प्रमुख मार्गों पर होगा संचालन
संख्या रूट
ई-1 मदर टेरेसा से रांझी, घाना (वाया घमापुर)
ई-2 करमेता से रांझी (वाया कांचघर)
ई-3 पनागर से दमोह नाका
ई-4 पनागर से घमापुर
ई-5 आईएसबीटी से बरेला, शारदा मंदिर
ई-6 आईएसबीटी से भेड़ाघाट
ई-7 आईएसबीटी से गौरीघाट
ई-8 रेलवे स्टेशन से भेड़ाघाट
ई-9 आईएसबीटी से बरगी डैम
ई-10 आईएसबीटी से शहपुरा
ई-11 रेलवे स्टेशन से पाटन
ई-12 आईएसबीटी से एयरपोर्ट (वाया यूनिवर्सिटी)
क्या-क्या काम हो रहे
- > एडमिनफर्स्ट फ्लोर
- > फायरटैंक
- > चार्जिंगके सिविल वर्क
- > वर्कशॉपका निर्माण
- > एक्स्ट्रारूम का मेंटेनेंस
- > रिमझा से कठौंदा तक साढ़े 3 किमी दूर से हाई टेंशन लाइन आ रही
ई-बस में सुविधाएं एवं सुरक्षा के इंतजाम
- > डिजिटल पेमेंट एवं ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन
- > सीसीटीवी कैमरे एवं पैनिक बटन
- > जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम
- > पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम
- > रियल-टाइम पब्लिक इन्फर्मेशन डिस्प्ले
- > ई-बसें सिंगल एवं ऑपर्च्युनिटी चार्जिंग से प्रतिदिन लगभग 180 किमी का संचालन करेंगी.

