आज 14 अप्रैल को खरमास खत्म, यानी 14 अप्रैल को सुबह 11:45 बजे, मंगलवार के दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर रहा है. विवाह के मुहूर्त 19 अप्रैल से हैं.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Kharmas 2026 End, Vivah Muhurat: हिंदू पंचांग के अनुसार आज 14 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर चुका है. इस परिवर्तन के साथ ही शादियों का दौर फिर प्रारंभ होने जा रहा है. लेकिन इसके लिए अभी 5 दिन का इंतजार करना होगा. क्योंकि पंचक होने की वजह से मांगलिक कार्य नहीं होंगे. आपको बतादें कि खरमास खत्म होते ही विवाह, देव प्रतिष्ठा, नूतन गृह निर्माण, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं. 15 मार्च से लगे खरमास आज 14 अप्रैल को खत्म हो चुके हैं. अब मांगलिक कार्यक्रम के लिए रास्ता साफ हो चुका है.
सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही शुरू हो जाते हैं मांगलिक कार्यक्रम
ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार जब सूर्य मीन राशि में होते हैं तब इन दिनों किसी भी तरह के शुभ काम नहीं किए जाते हैं. इस दौरान सिर्फ जप, तप और स्नान-दान करने का विधान है. लेकिन 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया के अवसर पर अबूझ मुहूर्त है, जिसमें बिना पंचांग देखे विवाह किए जा सकते हैं. इसमें पंचक का महत्व भी नहीं होता है. वहीं मई का महीना भी शादियों के लिए काफी अच्छा रहेगा. इस दौरान गुरु और शुक्र की स्थिति अनुकूल रहने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है.
चातुर्मास 2026 प्रारंभ होते ही फिर लगेगा ब्रेक
आज 14 अप्रैल 2026 से वैवाहिक कार्यक्रम पुनः शुरू हो रहे हैं, जो चातुर्मास के प्रारंभ होने से पहले तक जारी रहेंगे. चातुर्मास देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होते हैं. देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह होता है. इसी के साथ ही पुन: मांगलिक शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं. देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को पड़ेगी. इसलिए, 25 जुलाई से 20 नवंबर 2026 के बीच एक बार फिर मांगलिक कार्यक्रमों पर ब्रेक लग जाएगा, कोई भी शुभ कार्य नहीं होंगे.
अप्रैल माह में विवाह के शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 19 अप्रैल से 29 जून तक विवाह के लिए कुल 24 मुहूर्त हैं. अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा. इस दिन अबूझ मुहूर्त होने के कारण किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है.
17 मई से 15 जून तक अधिक मास
यहां हम बतादें कि 17 मई से 15 जून तक अधिक मास रहेगा, जिसके चलते करीब एक माह तक विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा. इसी कारण अक्षय तृतीया से पहले और इसी दिन बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित किए जाएंगे. इन तीन माह में विवाह समारोह आयोजित किए जाएंगे.
गृह प्रवेश विवाह और शुभ काम
खरमास यानी मीन मास खत्म हो जाने के बाद से 16 संस्कार सहित अन्य शुभ मांगलिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं. शुभ मुहूर्त और शुभ दिन में अन्नप्राशन, नामकरण, चूड़ाकर्म, विद्यारंभ और अन्य शुभ काम किए जा सकते हैं. सूर्य के मेष राशि में आते ही गृह प्रवेश और विवाह के भी मुहूर्त हैं. अब देवगुरु बृहस्पति भी खुद की राशि यानी मीन में आ गए हैं. जिससे हर मांगलिक कामों में गुरु का बल और बढ़ जाएगा.
मांगलिक कार्यक्रम की शुरुआत
मेष संक्रांति सिर्फ खगोलीय घटना नहीं है. यह नए मंगल कार्यों की शुरुआत का संकेत है. जैसे ही सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, मांगलिक कार्यों पर लगी रोक अपने आप हट जाती है और विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार जैसे आयोजनों की शुरुआत फिर से हो जाती है. यदि आप भी लंबे समय से कोई मांगलिक कार्यक्रम करने की योजना बनाकर बैठे हैं तो अब समय आ गया है कि आप भी इन तिथियों में अपना मांगलिक कार्य संपन्न कर सकते हैं.
विवाह के लिए क्या है अबूझ मुहूर्त
हिंदू धर्म की मान्यता है कि विवाह और सगाई जैसे मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त को शुभ माना जाता है. अगर किसी के विवाह की तारीख नहीं निकल पा रही है या फिर किसी कारण से शुभ मुहूर्त वाले दिन विवाह करना संभव ना हो तो अबूझ मुहूर्त में भी विवाह किया जा सकता है. धर्मग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया, बसंत पंचमी और देव प्रबोधिनी एकादशी को अबूझ मुहूर्त माना गया है.
अप्रैल से दिसंबर 2026 शादी के मुहूर्त
अप्रैल 2026 – 19, 20, 21, 25, 26, 27, 28 और 29 अप्रैल
मई 2026 – 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14 मई
जून 2026 – 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29 जून
जुलाई 2026 – 1, 6, 7, 11 जुलाई
नवंबर 2026 – 21, 24, 25 और 26 नवंबर
दिसंबर 2026 –2, 3, 4, 5, 6, 11 और 12 दिसंबर
( कुछ पंचांग में भेद होने के कारण तिथि घट बढ़ सकती है और परिवर्तन हो सकता है. )
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