प्रतिभावान खिलाड़ियों के साथ छलावा कर रहे स्मार्ट सिटी के जिम्मेदार
BY : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Smart City. Jabalpur News : जनता के हितों काे ध्यान में रखकर शहर विकास के नाम पर केन्द्र सरकार द्वारा भेजी गई अनुदान राशि से राइट टाउन स्टेडियम का जीर्णोंद्धार कराया गया है. जनता सरकार को टैक्स के रूप में जो राशि दे रही है। जनता की उसी गाढ़ी कमाई को केन्द्र सरकार ने अनुदान के रूप में स्मार्ट सिटी को दिया है, जिससे राइट टाउन स्टेडियम का जाीर्णोद्धार हुआ है.
अब स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने मनमाने तरीके से राइट टाउन स्टेडियम को 15 साल के लिए एक निजी कंपनी के हाथों “गिरवी’ सा रख दिया और वह निजी कंपनी खिलाड़ियों से अनाप-शनाप वसूली शुरू कर दी है। इतना ही नहीं प्रतिदिन घूमने-फिरने वालों से भी 590 रुपए अवैध रूप से वसूल किए जा रहे हैं, जबकि खेलकूद की जगह पर शुल्क वसूली का प्रावधान नहीं है। इसके बाद भी ठेका कंपनी गरीब, असहाय प्रतिभावान खिलाड़ियों और प्रतिदिन टहलने आने वालों से अवैध वसूली कर रही है।
कॉलोनाइजर पर लगाम और खुद ‘बे-लगाम’
शहर में कोई भी कॉलोनाइजर यदि कॉलोनी काटता है तो उसके लिए नगर निगम में बाकायदा नियमावली बनी हुई है। कॉलोनाइजर के लिए खेल का मैदान, स्कूल, गार्डन, फुटपाथ, नाली, सड़क, बिजली आदि की सुविधाएँ विकसित करने की शर्त होती है, तभी नक्शा पास हो पाता है, लेकिन नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अिधकारी खुद बेलगाम हैं। नगर निगम सीमा में कहीं पर भी जनता के पैदल चलने के लिए खुली जगह नहीं है, फुटपाथ पर कब्जा है, सड़कों पर गड्ढे हैं, गार्डनों से हरियाली गायब है, स्कूल के हालात से पूरा शहर परिचित है। जिस गार्डन व स्टेडियम को जनता की गाढ़ी कमाई के पैसों से सँवारा गया है, उस स्टेडियम से अवैध वसूली शुरू हो गई है। ऐसे में आम आदमी कहाँ जाए, यह समझ से परे है।
15 साल के लिए “गिरवी’ रख दिया स्टेडियम
स्मार्ट सिटी के अिधकारियों ने ठेका कंपनी से साँठगाँठ करके 85 करोड़ की लागत से बने राइट टाउन स्टेडियम को 15 साल के लिए “गिरवी’ रख दिया है, जबकि स्मार्ट सिटी या फिर किसी भी सरकारी विभाग के अिधकारी का कार्यकाल 3 साल से ज्यादा का नहीं होता है। यानी नए अिधकारी के लिए नए तरीके से काम करने के लिए कोई विकल्प ही नहीं छोड़ा गया है। नया अिधकारी किस नई सोच के साथ स्टेडियम का संचालन करेगा, उसे अपने विवेक का इस्तेमाल करने के लिए कोई जगह ही नहीं छोड़ी गई है। शहर की सौगात के साथ मनमाने तरीके से अिधकारी और ठेका कंपनियाँ मिलीभगत करके एग्रीमेंट कर रहे हैं, यह जाँच का विषय बन गया है।
इसी कारण शहर से नहीं निकल पा रहे प्रतिभावान खिलाड़ी
देश और प्रदेश स्तर पर प्रतिभावान खिलाड़ियों की खोज की जा रही है, जिला और ब्लॉक स्तर पर वार्षिक खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित कराई जाती हैं, लेकिन शहर से एक भी प्रतिभावान खिलाड़ी निकलकर देश का परचम नहीं लहरा पाया, क्योंकि गरीब प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए खेल का अभ्यास करने कहीं भी मैदान नहीं हैं। शहर में एक राइट टाउन स्टेडियम का निर्माण किसी तरह से सरकार के अनुदान से हुआ है, तो उसे भी निजी हाथों में सौंप दिया गया है और उस जगह भी मनमानी अवैध वसूली शुरू हो गई है। ऐसे में शहर से प्रतिभावान खिलाड़ी कैसे निकल पाएँगे, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।
खेल के रेट का निर्धारण (माहवार)
- खेल रेट
- राइफल शूटिंग 8000 रुपए
- स्नूकर 6000 रुपए
- पूल 5000 रुपए
- स्क्वाश 4000 रुपए
- क्रिकेट 3000 रुपए
- तीरंदाजी 3000 रुपए
- बैडमिंटन 2500 रुपए
- डांस 2000 रुपए
- फुटबॉल 2000 रुपए
- बॉक्सिंग 2000 रुप
- टेबल टेनिस 2000 रुपए
- ताईक्वान्डो 2000 रुपए
- योग 1500 रुपए
- जुम्बा 1500 रुपए
- बास्केटबॉल 1200 रुपए
- कराटे 1000 रुपए
- मलखंब 1000 रुपए
- टहलने, एथलीट 590 रुपए



