हिन्दू एकता पदयात्रा के समापन अवसर पर संत रामभद्राचार्य ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजा खूनी हो गया इसका प्रमाण मिल गया.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Rambhadracharya On Congress: “पंजा खूनी हो गया है, प्रियंका गांधी के वायनाड से चुनाव जीतने के बाद उनके सम्मान में निर्दोष गाय को गोली मार दी गई. जो लोग अहिंसा की दुहाई देते हैं, उनके शासन में ऐसा होता है.” उक्त उद्बोधन मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा आयोजित हिंदू एकता पदयात्रा के समापन अवसर पर शुक्रवार (29 नवंबर,2024) को ओरछा में दिया. इस दौरान प्रसिद्ध संत रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में कांग्रेस और प्रियंका गांधी पर जमकर हमला बोला. उन्होंने अपने संबोधन में हिंदू एकता, तुष्टिकरण की राजनीति और धार्मिक अस्मिता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बता कही.
संत रामभद्राचार्य ने इस घटना को हिंदू संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ बताया. उन्होंने कांग्रेस पर हिंदुओं की उपेक्षा और तुष्टिकरण की राजनीति करने का भी आरोप लगाया है.वहीं, हिंदू एकता को समय की मांग बताते हुए कहा कि यह पदयात्रा केवल शुरुआत है. उन्होंने इसे धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है.
‘जो मंदिरों पर दावा करेंगे उन्हें मिलेगा जवाब’
उन्होंने कहा “जो हिंदू हित की बात करेगा, वही भारत पर राज करेगा, अब हिंदू को न तो बांटना है और न ही काटना, जो हमारे मंदिरों पर दावा करेंगे, उन्हें जवाब मिलेगा. हिंदू एकता के इस आंदोलन को बटवृक्ष की तरह इतना बड़ा बनाया जाएगा कि हर समुदाय और व्यक्ति को इस पर विचार करना पड़ेगा”.
तुष्टिकरण की राजनीति का विरोध
संत रामभद्राचार्य ने तुष्टिकरण की राजनीति की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हिंदू धर्म और उससे जुड़े प्रतीकों को अपमानित करते हैं. उन्होंने कहा कि गाय, गंगा और भारत माता को गाली देने वाले कभी हमारे हो ही नहीं सकते. तुष्टिकरण की यह राजनीति अब बंद होनी चाहिए.
नए नारों की शुरुआत
अपने संबोधन में उन्होंने “ओम शांति” की जगह “ओम क्रांति” का नारा देने की बात कही. उनका कहना था कि हिंदुओं को अब शांत रहने के बजाय अपने अधिकारों और अस्मिता के लिए खड़ा होना चाहिए.”अब ‘ओम शांति’ नहीं, ‘ओम क्रांति’ का समय है. जो हिंदू एकता को तोड़ने की कोशिश करेगा, उसे सबक सिखाया जाएगा.”
हिंदू समाज की एकता और सांस्कृतिक पहचान बनाने की आवश्यकता
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि देश में हिंदू समाज की एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की आवश्यकता है, और इस संदर्भ में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नीतियों और रुख पर सवाल उठाए. उन्होंने कांग्रेस पर हिंदू हितों की अनदेखी करने और विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने जैसे आरोप लगाए.
यह बयान उस कार्यक्रम के समापन पर दिया गया, जिसे “हिंदू एकता पदयात्रा” के नाम से आयोजित किया गया था और जिसका उद्देश्य धार्मिक-सांस्कृतिक एकता का संदेश देना बताया गया. अगर आप चाहें तो मैं इस पूरे विवाद का राजनीतिक संदर्भ या पदयात्रा का उद्देश्य भी विस्तार से समझा सकता हूँ.
कांग्रेस को क्यों बना रहे निशाना
पहला कारण वैचारिक अंतर है. रामभद्राचार्य हिंदू धर्म, सनातन परंपरा और हिंदू एकता के मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं. कई बार वे ऐसी पार्टियों की आलोचना करते हैं जिनकी नीतियों को वे “धर्मनिरपेक्ष राजनीति” या हिंदू हितों से कम जुड़ा हुआ मानते हैं. इसी वैचारिक अंतर के कारण कांग्रेस पर टिप्पणी सामने आती है.
दूसरा कारण राजनीतिक वातावरण है. “हिंदू एकता पदयात्रा” जैसे आयोजनों में अक्सर धार्मिक-सांस्कृतिक एकता और पहचान को केंद्र में रखा जाता है. ऐसे मंचों से दिए गए भाषणों में राजनीतिक आलोचना भी शामिल हो जाती है, खासकर विपक्षी दलों की.
तीसरा कारण ऐतिहासिक और राजनीतिक धारणा है. कुछ धार्मिक नेता और संगठन यह मानते हैं कि कांग्रेस की नीतियाँ अतीत में और वर्तमान में भी अलग-अलग समुदायों को संतुलित करने पर अधिक केंद्रित रही हैं, जिससे वे असंतोष व्यक्त करते हैं.
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह उनकी व्यक्तिगत और वैचारिक राय होती है, और इस पर राजनीतिक मतभेद भी स्वाभाविक रूप से मौजूद रहते हैं.
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