15 दिसंबर को धनु राशि में सूर्य गोचर करेंगे. इस दिन से ही खरमास लग जाएगा. खरमास में सूर्यदेव कमजोर होते हैं, अशुभ असर के कारण नौकरी और बिजनेस में रुकावटें आती हैं.
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By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Kharmas 2024: ग्रहों के राजा सूर्य का वृश्चिक से धनु राशि में प्रवेश 15 दिसंबर को रात 9.56 बजे होगा. इसके साथ ही भगवान विष्णु के प्रिय धनुर्मास (खरमास) की शुरुआत होगी. इस दौरान सूर्य के कमजोर पड़ने से विवाह, मुंडन सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लगेगा. जबलपुर शनि मंदिर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा बताते हैं कि सूर्य देव हर माह राशि परिवर्तन करते हैं. ज्योतिष में सूर्य देव को ग्रहों का राजा, पिता और आत्मा का कारक ग्रह माना गया है. सूर्य के राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों पर पड़ता है. सूर्य देव 15 दिसंबर को गुरु के स्वामित्व वाली राशि धनु में प्रवेश करेंगे. सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने से कुछ राशि वालों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ेगा. सूर्य देव एक माह तक धनु राशि में रहेंगे. इसके बाद 14 जनवरी 2025 को सुबह 9:04 मिनट पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे.
नौकरी और बिजनेस में रुकावटें आती हैं
ज्योतिर्विज्ञान में सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है. सूर्य के शुभ असर से सेहत संबंधी परेशानी दूर होती है. आत्मविश्वास बढ़ता है. सरकारी काम पूरे हो जाते हैं. जॉब और बिजनेस में तरक्की मिलती है. बड़े लोगों और अधिकारियों से मदद मिलती है और सम्मान भी बढ़ता है. सूर्य के अशुभ असर के कारण नौकरी और बिजनेस में रुकावटें आती हैं. नुकसान भी होता है. बड़े लोगों से विवाद हो सकता है. आंखों से संबंधित परेशानी होती है. सिरदर्द भी होता है. कामकाज में रुकावटें आती हैं. विवाद और तनाव भी रहता है. सूर्य हर माह में राशि परिवर्तन करते हैं. सूर्य देव को ज्योतिष में विशेष स्थान प्राप्त है. सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने से कुछ राशि वालों का सोया हुआ भाग्य भी जाग जाएगा. ज्योतिष में सूर्य को एक महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है. सूर्य को आत्मा और पिता का कारक भी कहा गया है. सूर्य शुभ होने पर व्यक्ति को उच्च पद की प्राप्ति होती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य को सिंह राशि का स्वामी माना गया है. मेष इसमें उच्च माना जाता है. वहीं सूर्य तुला राशि में नीच का हो जाता है.
सूर्य का गोचर
सूर्य एक राशि में लगभग 30 दिनों तक रहता है. फिर सूर्य दूसरी राशि में गोचर करता है. 30 दिनों के बाद 12 राशियां बदलने का मतलब है कि सूर्य का पारगमन एक कैलेंडर वर्ष में 12 बार होता है. सूर्य के गोचर का प्रभाव आपकी चंद्र राशि पर निर्भर करता है. मूल रूप से जन्म के चंद्रमा से तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में स्थित सूर्य जातक को अच्छे परिणाम देता है. लेकिन अन्य भावों में सूर्य जातक को प्रतिकूल परिणाम दे सकता है. सूर्य अधिकार, शक्ति, पिता और सम्मान का ग्रह होने के कारण करियर और वैवाहिक जीवन पर एक अलग प्रभाव डालता है जहां जातक को करीबी लोगों के साथ बातचीत करनी होती है. सूर्य का सकारात्मक गोचर सभी रिश्तों और कार्यस्थलों में दूसरों पर बढ़त हासिल करने में असाधारण परिणाम दे सकता है. उसी प्रकार सूर्य का प्रतिकूल गोचर जातक को कमजोर और दूसरों के दबाव के आगे झुक सकता है.
ये हैं उपाय
भगवान श्री विष्णु की उपासना करें. बंदर, पहाड़ी गाय या कपिला गाय को भोजन कराएं. रोज उगते सूर्य को अर्घ्य देना शुरू करें. रविवार के दिन उपवास रखे. रोज गुढ़ या मिश्री खाकर पानी पीकर ही घर से निकलें. जन्मदाता पिता का सम्मान करें, प्रतिदिन उनके चरण छुकर आशीर्वाद लें. भगवान सूर्य की स्तुति आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें.
सूर्य गोचर होने पर क्या करें?
- सुबह सूर्य को अर्घ्य दें- प्रतिदिन (विशेषकर गोचर के दिन) तांबे के लोटे से जल में लाल फूल/रोली डालकर सूर्य को अर्घ्य दें.
- “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र जप- 108 बार या कम से कम 11 बार जप करने से मन और आत्मबल मजबूत होता है.
- पिता और वरिष्ठों का सम्मान करें- सूर्य पिता, आत्मा और अधिकार का कारक है—इस समय पिता-गुरु का सम्मान करने से सकारात्मक फल मिलता है.
- तामसिक चीजों से बचें- इस दिन या गोचर काल में शराब, झूठ, क्रोध और अहंकार से बचने की सलाह दी जाती है.
- लाल वस्तुओं का दान- गुड़, गेहूं, लाल कपड़ा या तांबा दान करना शुभ माना जाता है.
- आत्मचिंतन करें- सूर्य गोचर समय जीवन में लक्ष्य, करियर और आत्मविश्वास पर काम करने के लिए अच्छा माना जाता है.
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