प्रोजेक्ट लॉन्च करने के लिए केन्द्र सरकार से मिली थी राशि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने टेंडर तक निकाल दिया था.
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
India’s CITIIS 2.0 program for sustainable urban development: सिटी-2.0 के अंतर्गत केन्द्र सरकार से मिली 7 करोड़ रुपए की अनुदान राशि वापस होगी. इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी में स्वास्थ्य विभाग का काम देख रहे अिधकारियों को पत्र भी लिखा जा चुका है. यह राशि दोबारा फिर से कब जारी की जाएगी, इसकी कोई अधिकृत जानकारी सिटी-2.0 के अंतर्गत काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को भी नहीं है. बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत गार्बेज प्वॉइंट, गीला-सूखा कचरा संग्रहण आदि का कार्य कराने के लिए यह राशि आई थी, इन कामों को कराने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो गई थी, लेकिन केन्द्र सरकार में अचानक हुए फेरबदल के चलते इस प्रोजेक्ट का काम देखने वाले अधिकारियों ने दिलचस्पी दिखाना बंद कर दिया और इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डालने की भी चर्चा गर्म है. हकीकत क्या है ये तो सिटी-2.0 का काम देखने वाले जिम्मेदार और केन्द्र सरकार में इस प्रोजेक्ट का काम देख रहे अधिकारी ही जानें, लेकिन जो हालात देखने को मिल रहे हैं, उससे तो यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.
डेढ़ साल से ज्यादा वक्त गुजर गया
नगर निगम स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत स्वच्छता का काम देखने वाले अिधकारियों ने इस प्रोजेक्ट पर मन लगाकर काम नहीं किया, जिसके कारण प्रोजेक्ट लॉन्च करने में देरी हुई और इस प्रोजेक्ट को गति नहीं मिल सकी. इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत जो भी काम होने थे, वे डेढ़ साल पहले शुरू हो जाने थे. लेकिन टेंडर प्रक्रिया और काम की मंथरगति के चलते इस प्रोजेक्ट को गति नहीं मिल सकी.
सीआईटीआईआईएस 2.0 के अंतर्गत चयन
स्मार्ट-सिटी योजना के तहत ही आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा फ्रंच डेवल्पमेंट एजेंसी (ADF), यूरोपियन एवं भारत सरकार की अधिकृत एजेंसी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयस् (NIUA) के साथ मिलकर ‘द सिटी इन्वेस्टमेंट्स टू इनोवेट, इंटीग्रेट एंड सस्टेन’ (सीआईटीआईआईएस 2.0) प्रोग्राम के कम्पोनेन्ट-1 में राज्य के 2 स्मार्ट सिटी शहर उज्जैन एवं जबलपुर का चयन किया गया. केन्द्र सरकार की इस योजना के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित कार्यों के लिये चयनित प्रत्येक शहर को 135 करोड़ रूपये की अनुदान राशि मिलनी थी. जिसकी पहली किश्त 7 करोड़ रुपये के रूप मे मिली थी.
सिटी-2.0 के अंतर्गत होने वाले कार्य
- शहर के एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन (इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) कार्य को सुदृढ़ करने कार्य किया जाना है.
- कचरा कलेक्शन से उसके डिस्पोजल साइक्लिंग तक की कमियों को चिन्हित किया जाएगा.
- शहर के नागरिकों के लिए स्वच्छता एवं सफाई व्यवस्था से संबंधित कार्य किए जाएंगे.
- कचरा संग्रहण के वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी और प्रतिदिन घर-घर से कचरा संग्रहित किया जाएगा.
- कचरा कलेक्शन के उपरांत उसके निपटान के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे.
- सफाई व्यवस्था के निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा.
- प्लास्टिक, ई-कचरा और ऑर्गेनिक वेस्ट के लिए अलग-अलग पुनर्चक्रण सुविधा विकसित की जाएंगी.
- जैविक कचरे से बायो सीएनजी गैस एवं खाद तैयार की जाएगी.

