जबलपुर में बने इस फ्लाईओवर में इंजीनियरिंग की सारी विधाएं देखने को मिलेंगी, जानें मदन महल से दमोहनाका तक बने फ्लाईओवर की खासियत
By: DB news update/edited by -prince awasthi
Flyover MP Jabalpur. मध्य प्रदेश सका सबसे लंबा फ्लाईओवर जबलपुर में बनकर तैयार हो चुका है. इस फ्लाईओवर में इंजीनियरिंग की सारी विधाओं का प्रयोग किया गया है. नए इंजीनियरों को सीखने और समझने का सबसे अच्छा प्रोजेक्ट है. इस फ्लाईओवर की खासियत देश के मेट्रो शहरों पर ही देखने को मिलती है. लेकिन जबलपुर का यह फ्लाईओवर इस समय सबसे ज्यादा चर्चित है. इस फ्लाईओवर के हिस्से पर बने केबिल स्टे ब्रिज, बो स्टिंग ब्रिज, स्टील ब्रिज और मदन महल दमशमेश चौक की रोटरी हर किसी को आकर्षित कर रही है.
यहां की कारीगरी देखकर हर कोई देखने के लिए ठहर जाता है. हलांकि इंजीनयरिंग की शिक्षा-दीक्षा लेने वाले भावी इंजीनियरों के लिए यहां की हर नई विधा को सिखाने का अच्छा मौका था, लेकिन यहां के इंजीनिरिंग कर रहे छात्रों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई और टेक्नॉलॉजी सीखने से वंचित रह गए.
MP के सबसे बड़े फ्लाईओवर की खासियत
निर्माण कंपनी की आधुनिक लैब
फ्लाईओवर निर्माण कंपनी की अत्याधुनिक टेस्टिंग लैब के सामने सरकारी और निजी कंपनियों की टेस्टिंग लैब भी कमजोर रही. यहां की टेस्टिंग लैब में स्वाइल टेस्ट से लेकर अन्य गुणवत्ता मापक यंत्र अपने आप में चर्चा का विषय बने रहे.
बो-स्टिंग ब्रिज
दमोहनाका से मदन महल के बीच रानीताल और बल्देवबाग पर बो-स्टिंग ब्रिज का निर्माण किया गया है. ये दोनों ब्रिज पूरी तरह से स्टील से बनाए गए हैं. ये ब्रिज 70 टन वजन को झेलने की क्षमता रखते हैं. इंजीनियरों का दावा है कि जबलपुर में आने वाले सामान्य भूकंप के झटकों को फ्लाईओवर पूरी तरह से झेलने की ताकत रखता है.
56 गर्डर लोड रोटरी
मदन महल दशमेश चौराहे के पास फ्लाईओवर की रोटरी तैयार की जा रही है, जिसमें 56 गर्डर लोड किए गए हैं. जिनकी भार क्षमता 70 टन है. इससे भारी भरकम वाहन भी फ्लाईओवर की इस रोटरी से होकर गुजर सकते हैं. हाईटेक हाइड्रोलिक क्रेन व अन्य सपोर्टिंग मशीनों के जरिए गर्डर रोटरी में लोड किए गए हैं. जबलपुर में पहली बार फ्लाईओवर व हाईटेक मशीनों से निर्माण किया गया है.
केबल स्टे ब्रिज
रेलवे स्टेशन मदन महल के ऊपर 196 मीटर का पहला बड़ा स्पॉन बनाया गया है. इसके साथ 90-90 मीटर के दो और स्पॉन निर्माणाधीन हैं. जिन्हें मिलाकर केबल स्टे ब्रिज की कुल लंबाई 376 मीटर है. केबल स्टे ब्रिज की निर्माण लागत 40 करोड़ के लगभग है. केबल स्टे ब्रिज के ऊपर आवाजाही मार्ग 36 फीट के लगभग चौड़ा बनाया गया है.
205 पायलान का निर्माण
सात किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के बीच में 205 पायलान खड़े किए गए हैं. इन पायलान के निर्माण में बोरिंग करने से लेकर उन्हें आपस में जोड़ने की विधा अपने आप में एक आधुनिक तकनीक है. इस विधा को युवा इंजीनियरों को सीख सकते हैं.
एक नजर में फ्लाईओवर की जानकारी
- – नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी ठेका कंपनी द्वारा मदन महल से दमोहनाका तक फ्लाईओवर का निर्माण किया गया है.
- – 900 मीटर दमोहनाका की ओर लंबाई बढ़ाई गई है. इसकी लागत 78 करोड़ है.
- -749 करोड़ की निर्माण की लागत पहले फेज के लिए रखी गई थी.
- -6.8 किमी फ्लाईओवर का निर्माण एरिया है.
- -36 फीट ऊपरी हिस्से की सड़क बनाई गई है.
- -36-36 फीट नीचे के हिस्से में दोनों ओर सड़क बना गई है.
- -182 कुल पिलर बनाए गए हैं.
- -192 मीटर का केबल स्टे ब्रिज मदन महल स्टेशन के ऊपर बनाया गया है.
- -सीवर लाइन, पेयजल पाइप और डिवाइडर का निर्माण आधुनिक तरीके से कराया गया है.

