मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है, जोकि आज रविवार 15 दिसंबर 2024 को है. मान्यता है कि इसी दिन देवी पार्वती का प्राकट्य अन्नपूर्णा के रूप में धरती पर हुआ था.
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By : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
Annapurna Jayanti 2024: घर पर सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए आज अन्नपूर्णा जयंती पर पूजा-पाठ के साथ ही आप कुछ उपाय भी जरूर करें. इससे रसोईघर का अन्न भंडार सदा भरा रहेगा और कभी खाने-पानी में कमी नहीं होगी. मां अन्नपूर्णा को अन्न की देवी कहा जाता है. इसलिए हिंदू धर्म में अन्न को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने का विधान है. अन्नपूर्णा जयंती पर घर में लोग देवी अन्नपूर्णा की पूजा अराधना करते हैं और धन-धान्य का आशीर्वाद पाते हैं.
आइये जानते हैं अन्नपूर्णा जयंती पर आज किन उपायों को करें.
- ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा के अनुसार अन्नपूर्णा जयंती पर चूल्हा पूजन जरूर करें. साथ ही रोटी बनाकर तीन रोटी पहले निकाल लें, जिसमें पहली रोटी गाय को खिलाएं और दूसरी रोटी कुत्ते को और तीसरी रोटी कौए को खिला दें.
- अन्नपूर्णा जयंती पर चावल, दूध और केसर वाली खीर बनाकर मां अन्नपूर्णा को इसका भोग लगाएं और बाद में प्रसाद स्वरूप परिवार के साथ ग्रहण करें. इस उपाय से मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होकर अन्न-धन का आशीर्वाद देती है.
- अन्नपूर्णा जयंती पर अन्न का दान जरूर करना चाहिए. आप गरीबों में सतनाज (सात तरह के अनाज) का भी दान कर सकते हैं. इससे घर-परिवार में हमेशा बरकत बनी रहती है. साथ ही शास्त्रों में सतनाज दान करने को बहुत ही पुण्यकारी भी बताया गया है.
- घी का दीप जलाकर मां अन्नपूर्णा के समक्ष रखें और 5 कौड़ी चढ़ाकर पूजा करें. साथ ही अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ जरूर करें. इससे घर पर लक्ष्मी स्थिर रहती है और धन-वैभव में वृद्धि होती है.
भारतीय परंपरा का प्रतीक है रसोई का पूजन
रसोई (किचन) का पूजन भारतीय परंपरा में केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन के मूल तत्व—अन्न और ऊर्जा—का सम्मान करने का प्रतीक है. यह मान्यता विशेष रूप से माता अन्नपूर्णा और अग्नि देव से जुड़ी हुई है, जिन्हें भोजन और जीवन के आधार के रूप में माना जाता है.
रसोई का पूजन क्यों जरूरी है?
- अन्न का सम्मान
रसोई वह स्थान है जहाँ अन्न तैयार होता है, जो हमारे जीवन का आधार है। पूजन के माध्यम से हम अन्न के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और यह याद रखते हैं कि भोजन केवल वस्तु नहीं, बल्कि ईश्वर का प्रसाद है. - सकारात्मक ऊर्जा का संचार
हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार रसोई में अग्नि का वास होता है। जब हम रसोई का पूजन करते हैं, तो वहाँ सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. - स्वास्थ्य और शुद्धता
पूजन करने से रसोई की सफाई और पवित्रता पर ध्यान दिया जाता है. स्वच्छ और व्यवस्थित रसोई से ही शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक भोजन बनता है. - समृद्धि और अन्नपूर्णता की कामना
रसोई पूजन के दौरान माता अन्नपूर्णा से प्रार्थना की जाती है कि घर में कभी अन्न की कमी न हो और परिवार सदैव खुशहाल रहे. - पारिवारिक और सांस्कृतिक परंपरा
रसोई पूजन पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है, जो हमें अपनी संस्कृति और मूल्यों से जोड़ती है. यह परिवार में एकता और श्रद्धा को भी बढ़ाता है। - नए घर या नई शुरुआत का शुभ संकेत
जब नया घर बनता है या नई रसोई शुरू होती है, तो उसका पूजन शुभ माना जाता है। इससे नई शुरुआत में सकारात्मकता और मंगलभाव आता है.
संतुलित जीवन का प्रतीक है किचन की शुद्धता
ऐसी मान्यता है कि रसोई का पूजन हमें यह सिखाता है कि जीवन में अन्न, श्रम और प्रकृति का सम्मान कितना आवश्यक है. यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि कृतज्ञता, स्वच्छता और संतुलित जीवन का प्रतीक भी है. अन्नपूर्णा जयंती हमें यह संदेश देती है कि अन्न का सम्मान करना चाहिए और कभी भी भोजन की बर्बादी नहीं करनी चाहिए. साथ ही यह पर्व हमें दान और सेवा की भावना भी सिखाता है.
अन्न की देवी हैं अन्नपूर्णा
माता अन्नपूर्णा को भोजन और अन्न की देवी माना जाता है. वे भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती का ही एक रूप हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने संसार को माया बताया और कहा कि भोजन भी माया है. तब माता पार्वती ने अन्न का वितरण रोक दिया, जिससे पूरे संसार में अन्न का संकट उत्पन्न हो गया. तब भगवान शिव को यह समझ आया कि अन्न का जीवन में कितना महत्व है. इसके बाद माता पार्वती ने अन्नपूर्णा रूप धारण कर काशी में अन्न का वितरण किया और संसार को भोजन का महत्व बताया.

