असत्य पर सत्य, अनीति पर नीति और अंधकार पर प्रकाश का प्रमुख पर्व की आ गई तारीख
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Panjabi Dussehra 2025: अधर्म पर धर्म, अनीति पर नीति और अंधकार पर प्रकाश का प्रमुख पर्व दशहरा की तारीख आ चुकी है. हिंदू मान्यता के अनुसार दशहरे का उत्सव आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 01 अक्टूबर को शाम 07:01 मिनट पर बतलाया गया है. वहीं, इस तिथि का समापन 02 अक्टूबर को शाम 07:10 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार दशहरा का त्योहार इस साल 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा. लेकिन पंजाबी समाज का यह विजय पर्व 1 अक्टूबर को मनाया जाएगा. विजयदशमी का यह पावन प्रसंग का यह पंजाबी दशहरा 73वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है. इसकी तैयारी बड़े स्तर पर की जा रही हैं. जिसमें रावण और मेघनाथ का वध और विशाल पुतला दहन किया जाएगा. इस पर्व को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु-भक्तों को आमंत्रित किया गया है. जिसमें संत, महंत, जनप्रतिनिधि और सामाजिक-धर्म क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे.
यहां मनाया जाएगा पर्व
पंजाबी समाज का दशहरा पर्व वर्षों से पंडित रविशंकर शुक्ल राइट टाउन स्टेडियम में मनाया जा रहा था. लेकिन इस कार्यक्रम की विशालता को देखते हुए कार्यक्रम स्थल में परिवर्तन किया गया है और अब इस पर्व को शासकीय आयुर्वेद कॉलेज स्टेडियम में मनाया जाने लगा है. इस पर्व को मनाने में पंजाबी समाज से जुड़े लोगों की विशेष योगदान होता है. जिसमें हर समाज के लोग शामिल होते हैं और इस उत्सव को मनाते हैं.
इनके सानिध्य में मनाया जाएगा उत्सव
पंजाबी समाज के द्वारा मनाये जाने वाले इस विजयदशमी पर्व में मध्य प्रदेश जबलपुर नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज गोरखपुर के श्रीमहंत का आशिर्वाद हमेशा से मिलता रहा है. इस वर्ष 2025 में जगद्गुरु श्रीनृसिंहपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी महाराज का सानिध्य प्राप्त होगा. उनके आशिर्वचन श्रद्धालुओं को सुनने मिलेंगे. इसके अलावा शहर के जनप्रतिनिधियों में कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे, सांसद विवेक तन्खा, सांसद सुमित्रा बाल्मीकि, महापौर जगतबहादुर सिंह अन्नू, नगर निगम अध्यक्ष रिंकुज विज, पूर्व कैबिनेट मंत्री तरुण भनोत सहित पंजाबी समाज के लोग शामिल रहेंगे.
पंजाब की कला का होगा प्रदर्शन
पंजाबी समाज के इस कार्यक्रम में पंजाब की कला-संस्कृति का प्रदर्शन किया जाएगा. सीता वाटिका का मंचन किया जाएगा और श्रीराम की सजीव झांकी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र होगी. इसके बाद अलग-अलग रंगों में आतिशबाजी की जाएगी, जो बच्चों के लिए आकर्षण का केन्द्र होगी.
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