Karwa Chauth : करवा चौथ पर सुहाग के सामान को खरीदकर सास को दिया जाता है. अगर सास नहीं है तो आप ननद या जेठानी को भी ये चीजें दे सकती हैं.
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा
Edited By : सुप्रिया
Karwa Chauth 2024 Gift: करवा चौथ व्रत का एक दिन शेष है. इस साल गज केसरी योग में यह व्रत 20 अक्टूबर 2024 दिन रविवार को है. कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाता है. सुहागिन महिलाएं यह व्रत पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं. इस व्रत के साथ कुछ परंपराएं भी जुड़ी हैं, जिन्हें करना बेहद जरूरी माना जाता है.
कहा जाता है कि करवा चौथ पर सास को बहू कुछ चीजें उपहार स्वरूप देती है. इसके बदले में सास भी बहू को कुछ चीजें देती हैं. ऐसा करने से घर में खुशहाली आती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है.
प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक, वैसे तो करवा चौथ का व्रत पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है, लेकिन इस व्रत में सास का भी विशेष महत्व होता है. इस दौरान कुछ सुहाग के सामान को खरीदकर सास को दिया जाता है. अगर सास नहीं है तो आप ननद या जेठानी को भी ये चीजें दे सकती हैं. इसके बदले में सास भी बहू को कुछ चीजें देती हैं.
करवा चौथ पर सास को क्या देना चाहिए?
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, करवा चौथ पर सास को साड़ी, सुहाग के सामान जैसे चांदी की पायल और बिछुए खरीदकर दिए जा सकते हैं. वहीं, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, नेल पॉलिश, लिपस्टिक, काजल और मेहंदी भी उपहार स्वरूप दी जा सकती है. इन चीजों को व्रत खोलने के बाद सास के पैर छूते वक्त दें. इसके बदले में सास बहू को ढेर सारा आशीर्वाद देती हैं.
करवा चौथ पर बहू को क्या देना चाहिए?
करवा चौथ पर सास भी बहू को सरगी देती है. वैसे सरगी का चलन पंजाबियों में ज्यादा होता है. सरगी को व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह के वक्त खाती हैं. सरगी सुबह 4 बजे से पहले खानी होती है. सरगी में खाने-पीने की चीजें, मिठाई, सेवईं, 16 शृंगार के सामान, पूजन सामग्री जैसी चीजें होती हैं. सरगी में फल, मिठाइयां, ड्रायफ्रूट को व्रत रखने वाली महिलाएं खाती हैं.
करवा चौथ पर मायके से क्या आता है?
मान्यताओं के अनुसार, यदि आप पहली बार करवा चौथ का व्रत कर रही हैं तो मायके से भी कुछ चीजें आती हैं. इसमें लड़की यानी व्रत करने वाली महिला के लिए कपड़े, उसके पति के लिए कपड़े, मिठाई और फल दिए जाते हैं. कई जगहों पर सास और ननद या पूरे परिवार के लिए कपड़े दिए जाते हैं. यह चलन दिल्ली-एनसीआर का है. हालांकि, अन्य जगह पर कुछ और भी हो सकता है.

