भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि और प्रभारी राजदूत आर रविंद्र ने अपना पक्ष रखा!
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By :DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
USA News : सुंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बुधवार को बच्चों और सशस्त्र संघर्ष के मुद्दों पर बहस में भारत ने पाकिस्तान को आईना दिखाया है. दरअसल, पाकिस्तान के राजनयिक का कश्मीर मुद्दे को लेकर निराधर टिप्पणी करने पर भारत ने कड़ी फटकार लगाई है. भारत ने कहा कि पाकिस्तान में बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघन किए जा रहे हैं. जिससे ध्यान भटकाने के उद्देश्य से पाक अपनी नापाक कोशिश कर रहा है. कुछ समय पहले ही यूएनसी में पाकिस्तान अस्थायी सदस्या बना है. इसके बाद से ही वह मंच का दुरुपयोग करने में जुटा है.
जानें क्या है रहस्यमयी मौतें का कारण
भारत ने पाकिस्तान को लताड़ा यूएनसी में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि और प्रभारी राजदूत आर रविंद्र ने अपना पक्ष रखा है. उन्होंने कहा, ” सीमित समय के मद्देनजर उन टिप्पणियों पर कम शब्दों में प्रतिक्रिया देना चाहूंगा जो एक देश के प्रतिनिधि की ओर से मेरे देश के खिलाफ की गई हैं. जाहिर है ये टिप्पणियां राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद हैं. भारत इस तरह की निराधार टिप्पणियों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसकी निंदा करता है.” भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे आर रविंद्र ने पाकिस्तान की ओर से कश्मीर मुद्दा उठाने पर यह टिप्पणी की थी। पाकिस्तान की टिप्पणी पर कहा कि यह कुछ अलग नहीं है. पाकिस्तान में बच्चों के खिलाफ जारी गंभीर उल्लंघनों से ध्यान भटकाने की कोशिश है, जिसे बिना किसी रोक टोक के किया जा रहा है. रविंद्र ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस की ओर से जारी इस साल की बच्चों और ससश्त्र संघर्ष की रिपोर्ट में पाकिस्तान के मसले का जिक्र किया गया है.
पाकिस्तान की टिप्पणी को बताया निंदनीय
रविंद्र ने आगे कहा, ” जहां तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का सवाल है तो वे हमेशा से भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग थे और हमेशा रहेंगे. फिर चाहे उक्त प्रतिनिधि या उनका देश कुछ भी मानता हो या इच्छा रखता हो.” बता दें, यूनएससी में बच्चों और सशस्त्र संघर्ष मुद्दों पर खुली बहस में पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर मुद्दों पर टिप्पणी की थी. पाकिस्तान की इस टिप्पणी को भारत के प्रतिनिधि ने आपत्तिजनक बताया था.
भारत ने पाकिस्तान को लताड़ा
यूएनसी में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि और प्रभारी राजदूत आर रविंद्र ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा, ” सीमित समय के मद्देनजर उन टिप्पणियों पर कम शब्दों में प्रतिक्रिया देना चाहूंगा जो एक देश के प्रतिनिधि की ओर से मेरे देश के खिलाफ की गई हैं. जाहिर है ये टिप्पणियां राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद हैं. भारत इस तरह की निराधार टिप्पणियों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसकी निंदा करता है.” भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे आर रविंद्र ने पाकिस्तान की ओर से कश्मीर मुद्दा उठाने पर यह टिप्पणी की थी. पाकिस्तान की टिप्पणी पर कहा कि यह कुछ अलग नहीं है. पाकिस्तान में बच्चों के खिलाफ जारी गंभीर उल्लंघनों से ध्यान भटकाने की कोशिश है, जिसे बिना किसी रोक टोक के किया जा रहा है. रविंद्र ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस की ओर से जारी इस साल की बच्चों और ससश्त्र संघर्ष की रिपोर्ट में पाकिस्तान के मसले का जिक्र किया गया है.
इससे पहले भी हुए हैं ऐसे निर्णय
“हिंसक संघर्ष में बच्चों के लिये कोई स्थान नहीं है, और हमें हिंसक संघर्ष में, बच्चों के अधिकारों को कुचले जाने की अनुमति नहीं देनी होगी.”
यूएन प्रमुख ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए, सशस्त्र संघर्ष और बच्चों के मुद्दे पर अपनी ताज़ा रिपोर्ट को पेश किया. जो कि पिछले सप्ताह प्रकाशित हुई थी.
रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2020 में 19 हज़ार से ज़्यादा लड़के-लड़कियों को सीधे तौर पर, एक या उससे अधिक अधिकार हनन के गम्भीर मामलों की पीड़ा झेलनी पड़ी है.
अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया और काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य देशों में सबसे अधिक अधिकार हनन के मामले देखने को मिले हैं.
बाल सैनिकों के रूप में भर्ती व इस्तेमाल, हत्या व अपंग बनाए जाने और मानवीय राहत तक पहुँच से रोके जाने के बड़ी संख्या में मामले सामने आए.
“नए और बेहद चिन्ताजनक रूझान उभरे हैं: अगवा किये जाने वाले बच्चों की संख्या और लड़के-लड़कियों के विरुद्ध यौन हिंसा में भीषण वृद्धि.”
उन्होंने कहा कि स्कूलों व अस्पतालों पर हमले हो रहे हैं, उनमें लूटपाट हो रही है, तबाह किया जा रहा है और सैन्य गतिविधियों के लिये इस्तेमाल हो रहा है.
लड़कियों के लिये शिक्षा केन्द्रों व स्वास्थ्य केन्द्रों को कहीं ज़्यादा बड़ी संख्या में निशाना बनाया गया है.

