भगवान कृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्रदेव के अहंकार को दूर किया था. इस साल गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर 2025 को है.
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Govardhan Puja 2025: गोवर्धन पूजा का त्योहार कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर आज 22 अक्टूबर 2025 को है.दिवाली के पांच दिवसीय त्योहारों में से गोवर्धन पूजा भी एक है. यह त्योहार दीपावली के अगले दिन यानी बलिप्रतिपदा को मनाया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण की बेहद लोकप्रिय लीला की याद में मनाए जाने वाले इस पर्व में श्री कृष्ण और गोवर्धन पर्वत के प्रतीक की पूजा की जाती है. इस दिन गाय के गोबर का गोवर्धन पर्वत बनाकर उसकी पूजा की जाती है. गोवर्धन पूजा के त्योहार के पूर्व मंगलवार 21 अक्टूबर को प्रदेश सरकार द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों गौ-पूजन और गाय के गोबर से बने गोवर्धन भगवान की पूजा की गई. इसी क्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रवीन्द्र भवन भोपाल में गौ-पूजन किया. एमपी के जबलपुर में नवनिर्मित उमरिया गौशाला में जगद्गगुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज के सानिध्य में पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने गौ पूजन किया.
हर घर और गांव वृन्दावन- सीएम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित गोवर्धन पूजा के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हर घर, हर गौ-शाला, हर गांव, वृंदावन है और हम सब गोपाल बन गए हैं. हमारी हर परम्परा और उत्सव में प्रकृति के प्रति आदर और समाज के प्रति उत्तदायित्व समाहित है. गोवर्धन पूजा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. हमारी संस्कृति ने हमें छोटी से छोटी चीज प्रदान करने वालों के प्रति भी आभार करना सिखाया है. आज हम प्रकृति के उसी दाता स्वरूप को प्रणाम कर रहे हैं. आज के दिन गोवर्धन और गौवंश की पूजा कर हम संसार को प्रकृति, पर्यावरण और पशुधन संवर्धन का संदेश देते हैं. यह सनातन संस्कृति की देन है. यह वास्तव में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का उत्सव है. यह हमें स्मरण कराता है कि धरती पर जो भी है, उसके साथ सामंजस्य ही जीवन है. गोवर्धन पूजा ‘जियो और जीने दो’ के विचार और उपलब्ध खाद्य सामग्री एवं संसाधनों को समाज के साथ मिल-बांटकर साझा करने का प्रतीक है. हमारी संस्कृति और परम्पराओं को बचाए रखने की हम सबकी जिम्मेदारी है. राज्य सरकार द्वारा गोवर्धन पूजा का आयोजन इसी उद्देश्य से किया गया है.
ऐसी है गोवर्धन पूजा की परंपरा
- गोवर्धन पूजा को अन्नकूट उत्सव भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान को छप्पन भोग यानी 56 प्रकार के व्यंजन जैसे दाल, चावल, मिठाई, फल, सब्जी आदि अर्पित किए जाते हैं. ये भोग भगवान के प्रति कृतज्ञता और प्रेम का प्रतीक है.
- गोबर हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है. इसे न केवल शुद्धता का प्रतीक समझा जाता है, बल्कि इसमें देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का भी वास बताया गया है.
- गोबर से बना गोवर्धन पर्वत धरती माता और भगवान कृष्ण का प्रतीक होता है. यह हमें सिखाता है कि प्रकृति और पशु धन की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है.
- गोवर्धन पूजा के बाद आपको गोबर के कुछ हिस्से से घर के आंगन को लीपना चाहिए, जिससे माता लक्ष्मी का आगमन सदैव बना रहता है और भगवान कृष्ण की कृपा भी हमेशा बनी रहती है.
- महिलाएं पूजा के बाद गोवर्धन से बचे हुए गोबर से कंडे तैयार कर सकती हैं और इसका इस्तेमाल घर के किसी भी काम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
- कंडों को आप सर्दियों में खाना बनाने के लिए भी इस्तेमाल में ला सकती हैं. इसे घर में जलाकर वातावरण को शुद्ध भी किया जा सकता है. पूजा के बाद गोवर्धन पर्वत के गोबर को खेतों में डालकर खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है. इससे फसलों की पैदावार बढ़ेगी और मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ेगी.

