शहर के 1 लाख लोग नहीं देते जल व सम्पत्ति टैक्स, इसी वजह से नगर निगम की आय नहीं बढ़ पा रही है और पार्षद मद के नहीं हो रहे काम
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Municipal Corporation Jabalpur : शहर में एक लाख से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो नगर निगम को हर साल पानी और संपत्ति का टैक्स नहीं देते हैं. यही वजह है कि निगम की आय नहीं बढ़ पा रही है. सिर्फ पानी और संपत्ति को ही मिला लिया जाए तो करीब 330 करोड़ रुपए टैक्स बकाया निकलता है. इस राशि को वसूलने में नगर निगम के कर्मचारियों को हर साल पसीना बहाना पड़ रहा है. इस बार भी निगम ने टैक्स का आंकड़ा बढ़ाने के लिए सभी टैक्स कलेक्टर को 25 हजार रुपए रोज की वसूली का टारगेट दिया है, लेकिन टीसी ऐसे हैं जो इस आंकड़े को भी नहीं छू पा रहे हैं. पिछले दिनों हुई समीक्षा के बाद निगमायुक्त ने ऐसे 8 टीसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
पानी का भी 157 करोड़ बकाया
संपत्तिकर के साथ लोग जलकर भी जमा नहीं कर रहे हैं. पिछले साल करीब 98 हजार लोगों ने जलकर की राशि जमा नहीं की थी. यही वजह है कि नगर निगम को जलकर का बकाया करीब 157 करोड़ रुपए लेना है. लोगों की टैक्स देने की आदत का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है एक लाख 84 हजार लोग डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का टैक्स नहीं देते हैं. यह राशि घर से एक रुपए और दुकान से 2 रुपए रोज ली जानी है. बावजूद इसके गार्बेज का 50 करोड़ रुपए से ज्यादा टैक्स बकाया है.
वसूली की समीक्षा की जाती है
नगर निगम ने प्रत्येक वार्ड के लिए जो टारगेट तय किया है, उसके अनुसार हर टीसी को 25 हजार रुपए रोजाना वसूली करना है. यह काम सप्ताह में 6 दिन होना है। इसके बाद समीक्षा की जाती है, लेकिन कई टीसी ऐसे हैं जो अपने वार्ड के टैक्स के बकायादारों से 25 हजार रुपए रोज भी नहीं वसूल पा रहे हैं.
पार्षद निधि मे जुड़ता है प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन का 50 प्रतिशत
निगम के नियमों के मुताबिक हर वार्ड से जितना भी प्रॉपर्टी टैक्स का कलेक्शन होता है, उसकी 50 प्रतिशत राशि पार्षद निधि में मिलती है. यह निधि वार्ड के विकास कार्यों में खर्च होती है. वर्तमान में नगर निगम पार्षद निधि से एक वार्ड में साल भर में 90 लाख रुपए के काम कराता है.
1 लाख 19 हजार लोगों ने नहीं दिया था संपत्ति टैक्स
शहर में कुल पौने तीन लाख के करीब करदाता हैं, लेकिन इनमें से 1 लाख 19 हजार लोगों ने पिछले साल संपत्ति कर ही नहीं चुकाया था. इन पर 173 करोड़ रुपए टैक्स बकाया है. इनसे इस बार कम से कम 117 करोड़ रुपए वसूलने का टारगेट तय किया गया है. हालांकि 7 माह बीतने के बाद भी निगम का राजस्व विभाग आधे में भी नहीं पहुंच पाया है. यह बकाया राशि अगर नगर निगम के खाते में पहुंच जाए तो शहर विकास की रफ्तार एकदम से तेज हो सकती है, परंतु इसे वसूलने में नगर निगम के जिम्मेदार रुचि नहीं ले रहे हैं.

