जबलपुर स्मार्ट सिटी द्वारा 3727 करोड़ की लागत से बनाया गया है प्रोजेक्ट, आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय नहीं दिखा रहा रुचि, जबलपुर में अब कोई चर्चा तक नहीं होती
Source : DB News Update
BY : DB News Update | Edited By : प्रिंस अवस्थी
MP Jabalpur News. जबलपुर स्मार्ट सिटी द्वारा 3727 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तैयार किया गया और उसे आवास एवं शहरी मंत्रालय दिल्ली भेज दिया गया. इंक्यूबेशन ऑफ न्यू सिटी के नाम से बनाए गए इस प्रोजेक्ट की दिल्ली से आई एक्सपर्ट टीम ने सराहना भी की, लेकिन यह प्रोजेक्ट दिल्ली में ही अटककर रह गया.
इस प्रोजेक्ट को लागू करने का अप्रूवल आज तक नहीं मिल पाया, जबकि जबलपुर के जनप्रतिनिधियों ने दावा किया था कि आवास एवं शहरी मंत्रालय जल्द ही इस प्रोजेक्ट को लागू कर देगा, क्योंकि जबलपुर जिला प्रशासन द्वारा दिए गए प्रजेंटेशन से दिल्ली में बैठे अिधकारी सहमत थे और जबलपुर में जिस जगह को चिह्नित किया गया था, वह जगह आवास एवं पर्यावरण विभाग के अनुकूल बताई जा रही थी. इसके बाद भी यह प्रोजेक्ट दिल्ली में ही अटककर क्यों रह गया, यह समझ से परे है।
स्मार्ट सिटी ऑफिस में रखा है न्यू सिटी का मॉडल
इंक्यूबेशन ऑफ न्यू सिटी प्रोजेक्ट का लाखों रुपए की लागत से स्मार्ट सिटी जबलपुर के अधिकारियों ने मॉडल तैयार करा लिया और उस मॉडल का हर दिन ऑफिस पहुँचकर खुद ही दर्शन कर रहे हैं. इसके अलावा कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जबकि इस प्रोजेक्ट का प्रजेंटेशन मई 2023 में किया गया था और इस प्रोजेक्ट पर दिलचस्पी दिखाते हुए दिल्ली से एक टीम भी अगस्त 2023 में आई थी. उस टीम ने प्रोजेक्ट को जल्द लागू करने का वादा किया था, लेकिन अभी तक दिल्ली से किसी प्रकार की खबर अधिकारियों तक नहीं आई है.
स्मरण पत्र भेजकर माँग रहे मार्गदर्शन
स्मार्ट सिटी जबलपुर के अिधकारी 2 साल बाद अब एक बार फिर स्मरण पत्र भेजे जाने का दावा कर रहे हैं और दिल्ली मंत्रालय से मार्गदर्शन की माँग कर रहे हैं, जबकि इस प्रोजेक्ट को लेकर 6 माह पहले सांसद, विधायक ने शहरी एवं आवास विभाग के मंत्री से मुलाकात की थी और जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट को अमल में लाने का दावा किया गया था. हैरानी की बात यह है कि इन सबके बाद भी दिल्ली मंत्रालय से किसी प्रकार का पत्राचार अभी तक नहीं किया गया है.
ऐसा बनाया गया था प्रोजेक्ट
इंक्यूबेशन ऑफ न्यू सिटी के तहत जबलपुर में टेक्सटाइल एवं लॉजिस्टिक क्लस्टर का प्रस्ताव तैयार कराया गया, जिसे भारत सरकार को भेजा गया. इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत गौरीघाट के आगे भटौली में 332 हेक्टेयर जमीन भी चिन्हित कर दी गई. इस जमीन पर 3727 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट लॉन्च किया जाना था. इसमें होटल, अस्पताल, लॉजिस्टिक पार्क, हाईराइज एवं रहवासी इमारतें तैयार की जानी थीं.
इसलिए जबलपुर को चुना गया था
केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के एक्सपर्ट पैनल ने जबलपुर को केवल इसलिए चुना था कि नर्मदा किनारे 332 हेक्टेयर भूमि की उपलब्धता थी. साथ ही जबलपुर और आसपास प्रमुख पर्यटन केंद्र हैं. न्यू सिटी के बिल्कुल नजदीक रिंग रोड का निर्माण किया जा रहा है, जिससे एयर कनेक्टिविटी बिल्कुल नजदीक है. लिहाजा एक्सपर्ट पैनल ने इस प्रोजेक्ट पर सहमति जताई थी.
प्रोजेक्ट पर एक नजर
- > 3727 करोड़ की लागत का इंक्यूबेशन न्यू सिटी नामक प्रोजेक्ट तैयार किया गया.
- > 332 हेक्टेयर जमीन गौरीघाट के आगे भटौली में चिह्नित कर ली गई.
- > 2023 जुलाई में इस प्रोजेक्ट को लेकर शहरी एवं आवास विभाग दिल्ली में प्रजेंटेशन हुआ.
- > 2023 अगस्त में दिल्ली से एक्सपर्ट की टीम आई और प्रोजेक्ट की हकीकत जानने का प्रयास किया।.
- > 2024 जुलाई में शहरी एवं आवास विभाग के मंत्री से जबलपुर के जनप्रतिनिधियों की मुलाकात हुई.
- > 2024 के अंत में दिसंबर माह में अब जाकर फिर से मार्गदर्शन के नाम पर स्मार्ट सिटी द्वारा पत्राचार किया जा रहा है.

