जिस मां नर्मदा के आंचल का हर कंकड़ शंकर है, उनका प्राकट्य उत्सव 25 जनवरी को मनाया जाएगा, ऐसी मोक्षदायनी मां नर्मदा का जन्मोत्सव मनाने की विधि और पूजन का मुहूर्त नोट कर लें…
Source : DB News Update
By : DB News Update | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Narmada Jayanti 2026: हिंदू धर्म की आस्था का केन्द्र मां नर्मदा का जन्मोत्सव मनाने की तैयारी प्रारंभ हो गई है, मध्य प्रदेश, गुजरात प्रांत सहित महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत के हिंदू धर्मावलंबियों के लिए यह नदी आस्था का प्रतीक है. वहीं यह नदी एक ऐसी जीवन रेखा नदी है, जो पूर्व से पश्चिम की दिशा में बहती है और पश्चिमी भाग को धन-धान्य से भर देती है. यह नदी जिस शहर और गांव से होकर गुजरती है, उस क्षेत्र की दरिद्रता अपने आप नष्ट हो जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस पवित्र नदी का हर कंकड़ शंकर है. यह मोक्षदायनी के नाम से भी जानी जाती है. ऐसी पवित्र नदी का प्राकट्य उत्सव मनाने का दिन इसी माह है. हलांकि मां नर्मदा का जन्मोत्सव हर जगह विविध रूपों में मनाया जाता है. लेकिन हमारे श्रद्धालु-भक्तों को इस बात की जानकारी है कि गंगा मां में स्नान करने से जितना पुण्य मानव को मिलता है, उतना पुण्य मां नर्मदा का दर्शन करने से प्राप्त हो जाता है. लेकिन एक और खासियत मां नर्मदा नदी के संबंध में संतों और महापुरुषों ने कहा है. यह यह है कि मां नर्मदा का जितना पूजन करने का महत्व है, उससे कहीं ज्यादा उनके गुणगान करने से मिलता है. मां नर्मदा का भजन गायन करने से मनोवाच्छित फलों की प्राप्ति होती है. आइए आज हम ऐसी मोक्षदायिनी मां नर्मदा के जन्मोत्सव क्या करें और क्या न करें? इसकी विस्तृत जानकारी देने जा रहे हैं.
कब है नर्मदा जयंती
मोक्षदायिनी मां नर्मदा जी की जयंती 25 जनवरी 2026 को पड़ रही है. यह तिथि माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन पड़ रही है, जिस कारण इसे बेहद शुभ माना जा रहा है. हिंदू मान्यता के अनुसार जिसका स्मरण करने से पाप का क्षय हो जाता है, ऐसी पुण्यदायी मां नर्मदा का अवतरण दिवस है और इस अवसर पर पूजन करने का फल कई गुना भक्तों को मिलने वाला है.
नर्मदा जन्मोत्सव का शुभ मुहूर्ति
सप्तमी तिथि प्रारंभ: 25 जनवरी 2026, 12:39 एएम
सप्तमी तिथि समाप्त: 25 जनवरी 2026, 11:10 पीएम
(नोट- मां नर्मदा का जन्मोत्सव रात्रि 11 बजे के पहले मनाने के लिए शुभ है.)
नर्मदा जयंती पर प्रमुख मान्यता
- मां नर्मदा में स्नान करने से मानव जीवन में किए गए पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होती है.
- मां नर्मदा को भगवान शिव की पुत्री के रूप में माना गया है.
- नर्मदा का हर कंकड़ शंकर का स्वरूप है, जिसके कारण नर्मदेश्वर महादेव की स्थापना नहीं कराई जाती है.
- नर्मदा नदी का दर्शन मात्र से पुण्यों का उदय हो जाता है.
- नर्मदा जल का आचमन करने से आत्मा शुद्ध हो जाती है.
- मानव जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति के लिए बड़ी संख्या में भक्त पूजन और भजन करते हैं.
- नर्मदा एक मात्र ऐसी नदी है जो पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर बहती है.
- नर्मदा नदी एक ऐसी पवित्र नदी है, जिसकी परिक्रमा करने का विधान है.
कैसे करें पूजन
- नर्मदा में प्रातःकाल स्नान करें और उनका तट पर पूजन कर लें.
- नर्मदा अष्टक और आरती अवश्य रूप से करें.
- नर्मदा पच्चीसी का पाठ करने से जीवन में आनंद की अनुभूति होगी.
- नर्मदा मां से जुड़े भजन का गायन भी नर्मदा तट पर करने का विधान है.
- नर्मदा जी को घर से बने भोजन प्रसाद का भोग लगाएं और उसे प्रसाद के रूप में सभी भक्तों को वितरित करें.
- नर्मदा नदी के तट पर मां नर्मदा को फल, फूल, दूध, जल अभिषेक के साथ, धूप-दीप अर्पित करें.
- दीपदान करते हुए अपनी आस्था प्रकट करें.
- अंत में मां नर्मदा को प्रणाम करें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें.
नर्मदा जन्मोत्सव मनाने के प्रमुख स्थान
मां नर्मदा का जन्मोत्सव मध्य प्रदेश के अमरकंटक धाम जहां नदी का उद्गम स्थल है, यहां से नर्मदा जन्मोत्सव मनाने का क्रम प्रारंभ हो जाता है. इसके बाद मंडला, डिंडौरी, जबलपुर, ओंकारेश्वर, महेश्वर, नर्मदापुरम (होशंगाबाद) जैसे स्थानों पर बड़ी धूम-धाम और श्रद्धा के साथ प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है. नर्मदा तट के दोनों ओर बड़ी संख्या में साधु-संत और भक्त एक साथ नदी किनारे पूजा और आरती में हिस्सा लेते हैं, वहीं गांव-शहरों में भी स्थानीय स्तर पर दीपदान, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण जैसे आयोजन करते हैं.
॥ नर्मदा मां की आरती ॥
ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा, शिव हरि शंकर रुद्री पालन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी नारद शारद तुम वरदायक,अभिनव पदचण्डी।
सुर नर मुनि जन सेवत,सुर नर मुनि शारद पदवन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी धूमक वाहन राजत, वीणा वादयन्ती।
झूमकत झूमकत झूमकत, झननन झननन रमती राजन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी बाजत ताल मृदंगा, सुरमण्डल रमती।
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान, तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
देवी सकल भुवन पर आप विराजत, निशदिन आनन्दी।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवाशंकर तुम भव मेटन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
मैया जी को कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
अमरकंठ में विराजत, घाटन घाट कोटी रतन जोती॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
मैया जी की आरती निशदिन पढ़ि गावें, हो रेवा जुग जुग नर गावें।
भजत शिवानंद स्वामी, जपत हरि मन वांछित फल पावें॥
ॐ जय जगदानन्दी…॥
Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि DBNewsupdate.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

