बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 को है. मां सरस्वती की पूजा के लिए इस दिन खास संयोग बन रहा है. बसंत पंचमी पर पूजा का मुहूर्त, पूजन विधि, भोग और मंत्र जानें.
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By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Basant Panchami 2026: सनातन धर्म के अनुसार बुद्धि-विवेक और विद्या की देवी मां सरस्वती का प्राकट्य उत्सव मनाने का दिन नजदीक आ गया है. ज्योतिष गणना के अनुसार मां सरस्वती का पूजन-अर्चन और आध्यात्मिक ऊर्जा का केन्द्र बिंदु ज्ञान को जागृत करने के लिए उपयुक्त है. इस त्योहार को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती का पूजन करने की परंपरा है. इस दिन विद्यार्थी अपने स्कूल-कॉलेज में बड़े उत्साह के साथ पूजन करते हैं और मां सरस्वती का आशिर्वाद ग्रहण करते हैं. क्योंकि सरस्वती पूजन के तुरंत बाद परीक्षा की तारीखें सुनिश्चित हो जाती हैं. इसके अलावा मां सरस्वती का पूजन शिक्षक और लेखन से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है. लिहाजा अधिकांश लोग इस विशेष दिन के लिए मुहूर्त और पूजन का समय अवश्य देखते हैं. तो आइए जानते हैं कि इस वर्ष 2026 में मां सरस्वती का पूजन करने के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त कब है और पूजन की क्या विधि है?
कलम और पुस्तक का पूजन करने का विधान
बसंत पंचमी पर मूलत: सवरस्वती मां का तो पूजन किया ही जाता है. इसके साथ ही कलमकार और पुस्तक का महत्व समझने वाले लोग विशेष रूप से मां सरस्वती जी का पूजन करते हैं. क्योंकि यह त्योहार न केवल मर्यादा में रहने का संदेश देता है. बल्कि वाणी में संयम, विचारों की पवित्रता और आचरण की मर्यादा लांघने से रोकाता है. इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती माता की आधारधना करने का विशेष दिन है और पीले वस्त्र पहनकर माता रानी सरस्वती का पूजन करने के लिए महत्वपूर्ण है. इस दिन विद्यार्थी अपनी शिक्षा में सुधार करने का तो वचन लेता ही है. साथ ही कन्याओं के लिए भगवती का पूजन विशेष महत्व रखता है.
बसंत पंचमी 2026 की तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी की तिथि 23 जनवरी को देर रात 2 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 24 जनवरी 2026 को देर रात में 1 बजकर 46 मिनट पर होगा. इस दिन मांता रानी की पूजन-अर्चन करने से मां सरस्वती की कृपा प्राप्त हाेती है.
बसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व
ज्योतिष शास्त्र स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि पीला रंग गुरु ग्रह से जुड़ा माना जाता है, जो ज्ञान, शिक्षा, भाग्य और समृद्धि का कारक है इसलिए मां सरस्वती को पीले रंग की चीजों का प्रसाद चढ़ाना शुभ फल देने वाला माना गया है. इस मां सरस्वती जी का पूजन अवश्य करें.
बसंत पंचमी पर विद्यारंभ का मुहूर्त
बसंत पंचमी पर विद्यारंभ संस्कार के लिए सुबह 7.13 से सुबह 11.13 तक शुभ मुहूर्त है. विद्या की शुरुआत के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है. इस दिन बच्चों को “ॐ’’ या “अ’’ लिखवाकर शिक्षा की शुरुआत कराई जाती है.
बसंत पंचमी पर मस्तिष्क तेज करने का उपाय
- बसंत पंचमी पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर लेना चाहिए.
- सरस्वती यंत्र के सामने धूपबत्ती जलाएं.
- सरस्वती यंत्र को गंगाजल और दूध से अभिषेक करें.
- मां सरस्वती जी के तैलचित्र पर कुमकुम लगाएं.
मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें.
- मां सरस्वती को याद करते हुए 11 या 21 बार ‘ॐ वागदैव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात्। ‘ मंत्र का जाप करें.
- ध्यान रहे मां सरस्वती जी का चित्र उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित किया जाना चाहिए.
- सरस्वती पूजा की विधि
- बसंत पंचमी पर सुबह स्नान के बाद सरस्वती को पुष्प, रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, अर्पित करें.
- माता के चरणों में पुस्तक, कलम, वाद्य यंत्रों आदि को रखकर प्रणाम करें.
- सरस्वती चालीसा का पाठ करें. या फिर ’ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’, अथवा ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सरस्वत्यै नमः’मंत्र का जप करें.
- बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की आरती करें. इसके बाद छात्रों को पढ़ाई से संबंधित सामग्री का दान करें.
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