जगत के पालनहार का प्राकट्य उत्सव 30 को, तीन दिवसीय अनुष्ठान होंगे, मध्य प्रदेश जबलपुर में स्थित नरसिंह मंदिर में तीन दिवसीय अनुष्ठान, मंदिर प्रबंधन ने सभी श्रद्धालु भक्तों से सपरिवार उपस्थित होकर धर्मलाभ अर्जित करने की अपील की है.
Source : DB News Update
By : ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप मिश्रा | Edited By: प्रिंस अवस्थी
Narasimha Jayanti 2026: भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन श्रीनृसिंह का अवतार लिया था. ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक नरसिंह भगवान भी हैं. जिन्होंने अपने भक्त पर हो रहे अत्याचारों को सहन नहीं किया और अपने परम प्रह्लाद की रक्षा के लिए लिए इस स्वरूप में अवतार लिया. इस अवतार में जगत के पालनहार भगवान श्रीविष्णु ने आधा मानव और आधा सिंह का स्वरूप धारण किया था और हिरण्यकश्यप जैसे महापापी राक्षस का वध किया था. यही कारण है भगवान नरसिंह का प्राकट्य उत्सव देश भर में हिंदू धर्मावलंबी बड़ी धूम-धाम के साथ मनाते हैं और भगवान श्रीनृसिंह का अनुष्ठान भी करते हैं. यह प्रमुख तिथि बिल्कुल नजदीक है और भगवान श्रीनृसिंह का प्राकट्य उत्सव मनाने की तैयारी भी नरसिंह मंदिरों में शुरू हो गई है.
28 अप्रैल से शुरू हो जाएगा अनुष्ठान
नरसिंह मंदिर, शास्त्री ब्रिज गोरखपुर जबलपुर में जगद्गुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज के सानिध्य में महाभिषेक, महामंत्र जाप, हवन एवं महाआरती का आयोजन होगा. भगवान नृसिंहदेव के पावन प्राकट्योत्सव के अवसर पर 28, 29 एवं 30 अप्रैल 2026 को त्रिदिवसीय दिव्य महोत्सव का आयोजित होने जा रहा है.
नरसिंह महामंत्र जाप से शुरू होगा अनुष्ठान
इस महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन 28 अप्रैल से प्रातः 10:00 बजे से 12:00 बजे तक महाभिषेक एवं श्री नरसिंह महामंत्र जाप तथा सायंकाल 4:00 बजे से 7:00 बजे तक अर्चन, हवन, तर्पण एवं आरती का आयोजन किया जाएगा.
महोत्सव के अंतिम दिन गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को भगवान श्री नृसिंहदेव का पावन जन्मोत्सव भक्तों द्वारा श्रद्धा और भक्ति पूर्वक बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा. इस अवसर पर विशेष पूजन उपरांत सायं 7:00 बजे महाआरती एवं प्रसाद वितरण होगा.
भक्त की आस्था और विजय का पर्व
भगवान नृसिंह प्राकट्य उत्सव भगवान के प्रति भक्त की आस्था को दर्शाता है और अंत में भक्त को विजय प्राप्त होती है. बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्तों की रक्षा के भगवान स्वयं प्रकट होते हैं. इसी विश्वास को यह पर्व दर्शाता है. लोग इसे विजय प्रतीक के रूप में मनाते हैं. इस साल नरसिंह जयंती रविवार, 30 जून को है, जो हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ रही है. इस दिन लोग व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं. व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है.
नरसिंह जयंती 2026 कब है?
हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 30 अप्रैल को है. 29 अप्रैल को शाम 06:34 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इसका समापन 30 जून को रात 10:22 मिनट पर होगा. इस साल यह पर्व 30 अप्रैल को ही मनाया जाएगा.
भगवान नृसिंह की पूजा विधि
- प्रात:काल उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें.
- पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल से पवित्र करें.
- चौकी की बनी वेदी पर लाल या पीला कपड़ा बिछा लें.
- भगवान नरसिंह की प्रतिमा स्थापित करें. अगर नरसिंह जी की प्रतिमा न हो तो भगवान विष्णु की तस्वीर भी स्थापित कर सकते हैं.
- पूजा शुरू करने से पहले व्रत और पूजा का संकल्प लें.
- भगवान नरसिंह की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं.
- चंदन, कुमकुम, हल्दी और गुलाल आदि चीजें अर्पित करें.
- भगवान को पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनाएं और पीले फूलों की माला चढ़ाएं.
- भगवान नरसिंह को फल, मिठाई, विशेष रूप से गुड़ और चना अर्पित करें.
- पूजा में भोग लगाते समय तुलसी दल जरूर शामिल करें.
- घी का दीपक जलाएं और भगवान नरसिंह के मंत्रों का जाप करें.
- अंत में भगवान नरसिंह की आरती करें.
- पूजा के दौरान हुई गलतियों के लिए माफी मांगे.
- अपनी क्षमतानुसार गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें.
श्रीनृसिंह के इन मंत्रों का जाप करें
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्।।
ॐ नृम नरसिंहाय शत्रुबल विदीर्नाय नमः
ॐ नृम मलोल नरसिंहाय पूरय-पूरय
नरसिंह जयंती पर ये सावधानी रखना जरूरी
- श्रीनृसिंह प्राकट्य उत्सव के दिन किसी से अपशब्द नहीं बोलना चाहिए.
- क्रोध का भाव नहीं आना चाहिए या किसी के प्रति बुरे विचार लाना अशुभ माना गया है.
- नरसिंह जयंती के दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए.
- श्रीनृसिंह प्राकट्य उत्सव के दिन अपने से बड़े-बुजुर्गों या कमजोरों का अपमान नहीं करना चाहिए.
- नरसिंह जयंती के दिन काले या नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए.
- ब्रह्मचर्य का पालन करना इस दिन महत्वपूर्ण माना गया है.
नृसिंह प्राकट्य की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नृसिंह स्वरूप में अवतार लिया था. भगवान नरसिंह एक खंभे से प्रकट हुए थे और उनका आधा शरीर मनुष्य का और आधा शरीर सिंह का था. भगवान विष्णु आपने परम भक्त प्रह्लाद को उसके पिता हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए प्रकट हुए. भगवान ने हिरण्यकश्यप को अमरता का बरदान दिया था, बरदान में हिरण्यकश्यप ने भगवान से ऐसा वचन प्राप्त कर लिया था, जिससे उसकी मृत्यु न हो सके. हिरण्यकश्यप ने आशिर्वाद के रूप में मांगा था कि मेरी मृत्यु न रात-दिन, न सुबह-शाम, न घर के अंदर-न बाहर, न मनुष्य और न ही जानवर से हो और अस्त्र या शस्त्र से भी न मारा जाऊं. भगवान ने अपने वरदान के अनुसार गोधूलि बेला में खंभा फाड़कर प्रकट हुए और घर की दहलीज पर हिरण्यकश्यप को अपने जंघे पर लिटाकर दोनों हाथों के नखों से उसका पेट फाड़ दिया था. इस वजह श्रीहरि को सबसे अनोखा स्वरूप नरसिंह का धारण करना पड़ा.
नृसिंह पूजन का महत्व
- मान्यता है कि नरसिंह जयंती के दिन भगवान नरसिंह की पूजा करने से भक्तों के अंदर का भय दूर होता है.
- भगवान नरसिंह की कृपा से जीवन में आने वाले संकटों का नाश होता है.
- भगवान किसी भी परिस्थिति में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं.
- उनकी पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाले कष्टों से छुटकारा मिलता है.
- नरसिंह जयंती के दिन व्रत रखने और भगवान नरसिंह की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है.
- ग्रह-दोष से पीड़ित जातक के जीवन के सारे ग्रह-दोष से भी मुक्ति हो जाते हैं.
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